इंदौर के कॉल सेंटर से चल रहा था साइबर ठगी का बड़ा खेल! रायगढ़ पुलिस ने 3 युवतियों समेत 5 आरोपियों को दबोचा
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रायगढ़ छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संजय जेठवानी रायगढ़
शेयर ट्रेडिंग में मोटे मुनाफे का झांसा देकर डॉक्टर से ₹34.17 लाख की ठगी; म्यूल बैंक खातों और 140-150 सिम कार्ड के इस्तेमाल की जानकारी, कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की तलाश जारी
रायगढ़ जिला ACGN:- शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर रायगढ़ के एक डॉक्टर से ₹34 लाख से अधिक की ऑनलाइन ठगी करने वाले साइबर नेटवर्क का रायगढ़ पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस की विशेष टीम ने मध्यप्रदेश के इंदौर में दबिश देकर तीन युवतियों और दो युवकों सहित पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में इंदौर के एक कॉल सेंटर से जुड़े नेटवर्क, म्यूल बैंक खातों और सिम कार्ड के जरिए साइबर ठगी की रकम का लेनदेन किए जाने के तथ्य सामने आए हैं।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस के अनुसार, साइबर ठगी के लिए करीब 140 से 150 सिम कार्ड उपलब्ध कराने की जानकारी भी सामने आई है। गिरोह के एक शातिर आरोपी पर पुलिस को गुमराह करने के उद्देश्य से स्वयं साइबर थाना रायगढ़ में अपने खाते में 5 लाख रुपये की संदिग्ध रकम आने और खाता होल्ड होने की शिकायत देने का भी आरोप है।
आरोपियों की गिरफ्तारी से साइबर पुलिस थाना रायगढ़ में दर्ज दो अपराधों का खुलासा हुआ है। इनमें सोनकरपारा निवासी डॉ. दिलीप कुमार मिश्रा से ₹34,17,531 की ठगी का मामला प्रमुख है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य संदिग्धों और दूसरे राज्यों में फैले संपर्कों की तलाश कर रही है।
शेयर ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का झांसा, डॉक्टर से ऐंठे ₹34.17 लाख
पहले मामले में सोनकरपारा, थाना जूटमिल निवासी डॉ. दिलीप कुमार मिश्रा ने 27 मई 2026 को साइबर पुलिस थाना रायगढ़ में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि मार्च 2025 में मोबाइल फोन के माध्यम से उनका संपर्क सुनील नाम के व्यक्ति से हुआ था। उसने शेयर ट्रेडिंग में निवेश करने पर अत्यधिक लाभ मिलने का प्रलोभन दिया और स्पार्टन ट्रेड कंपनी में निवेश करने के लिए प्रेरित किया।
आरोपियों ने व्हाट्सऐप के माध्यम से कंपनी का पोर्टफोलियो भेजा। इसमें निवेश की राशि पर लगातार बढ़ता हुआ मुनाफा दिखाया जाता रहा, जिससे डॉक्टर को निवेश पर अच्छे रिटर्न का भरोसा हो गया। इसके बाद कुछ अन्य व्यक्तियों ने भी फोन के माध्यम से संपर्क कर अलग-अलग समय पर उनसे निवेश कराया।
पुलिस के अनुसार, 28 अप्रैल 2025 से 3 अप्रैल 2026 के बीच डॉक्टर से कुल ₹34,17,531 निवेश कराए गए। जब उन्होंने अपनी रकम निकालने का प्रयास किया तो पैसा नहीं निकल पाया। इसके बाद भी उनसे और निवेश करने के लिए कहा जाता रहा। ठगी का एहसास होने पर उन्होंने पुलिस से शिकायत की। इस पर अपराध क्रमांक 06/2026, धारा 318(4), 3(5) बीएनएस के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू की गई।
बैंक खाते को बनाया ठगी की रकम का रास्ता, कमीशन लेने के तथ्य आए सामने
दूसरे मामले में हिल व्यू कॉलोनी, जिंदल, रायगढ़ निवासी सूरज शर्मा ने 27 सितंबर 2026 को साइबर पुलिस थाना रायगढ़ में आवेदन दिया था। उसने बताया कि उसके पंजाब नेशनल बैंक खाते में 12 दिसंबर 2025 से 7 जनवरी 2026 के बीच 18 बार में कुल ₹2,97,298 का लेनदेन हुआ था।
