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51 हजार करोड़ की रेल परियोजनाएं! बदलेगी छत्तीसगढ़ की तस्वीर, लेकिन किन इलाकों को मिलेगा सबसे बड़ा फायदा?

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर

नए रेल कॉरिडोर, आधुनिक स्टेशन और आदिवासी अंचलों तक कनेक्टिविटी का विस्तार; उद्योग, व्यापार, पर्यटन और रोजगार को नई गति मिलने की उम्मीद

रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क का विस्तार अब केवल यात्री सुविधाओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसे औद्योगिक विकास, खनिज परिवहन, व्यापार और दूरस्थ क्षेत्रों को मुख्यधारा से जोड़ने की बड़ी योजना के रूप में देखा जा रहा है। प्रदेश में वर्तमान में 51,080 करोड़ रुपये की रेल परियोजनाओं पर काम जारी होने की जानकारी दी गई है। इन परियोजनाओं के पूरा होने से व्यस्त रेल मार्गों पर दबाव कम करने, माल ढुलाई की क्षमता बढ़ाने और उन क्षेत्रों तक रेल संपर्क पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है, जहां अब तक रेल सुविधाएं सीमित रही हैं।
प्रदेश में रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण के साथ नई रेल लाइनों, दोहरीकरण और विद्युतीकरण पर भी जोर दिया जा रहा है। बेहतर प्रतीक्षालय, स्वच्छ परिसर, दिव्यांगजनों के अनुकूल सुविधाएं और आधुनिक यात्री सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में काम हो रहा है। इससे यात्रियों को अधिक सुविधाजनक और व्यवस्थित रेल यात्रा का लाभ मिल सकता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना का विस्तार किया जा रहा है। वित्त वर्ष 2026-27 के लिए राज्य के रेलवे बजट का आवंटन बढ़ाकर 7,470 करोड़ रुपये किए जाने की जानकारी दी गई है, जबकि वर्ष 2009-14 के दौरान औसत वार्षिक आवंटन 311 करोड़ रुपये था। इस बढ़े हुए निवेश का उद्देश्य रेल नेटवर्क को मजबूत करने के साथ औद्योगिक और खनिज क्षेत्रों की परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करना है।


              राष्ट्रीय माल ढुलाई को मिलेगा नया विकल्प
छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण रेल योजनाओं में खरसिया-नया रायपुर-परमलकसा रेल कॉरिडोर शामिल है। लगभग 278 किलोमीटर लंबे इस प्रस्तावित मार्ग को अप्रैल 2025 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की मंजूरी मिली थी। परियोजना की लागत पहले 8,741 करोड़ रुपये अनुमानित थी, जिसे संशोधित कर 7,854 करोड़ रुपये बताया गया है।
इस कॉरिडोर का उद्देश्य बिलासपुर, रायपुर और दुर्ग के व्यस्त रेल खंडों पर दबाव कम करना तथा माल और यात्री ट्रेनों के लिए अतिरिक्त रेल मार्ग उपलब्ध कराना है। इससे कोयला, लौह अयस्क, इस्पात, सीमेंट और बिजली उत्पादन से जुड़े उद्योगों को बेहतर परिवहन सुविधा मिलने की उम्मीद है। बलौदाबाजार सहित नए औद्योगिक क्षेत्रों को रेल संपर्क मिलने से माल ढुलाई में तेजी आ सकती है और सड़क परिवहन पर निर्भरता भी कम हो सकती है।


