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पत्रकारिता के नाम पर कथित वसूली का मामला गरमाया, बिलासपुर प्रेस क्लब ने शासन-प्रशासन को सौंपा ज्ञापन

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बिलासपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009

सोशल मीडिया पर अपुष्ट खबरें चलाने और विज्ञापन के नाम पर दबाव बनाने की शिकायतों की जांच की मांग, सरकारी विज्ञापन व्यवस्था में पारदर्शिता और राज्यस्तरीय शिकायत निवारण तंत्र बनाने का प्रस्ताव।

बिलासपुर ACGN:- पत्रकारिता लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है, जिसका आधार निष्पक्षता, विश्वसनीयता और जनहित है। लेकिन जब इसी पेशे की आड़ में कथित तौर पर दबाव बनाने, भ्रामक खबरें प्रसारित करने और विज्ञापन के नाम पर अनुचित वसूली की शिकायतें सामने आती हैं, तो सवाल केवल कुछ व्यक्तियों की गतिविधियों तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पूरी पत्रकारिता की साख पर उठने लगता है।
इसी मुद्दे को लेकर बिलासपुर प्रेस क्लब ने अब शासन-प्रशासन के समक्ष अपनी आवाज उठाई है। प्रेस क्लब ने राज्य शासन के प्रमुख सचिव, पुलिस महानिरीक्षक, कलेक्टर बिलासपुर और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर सोशल मीडिया पर पत्रकारिता के नाम पर कथित रूप से सक्रिय कुछ व्यक्तियों के खिलाफ सामने आ रही शिकायतों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। साथ ही संबंधित विभागों को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने का आग्रह किया गया है।
पत्रकारिता के नाम पर दबाव बनाने की शिकायतें, जांच की मांग
प्रेस क्लब ने ज्ञापन में कहा है कि जिले में इंस्टाग्राम, फेसबुक, यूट्यूब सहित विभिन्न सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर स्वयं को पत्रकार बताने वाले कुछ व्यक्तियों द्वारा कथित तौर पर अपुष्ट और भ्रामक वीडियो प्रसारित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही विज्ञापन अथवा समाचार प्रकाशन के नाम पर व्यापारियों, संस्थानों और अन्य लोगों पर अनुचित दबाव बनाने तथा अवैध वसूली की शिकायतें भी सामने आ रही हैं।
प्रेस क्लब का कहना है कि इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए तथ्यों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर जांच होनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति के विरुद्ध आरोप प्रमाणित होते हैं, तो उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। वहीं, किसी भी वैध पत्रकार या मीडिया संस्थान को अनावश्यक रूप से निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए।
          सरकारी विज्ञापन व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
बिलासपुर प्रेस क्लब ने सरकारी विज्ञापनों की प्रक्रिया को लेकर भी महत्वपूर्ण मांग रखी है। ज्ञापन में विज्ञापन जारी करने, स्वीकृति प्रदान करने, भुगतान और पात्रता से संबंधित स्पष्ट दिशा-निर्देश निर्धारित करने की बात कही गई है।
प्रेस क्लब का मानना है कि सरकारी विज्ञापन व्यवस्था पारदर्शी और जवाबदेह होनी चाहिए, ताकि किसी भी प्रकार के पक्षपात, अनुचित दबाव अथवा कथित अवैध वसूली की गुंजाइश न रहे। इसके लिए नियमों को सार्वजनिक करने और शिकायतों के निवारण की प्रभावी व्यवस्था बनाने की आवश्यकता जताई गई है।
डिजिटल पत्रकारिता के लिए पांच वर्ष के अनुभव का सुझाव
ज्ञापन में सोशल मीडिया के माध्यम से संचालित समाचार पोर्टलों और डिजिटल मीडिया संस्थानों की बढ़ती संख्या पर भी चिंता व्यक्त की गई है। प्रेस क्लब ने केंद्र और राज्य सरकार से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में स्पष्ट दिशा-निर्देश तैयार करने की मांग की है।
इसके साथ ही डिजिटल पत्रकारिता में कार्य करने वाले व्यक्तियों के लिए न्यूनतम पांच वर्ष का कार्यानुभव अनिवार्य करने का सुझाव दिया गया है। यह अनुभव प्रिंट मीडिया, इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अथवा किसी मान्यता प्राप्त मीडिया संस्थान में कार्य करने से संबंधित हो सकता है।
प्रेस क्लब ने फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने के मामलों की भी जांच कराने की मांग की है। ज्ञापन के अनुसार यदि कोई संस्था निजी लाभ, पहचान अथवा अन्य अनुचित उद्देश्य से किसी व्यक्ति को फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी करती है, तो संबंधित संस्था और जिम्मेदार व्यक्तियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।
डिजिटल प्लेटफॉर्म पर समाचार प्रसारित करने वाले व्यक्तियों के संबंध में प्राप्त शिकायतों की जांच के लिए संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने पर भी जोर दिया गया है।
                      प्रेस क्लब की प्रमुख मांगें
सरकारी विज्ञापन जारी करने, स्वीकृति, भुगतान और पात्रता की प्रक्रिया के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं।
विज्ञापन के नाम पर कथित अवैध वसूली की शिकायतों की उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर सक्षम एजेंसियों से जांच कराई जाए।
भ्रामक एवं अपुष्ट सामग्री प्रसारित करने के मामलों में लागू कानूनों के तहत निष्पक्ष कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
वास्तविक डिजिटल पत्रकारों, स्वतंत्र पत्रकारों, समाचार संस्थानों और आम नागरिकों के वैध अभिव्यक्ति के अधिकारों की रक्षा की जाए।
फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र जारी करने वाली संस्थाओं और जिम्मेदार व्यक्तियों की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
राज्य स्तर पर पारदर्शी, जवाबदेह और प्रभावी शिकायत निवारण व्यवस्था विकसित की जाए।
किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं, पत्रकारिता की विश्वसनीयता बचाने की पहल
बिलासपुर प्रेस क्लब ने स्पष्ट किया है कि यह पहल किसी व्यक्ति विशेष अथवा किसी वैध मीडिया संस्थान के विरुद्ध नहीं है। इसका उद्देश्य पत्रकारिता के नाम पर कथित रूप से संचालित गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाना, वास्तविक पत्रकारों की प्रतिष्ठा सुरक्षित रखना और डिजिटल मीडिया के क्षेत्र में पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना है।
अब इस ज्ञापन के बाद शासन-प्रशासन की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। शिकायतों की निष्पक्ष जांच, सरकारी विज्ञापन व्यवस्था के स्पष्ट नियम और डिजिटल पत्रकारिता के लिए जवाबदेह शिकायत निवारण तंत्र विकसित करने की दिशा में क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर सबकी नजर रहेगी।
पत्रकारिता का काम सत्ता और व्यवस्था से सवाल पूछना, जनता की आवाज उठाना और सच को सामने लाना है। लेकिन सवाल पूछने के अधिकार को किसी पर दबाव बनाने या वसूली का माध्यम नहीं बनाया जा सकता। पत्रकारिता की साख बनाए रखने के लिए जरूरी है कि आरोपों की निष्पक्ष जांच हो, दोष सिद्ध होने पर कानून के मुताबिक कार्रवाई हो और ईमानदारी से काम करने वाले पत्रकारों के अधिकार सुरक्षित रहें।


प्रदीप मिश्रा
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