रकम प्राप्त होने और नकद निकासी के बाद महाराष्ट्र, कर्नाटक तथा पंजाब राज्यों में शिकायतें दर्ज होने पर उसका बैंक खाता फ्रीज कर दिया गया। सूरज शर्मा ने खाते के साइबर ठगी में इस्तेमाल होने और खाते पर लगी रोक हटाने के संबंध में जांच की मांग की थी।
जांच के दौरान पुलिस को ऐसे तथ्य मिले, जिनसे सूरज शर्मा द्वारा अपना बैंक खाता साइबर ठगी की रकम के लेनदेन के लिए उपलब्ध कराने की आशंका सामने आई। बैंक ट्रांजेक्शन की जांच में विवादित धनराशि में से इंदौर की गायत्री विश्वकर्मा के माध्यम से सूरज शर्मा को नकद और यूपीआई के जरिए कमीशन मिलने के तथ्य सामने आए।
पुलिस के अनुसार, बैंक खाते का म्यूल अकाउंट के रूप में इस्तेमाल कर आर्थिक लाभ अर्जित करने की भूमिका पाए जाने पर 30 सितंबर 2026 को अपराध क्रमांक 13/2026, धारा 318(4), 3(5) बीएनएस के तहत सूरज शर्मा और गायत्री विश्वकर्मा के विरुद्ध अपराध दर्ज किया गया।
मोबाइल नंबरों की जांच से इंदौर के कॉल सेंटर तक पहुंची पुलिस
दोनों मामलों की विवेचना साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक के नेतृत्व में निरीक्षक विमल राय और एएसआई नंद कुमार सारथी द्वारा की जा रही थी। जांच के दौरान पुलिस को एक कॉमन मोबाइल नंबर का उपयोग संदेही तनिषा पाटिल, इंदौर द्वारा किए जाने की जानकारी मिली। साथ ही सूरज शर्मा और इंदौर की गायत्री विश्वकर्मा के बीच संपर्क तथा कथित साइबर ठगी से संबंधित गतिविधियों के तथ्य सामने आए।
संदेहियों के मोबाइल नंबर इंदौर के अलग-अलग क्षेत्रों में सक्रिय पाए जाने पर साइबर पुलिस थाना रायगढ़ की विशेष टीम गठित कर इंदौर रवाना की गई। पुलिस टीम ने पलासिया क्षेत्र स्थित एक कॉल सेंटर में दबिश देकर गायत्री विश्वकर्मा और तनिषा पाटिल को पकड़ा।
इसके बाद विजय नगर क्षेत्र से ज्योति मालवीय को पकड़ा गया। ज्योति से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस ने परदेशीपुरा क्षेत्र से तरुण नागर को गिरफ्तार किया। वहीं, इंदौर से खरसिया आकर अपने रिश्तेदार के यहां रह रहे सूरज शर्मा को भी पुलिस ने पकड़ लिया।
आरोपियों को इंदौर में न्यायालय के समक्ष पेश कर ट्रांजिट रिमांड की प्रक्रिया पूरी करने के बाद रायगढ़ लाया गया।
140-150 सिम कार्ड उपलब्ध कराने की जानकारी, कई राज्यों तक फैले नेटवर्क की आशंका
रायगढ़ पुलिस की जांच में म्यूल बैंक खातों और सिम कार्ड के जरिए साइबर ठगी की रकम का लेनदेन किए जाने की जानकारी सामने आई है। प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, साइबर ठगी के लिए करीब 140 से 150 सिम कार्ड उपलब्ध कराने की बात भी जांच में सामने आई है।
पुलिस का कहना है कि गिरोह से जुड़े अन्य संदिग्धों के नाम भी सामने आए हैं। इस नेटवर्क के तार कई राज्यों से जुड़े होने की आशंका है। पुलिस की टीमें दूसरे राज्यों में संभावित आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही हैं। आरोपियों के मोबाइल फोन जब्त किए गए हैं तथा संबंधित बैंक खातों और लेनदेन के विवरण की जांच की जा रही है।
पुलिस के अनुसार, तरुण नागर, ज्योति मालवीय और तनिषा पाटिल की भूमिका अपराध क्रमांक 06/2026 में सामने आई है, जबकि अपराध क्रमांक 13/2026 में सूरज शर्मा, गायत्री विश्वकर्मा और तनिषा पाटिल की भूमिका की जांच की गई है। गिरफ्तार आरोपियों को संबंधित मामलों में न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत कर रिमांड की कार्रवाई की जा रही है।
गिरफ्तार पांच आरोपी कौन-कौन?