              बस्तर तक रेल पहुंचाने की बड़ी चुनौती
छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचल बस्तर में रेल कनेक्टिविटी का विस्तार आर्थिक और सामाजिक विकास की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। रावघाट-जगदलपुर रेल लाइन लगभग 140 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित परियोजना है, जिसके लिए भूमि अधिग्रहण पूरा होने की जानकारी दी गई है। वहीं किरंदुल-कोत्तागुडेम लगभग 180 किलोमीटर तथा गढ़चिरौली-बीजापुर-किरंदुल (बचेली) लगभग 490 किलोमीटर की नई रेल लाइन परियोजनाओं के सर्वेक्षण की प्रक्रिया जारी बताई गई है।
दल्लीराजहरा-रावघाट रेल परियोजना के अंतर्गत दल्लीराजहरा से अंतागढ़ तक लगभग 77 किलोमीटर के खंड में रेल सेवाएं शुरू हो चुकी हैं। इससे क्षेत्र के ग्रामीणों को रेल यात्रा की सुविधा मिली है। अगले चरण में रावघाट तक रेल संपर्क विकसित करने की योजना है। परियोजना पूरी होने पर रावघाट की लौह अयस्क खदानों को भिलाई इस्पात संयंत्र से जोड़ने में मदद मिल सकती है। इसके अलावा कोत्तावलसा-किरंदुल रेल लाइन के दोहरीकरण से बस्तर क्षेत्र में माल और यात्री परिवहन की क्षमता बढ़ाने का लक्ष्य है।
हालांकि, बस्तर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में रेल परियोजनाओं की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि निर्माण कार्य कितनी तेजी से आगे बढ़ते हैं और स्थानीय आबादी को इनका लाभ कब तक मिल पाता है।
          कटघोरा से डोंगरगढ़ तक प्रस्तावित रेल संपर्क
लगभग 295 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित कटघोरा-डोंगरगढ़ रेल लाइन भी प्रदेश के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। यह मार्ग कटघोरा से करतला, मुंगेली, कवर्धा और खैरागढ़ होते हुए डोंगरगढ़ तक प्रस्तावित है। योजना के अनुसार, इसे रेल मंत्रालय और छत्तीसगढ़ सरकार के संयुक्त उपक्रम के माध्यम से विकसित करने की संभावना है, जिसके लिए विशेष प्रयोजन इकाई यानी एसपीवी गठित करने का प्रस्ताव है।
इस रेल मार्ग से ऐसे क्षेत्रों को रेल नेटवर्क से जोड़ने में मदद मिल सकती है, जहां रेल सुविधा उपलब्ध नहीं है या सीमित है। इससे यात्रियों की आवाजाही, कृषि उत्पादों के परिवहन, व्यापार और पर्यटन को प्रोत्साहन मिलने की उम्मीद है। स्थानीय लोगों को रोजगार और व्यवसाय के नए अवसर भी मिल सकते हैं।
उत्तर छत्तीसगढ़ की उम्मीदें भी बढ़ीं


         उत्तर छत्तीसगढ़ में रेल संपर्क मजबूत करने के लिए सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर लगभग 244 किलोमीटर, धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा लगभग 301 किलोमीटर और अंबिकापुर-बरवाडीह लगभग 200 किलोमीटर के रेल कॉरिडोर प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं पर मंजूरी और सर्वेक्षण से संबंधित प्रक्रिया में तेजी लाने की जरूरत जताई गई है।
यदि इन योजनाओं को मंजूरी मिलती है और समयबद्ध तरीके से जमीन पर उतारा जाता है, तो उत्तर छत्तीसगढ़ और सीमावर्ती क्षेत्रों में व्यापार, पर्यटन, खनिज परिवहन तथा स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ सकते हैं। फिलहाल इन प्रस्तावित रेल लाइनों के लिए आगे की प्रक्रिया और स्वीकृतियों की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी।
         32 रेलवे स्टेशनों के आधुनिकीकरण पर भी जोर
नई रेल लाइनों के साथ मौजूदा रेलवे स्टेशनों को आधुनिक बनाने का काम भी जारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत छत्तीसगढ़ के 32 रेलवे स्टेशनों को लगभग 1,680 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य स्टेशन परिसरों को अधिक स्वच्छ, व्यवस्थित और यात्री सुविधाओं से युक्त बनाना है।
इस योजना के अंतर्गत चांपा, बालोद और सरोना रेलवे स्टेशनों के उन्नयन का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा वर्चुअल लोकार्पण किया जाना प्रदेश के रेल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया गया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस पहल के लिए प्रधानमंत्री और केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रेलवे केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि आर्थिक और सामाजिक विकास का आधार है। आधुनिक स्टेशन व्यापार, पर्यटन और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
        विकास की असली परीक्षा जमीन पर दिखेगी
छत्तीसगढ़ में रेल परियोजनाओं का विस्तार उद्योगों, किसानों, व्यापारियों, यात्रियों और युवाओं के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है। बेहतर रेल संपर्क से परिवहन लागत घटने, बाजारों तक पहुंच आसान होने और नए रोजगार पैदा होने की उम्मीद है। विशेष रूप से आदिवासी और दूरस्थ क्षेत्रों में रेल पहुंचने से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और दैनिक आवागमन के अवसरों में सुधार हो सकता है।
लेकिन किसी भी परियोजना की सफलता केवल स्वीकृत राशि या घोषित योजनाओं से तय नहीं होती। निर्माण की गति, समय-सीमा, भूमि अधिग्रहण, स्थानीय जरूरतों और यात्री सुविधाओं की गुणवत्ता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि 51,080 करोड़ रुपये की इन रेल परियोजनाओं का लाभ प्रदेश के अलग-अलग क्षेत्रों तक कितनी जल्दी और कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचता है।


प्रदीप मिश्रा
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