विस्थापन से पहले सुविधाओं की तैयारी जरूरी, एसईसीएल के पुनर्वास गांवों को मॉडल बसाहट बनाने के निर्देश
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
कुसमुंडा, गेवरा और दीपका क्षेत्र के पुनर्वास स्थलों का कलेक्टर कुणाल दुदावत ने किया निरीक्षण। सड़क, पेयजल, नाली, जल निकासी, पार्क और खेल मैदान जैसी सुविधाओं के विकास पर जोर। स्पष्ट निर्देश – पुनर्वास स्थल पूरी तरह तैयार होने के बाद ही शुरू हो विस्थापन की प्रक्रिया।
कोरबा ACGN:- एसईसीएल की खदानों के विस्तार के लिए अधिग्रहित किए जाने वाले गांवों के परिवारों को विस्थापन के बाद बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान न होना पड़े, इसके लिए कोरबा जिला प्रशासन ने पुनर्वास स्थलों के विकास को लेकर सक्रियता बढ़ा दी है। कलेक्टर श्री कुणाल दुदावत ने कुसमुंडा, गेवरा और दीपका क्षेत्र में विकसित किए जा रहे पुनर्वास स्थलों का निरीक्षण कर अधिकारियों को सभी स्थलों को मॉडल पुनर्वास ग्राम के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर ने स्पष्ट कहा कि पुनर्वास स्थलों पर केवल जमीन उपलब्ध कराना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां रहने वाले परिवारों की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए सड़क, पेयजल, नाली, जल निकासी और अन्य जरूरी सुविधाओं का सुनियोजित विकास किया जाना चाहिए। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्माण कार्यों में तेजी लाने और सभी स्थलों के लिए विस्तृत विकास कार्ययोजना तैयार कर चरणबद्ध तरीके से काम पूरा करने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान कलेक्टर ने एसईसीएल कुसमुंडा क्षेत्र के अधिग्रहित ग्राम पाली-पड़निया के लिए ग्राम तरदा के जंगलपारा में विकसित किए जा रहे पुनर्वास स्थल का जायजा लिया। इसके अलावा एसईसीएल गेवरा क्षेत्र के अधिग्रहित ग्राम भिलाईबाजार के लिए ग्राम बिरदा, ग्राम नरईबोध के लिए गेवरा-इमलीछापर रोड स्थित ग्राम जहराजेल तथा अधिग्रहित ग्राम रलिया के पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना के लिए ग्राम दर्री में विकसित किए जा रहे स्थलों का भी निरीक्षण किया।
तरदा जंगलपारा स्थित पुनर्वास स्थल पर कलेक्टर ने जमीन का समतलीकरण, पेयजल आपूर्ति, ड्रेनेज और पानी निकासी की समुचित व्यवस्था तथा पहुंच मार्ग निर्माण को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुनर्वास स्थल पर परिवारों के पहुंचने से पहले जरूरी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध होनी चाहिए। इसी तरह बिरदा, जहराजेल और दर्री स्थित पुनर्वास स्थलों में भी जमीन समतलीकरण, सड़क निर्माण, पेयजल आपूर्ति और जल निकासी की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा।

कलेक्टर ने एसईसीएल अधिकारियों को सभी स्थलों पर निर्माण कार्यों की गति बढ़ाने के साथ विस्तृत विकास कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुनर्वास ग्रामों का विकास केवल आवासीय भूखंडों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वहां रहने वाले लोगों के सामाजिक और सामुदायिक जीवन को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। इसके लिए विकास प्रस्ताव में पार्क, खेल मैदान और अन्य उपयोगी सार्वजनिक सुविधाओं को भी शामिल करने पर जोर दिया।
पेयजल व्यवस्था को लेकर कलेक्टर ने विशेष रूप से स्थायी समाधान तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पुनर्वास स्थलों पर निर्बाध पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए प्रभावी कार्ययोजना बनाई जाए। भूमिगत जलस्रोतों के अलावा कैनाल के माध्यम से पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने और जल के दीर्घकालिक प्रबंध की संभावनाओं पर भी काम किया जाए, ताकि भविष्य में पेयजल की समस्या उत्पन्न न हो।
इसके साथ ही कलेक्टर ने राजस्व अधिकारियों को सभी पुनर्वास स्थलों का सीमांकन जल्द पूरा करने के निर्देश दिए, जिससे विकास कार्य निर्धारित योजना के अनुसार आगे बढ़ाए जा सकें। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि विस्थापित होने वाले परिवारों की आवश्यकताओं और सुविधाओं को प्राथमिकता में रखते हुए सभी निर्माण कार्यों की नियमित निगरानी की जाए।
निरीक्षण के दौरान कलेक्टर श्री दुदावत ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए स्पष्ट किया कि अधिग्रहित गांवों के परिवारों के विस्थापन की प्रक्रिया तब तक प्रारंभ नहीं की जाए, जब तक पुनर्वास एवं पुनर्स्थापना स्थल पूरी तरह तैयार न हो जाएं और वहां आवश्यक सुविधाएं विकसित न कर दी जाएं। उन्होंने इस अवधि में प्रभावित परिवारों की परिसंपत्तियों के मापन का कार्य निरंतर जारी रखने को कहा।
निरीक्षण के दौरान एसडीएम कटघोरा श्री विपिन दुबे, अपर कलेक्टर श्री देवेंद्र पटेल, संबंधित क्षेत्रों के महाप्रबंधक, तहसीलदार सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रदीप मिश्रा
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