ज्योति मालवीय, पिता चिरप सिंह मालवीय, उम्र 20 वर्ष, निवासी मोहनीपुरा, थाना ब्यावरा, जिला राजगढ़, मध्यप्रदेश; वर्तमान पता विजय नगर, इंदौर।
तनिषा पाटिल, पिता राज पाटिल, उम्र 21 वर्ष, निवासी कृष्णबाग कॉलोनी, थाना विजय नगर, जिला इंदौर, मध्यप्रदेश।
तरुण नागर, पिता कैलाश नंद नागर, उम्र 23 वर्ष, निवासी जिला राजगढ़, मध्यप्रदेश; वर्तमान पता नंदा नगर, थाना परदेशीपुरा, इंदौर।
गायत्री कुमारी विश्वकर्मा, पिता लोकेश कुमार विश्वकर्मा, उम्र 21 वर्ष, निवासी वार्ड क्रमांक 05, शौकी नगर, किरोड़ीमल नगर, थाना कोतरारोड, रायगढ़; वर्तमान पता विजय नगर, इंदौर।
सूरज शर्मा, पिता देवेंद्र शर्मा, उम्र 21 वर्ष, निवासी एस-55, हिल व्यू कॉलोनी, पतरापाली, थाना कोतरारोड, रायगढ़।
एसएसपी शशि मोहन सिंह ने नागरिकों को किया सतर्क
वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शशि मोहन सिंह ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि साइबर अपराधी शेयर ट्रेडिंग में अत्यधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों की मेहनत की कमाई ठग रहे हैं। किसी भी अनजान व्यक्ति या कंपनी के झांसे में आकर निवेश न करें। अपने बैंक खाते, सिम कार्ड और पहचान संबंधी दस्तावेज किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल करने के लिए न दें। साइबर अपराधों में संलिप्त लोगों के विरुद्ध रायगढ़ पुलिस की सख्त कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
कार्रवाई करने वाली पुलिस टीम
इस पूरे मामले का खुलासा करने में साइबर थाना प्रभारी निरीक्षक विजय चेलक, निरीक्षक विमल राय, एएसआई नंद कुमार सारथी, आरक्षक महेश पंडा, पुष्पेन्द्र जाटवर, प्रशांत पंडा, जितेन्द्र कुर्रे, रविन्द्र गुप्ता, धर्मेन्द्र सिंह, विकास प्रधान तथा महिला आरक्षक लता नारंगे और यशोमति की अहम भूमिका रही।
साइबर ठगी से बचने के लिए सावधानी जरूरी
शेयर ट्रेडिंग में असामान्य रूप से अधिक मुनाफे का दावा करने वाले अनजान लोगों और कंपनियों से सावधान रहें। किसी भी निवेश से पहले उसकी वैधता की जांच करें। अपना बैंक खाता, एटीएम, ओटीपी, सिम कार्ड या पहचान संबंधी दस्तावेज किसी दूसरे व्यक्ति को न दें। थोड़े से कमीशन के लालच में बैंक खाते का इस्तेमाल दूसरों को करने देना भी गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है।
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