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म्यूल बैंक खातों का बड़ा खेल बेनकाब! ऑनलाइन सट्टे से देशभर की साइबर ठगी तक, दुर्ग पुलिस की बड़ी कार्रवाई

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दुर्ग छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय

बैंक खातों की खरीद-बिक्री कर कमीशन कमाने का आरोप, सुपेला में दो आरोपी गिरफ्तार, खुर्सीपार के मामले में पांच और आरोपी पकड़े गए; बैंक खातों के दुरुपयोग की जांच जारी।

दुर्ग ACGN:- बैंक खाता खुलवाकर या अपने खाते को दूसरों के हवाले कर कमीशन कमाने का लालच किस तरह साइबर अपराध का माध्यम बन सकता है, इसका खुलासा दुर्ग पुलिस की दो अलग-अलग कार्रवाइयों में हुआ है। सुपेला में ऑनलाइन सट्टे के लेन-देन में कथित तौर पर इस्तेमाल किए जा रहे म्यूल बैंक खातों की खरीद-बिक्री का मामला सामने आया है, वहीं खुर्सीपार में इंडियन बैंक के 81 खातों के दुरुपयोग से देश के विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी की रकम ट्रांसफर किए जाने के मामले में पांच और आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने दोनों मामलों में बैंक खातों के इस्तेमाल, संदिग्ध लेन-देन और अन्य संबंधित लोगों की भूमिका की जांच तेज कर दी है।
         सुपेला में खातों की खरीद-बिक्री का खुलासा


थाना सुपेला पुलिस के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 को मुखबिर से सूचना मिली कि नीरज गायकवाड़ और अंशु साव कथित रूप से ऑनलाइन सट्टे के लेन-देन में उपयोग होने वाले म्यूल बैंक खातों की खरीद-बिक्री कर रहे हैं। सूचना के आधार पर पुलिस टीम ने दाऊ बाड़ा तालाब के पास कार्रवाई करते हुए दोनों को हिरासत में लिया। पूछताछ में आंध्र प्रदेश ग्रामीण बैंक के खातों को कम कीमत पर खरीदकर अधिक कीमत पर बेचने की जानकारी सामने आई।
पुलिस के मुताबिक, नीरज गायकवाड़, उम्र 25 वर्ष, निवासी कृष्णा नगर, अंबेडकर चौक, सुपेला ने अंशु साव, उम्र 22 वर्ष, निवासी स्पर्श अस्पताल के पास, पुरानी बस्ती, सतनामी पारा, सुपेला से चार बैंक खाते 88 हजार रुपये में खरीदकर सिकंदर नामक व्यक्ति को एक लाख रुपये में बेचने की बात बताई। प्रारंभिक पूछताछ में एक खाते का उपयोग ऑनलाइन सट्टा पैनल के लेन-देन में किए जाने तथा क्यूआर कोड के माध्यम से प्राप्त रकम को सिकंदर द्वारा बताए गए खाते में भेजे जाने की जानकारी भी सामने आई। इसके बदले प्रतिमाह 25 हजार रुपये मिलने की बात बताई गई है।
इसी मामले में अंशु साव ने कथित तौर पर करण सागरिया से आंध्र प्रदेश ग्रामीण बैंक के चार खाते 80 हजार रुपये में खरीदकर नीरज गायकवाड़ को 88 हजार रुपये में बेचने की जानकारी दी। पुलिस ने इस मामले में अपराध क्रमांक 1552/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 317(2), 317(4) और 3(5) के अंतर्गत अपराध पंजीबद्ध कर दोनों आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से चार मोबाइल फोन, एक बैंक पासबुक और तीन एटीएम कार्ड जब्त किए गए हैं। दोनों को न्यायिक रिमांड पर भेजे जाने की जानकारी पुलिस ने दी है।
        खुर्सीपार में 81 बैंक खातों के दुरुपयोग का मामला


दूसरी कार्रवाई थाना खुर्सीपार क्षेत्र में दर्ज साइबर धोखाधड़ी के मामले से जुड़ी है। पुलिस के अनुसार, गृह मंत्रालय के समन्वय पोर्टल से मिली जानकारी के आधार पर इंडियन बैंक के 81 खातों के दुरुपयोग से संबंधित मामला दर्ज किया गया था। जांच में सामने आया कि कथित तौर पर इन खातों का उपयोग देश के विभिन्न राज्यों में साइबर ठगी से प्राप्त रकम जमा करने और उसे आगे दूसरे खातों में स्थानांतरित करने के लिए किया जा रहा था।
पुलिस के मुताबिक, कुछ खाताधारक अपने बैंक खाते साइबर अपराध में संलिप्त व्यक्तियों को उपलब्ध कराते थे। खातों में ठगी की रकम जमा होने के बाद कमीशन लेकर राशि दूसरे खातों में भेजी जाती थी। मामले में आगे की जांच के दौरान पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें तरुण कुमार, उम्र 40 वर्ष, निवासी बालाजी नगर, खुर्सीपार; गौरव साहू, उम्र 23 वर्ष, निवासी शंकर नगर, थाना मोहन नगर; जसमीत, उम्र 23 वर्ष, निवासी शिवाजी नगर, खुर्सीपार; निखिल नेम, उम्र 22 वर्ष, निवासी एसटीएफ कॉलोनी, बघेरा, थाना दुर्ग; और नरगिस बानो, उम्र 26 वर्ष, निवासी मछली मार्केट, खुर्सीपार शामिल हैं।
इस मामले में अपराध क्रमांक 272/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 318(2), 318(3), 318(4) और 238 के अंतर्गत कार्रवाई की जा रही है। पुलिस विज्ञप्ति के अलग-अलग हिस्सों में अब तक गिरफ्तार आरोपियों की कुल संख्या को लेकर नौ और दस का उल्लेख है। इसलिए कुल गिरफ्तारी की संख्या की आधिकारिक पुष्टि किया जाना आवश्यक है। खुर्सीपार पुलिस ने बताया कि मामले की विवेचना जारी है और बैंक खातों के माध्यम से हुए लेन-देन की कड़ियां खंगाली जा रही हैं।
        कमाई का लालच बन सकता है बड़ी मुसीबत
दोनों मामलों से एक अहम बात सामने आती है कि बैंक खाते, एटीएम कार्ड, पासबुक या बैंकिंग से जुड़ी जानकारी किसी अन्य व्यक्ति को इस्तेमाल के लिए देना गंभीर कानूनी परेशानी का कारण बन सकता है। साइबर ठगी की रकम किसी के खाते में आने और वहां से आगे भेजे जाने पर खाताधारक भी जांच के दायरे में आ सकता है। इसलिए किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर खाता खुलवाना, खाते का नियंत्रण सौंपना या कमीशन के बदले लेन-देन करना जोखिम भरा है।
सुपेला की कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक एस.एन. सिंह, उप निरीक्षक चितराम ठाकुर, आरक्षक कमल याहू और मनोज सिन्हा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। खुर्सीपार की कार्रवाई में थाना प्रभारी निरीक्षक लक्ष्मण केवट और उनकी टीम शामिल रही।
बैंक खाते का उपयोग केवल वैध और अपने नियंत्रण में होने वाले लेन-देन के लिए करें। खाते में किसी संदिग्ध रकम के आने या अनजान व्यक्ति द्वारा खाते के उपयोग का दबाव बनाए जाने पर तुरंत बैंक और पुलिस को सूचना दें। साइबर वित्तीय धोखाधड़ी होने पर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करें या www.cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जागरूकता और समय पर सूचना देकर ही ऐसे अपराधों पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिल सकती है।


प्रदीप मिश्रा
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