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अस्पतालों में दवा, डॉक्टर और जांच की कमी नहीं चलेगी! मुख्यमंत्री साय ने दिए सख्त निर्देश

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009

संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर

स्वास्थ्य सेवाओं की उच्चस्तरीय समीक्षा में भविष्य की जरूरतों के अनुरूप अस्पतालों के विस्तार, दूरस्थ क्षेत्रों में वैकल्पिक परिवहन, मातृ-शिशु स्वास्थ्य और त्योहारों में मिलावटखोरी पर सख्ती के निर्देश।

रायपुर ACGN:- प्रदेश के नागरिकों को समय पर बेहतर इलाज, आवश्यक दवाइयां और जांच सुविधाएं उपलब्ध कराना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों की उपलब्धता से लेकर चिकित्सा उपकरणों के रखरखाव तक, हर स्तर पर व्यवस्था मजबूत की जाए। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में अधिकारियों को ये निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाएं सीधे आम नागरिकों के जीवन और परिवार की सुरक्षा से जुड़ी हैं। इसलिए केवल अस्पताल भवनों का निर्माण पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां डॉक्टर, विशेषज्ञ, दवाइयां, जांच सुविधाएं और जरूरी उपकरण भी उपलब्ध होने चाहिए। उन्होंने प्रदेश की बढ़ती आबादी और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य अधोसंरचना के विकास की दीर्घकालिक कार्ययोजना तैयार करने को कहा।



जिला अस्पताल से प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र तक सुविधाओं पर जोर

मुख्यमंत्री ने जिला अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयों तथा जांच सुविधाओं की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को सामान्य जांच और उपचार के लिए अनावश्यक भटकना न पड़े। चिकित्सा उपकरणों की समय पर मरम्मत हो और कोई भी महत्वपूर्ण उपकरण लंबे समय तक बंद न रहे।

बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 1,045 स्वास्थ्य संस्थानों में अटल आरोग्य लैब संचालित हैं। डायलिसिस, ट्रॉमा केयर, ब्लड बैंक, आईसीयू और सीटी स्कैन जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है। वर्तमान में 33 स्थानों पर डायलिसिस की सुविधा उपलब्ध है और 25 नए डायलिसिस केंद्र शुरू किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त पदों पर भर्ती की प्रक्रिया में तेजी लाने के भी निर्देश दिए।

  सुरक्षित प्रसव और मातृ-शिशु स्वास्थ्य सर्वोच्च प्राथमिकता

मुख्यमंत्री श्री साय ने गर्भवती महिलाओं की नियमित जांच, आवश्यक पोषण, चिकित्सा देखभाल और सुरक्षित संस्थागत प्रसव पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि हर प्रसव सुरक्षित हो और जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ रहें, इसके लिए स्वास्थ्य विभाग संवेदनशीलता और जिम्मेदारी से कार्य करे।

उन्होंने मातृ मृत्यु दर और शिशु मृत्यु दर में और कमी लाने के लिए विशेष कार्ययोजना तैयार करने को कहा। बैठक में पूर्ण टीकाकरण, विशेष पिछड़ी जनजातियों में टीकाकरण, मलेरिया नियंत्रण, कुष्ठ रोग निवारण और टीबी उन्मूलन कार्यक्रमों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने दूरस्थ एवं जनजातीय क्षेत्रों में समय पर बीमारी की पहचान और उपचार की व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए।



    जहां एम्बुलेंस नहीं पहुंच सके, वहां बने वैकल्पिक व्यवस्था

दूरस्थ, वनांचल और दुर्गम क्षेत्रों में मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए मुख्यमंत्री ने स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप वैकल्पिक परिवहन व्यवस्था विकसित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि जहां सड़क या भौगोलिक परिस्थितियों के कारण एम्बुलेंस नहीं पहुंच सकती, वहां मरीज को गांव से एम्बुलेंस प्वाइंट अथवा नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र तक सुरक्षित पहुंचाने की व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए।

अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में 108 संजीवनी एक्सप्रेस के अंतर्गत 375 एम्बुलेंस तथा 102 महतारी एक्सप्रेस के अंतर्गत 380 वाहन उपलब्ध हैं। जनवरी से अगस्त 2026 के बीच महतारी एक्सप्रेस सेवा से 2 लाख 19 हजार से अधिक हितग्राही लाभान्वित हुए हैं। मुख्यमंत्री ने एम्बुलेंस सेवाओं का समयबद्ध और प्रभावी संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

उन्होंने अस्पताल में मृत्यु होने की स्थिति में परिजनों को शव वाहन की सुविधा सहजता और समय पर उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि दुख की घड़ी में परिवार को बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान नहीं होना चाहिए। स्वास्थ्य सेवाओं में मानवीय संवेदनाओं और परिजनों की गरिमा का पूरा ध्यान रखा जाए।



    छह नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत, नर्सिंग और फिजियोथेरेपी शिक्षा का विस्तार

चिकित्सा शिक्षा की समीक्षा के दौरान बताया गया कि प्रदेश में 15 शासकीय मेडिकल कॉलेज, एक एम्स और छह निजी मेडिकल कॉलेज सहित कुल 22 चिकित्सा संस्थान हैं। इसके अतिरिक्त छह नए मेडिकल कॉलेज स्वीकृत किए गए हैं।

मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन मेडिकल कॉलेजों की प्रगति, फैकल्टी की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों और आधुनिक उपकरणों की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि मेडिकल कॉलेज केवल चिकित्सा शिक्षा के केंद्र नहीं, बल्कि संबंधित क्षेत्रों के महत्वपूर्ण उपचार केंद्र भी हैं। इसलिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के साथ बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं भी सुनिश्चित की जाएं।

बैठक में जानकारी दी गई कि शासकीय नर्सिंग कॉलेजों की संख्या आठ से बढ़कर 17 और फिजियोथेरेपी कॉलेजों की संख्या एक से बढ़कर सात हो गई है। प्रदेश में पहली बार एलाइड हेल्थ के 11 पाठ्यक्रम भी शुरू किए जा रहे हैं, जिनके लिए 10 मेडिकल कॉलेजों में 640 सीटों की व्यवस्था की गई है। रायपुर के मेकाहारा अस्पताल में पहली बार डीएम कार्डियोलॉजी की दो सीटें भी शुरू की गई हैं।

   सिकल सेल और मानसिक स्वास्थ्य पर भी विशेष ध्यान

मुख्यमंत्री ने सिकल सेल रोग की रोकथाम, जांच, उपचार और जनजागरूकता बढ़ाने के निर्देश दिए। उन्होंने प्रभावित क्षेत्रों में स्क्रीनिंग और परामर्श सेवाओं को मजबूत करने तथा विवाह पूर्व स्वैच्छिक जांच और आनुवंशिक परामर्श के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। वर्ष 2047 तक सिकल सेल उन्मूलन के लक्ष्य की दिशा में योजनाबद्ध प्रयास करने को कहा।

मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की समीक्षा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। जरूरतमंद लोगों तक परामर्श और उपचार सेवाओं की जानकारी पहुंचाई जाए, ताकि वे समय रहते सहायता प्राप्त कर सकें। बैठक में आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री विशेष स्वास्थ्य सहायता योजना, आयुष्मान आरोग्य मंदिर और मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान की प्रगति की भी समीक्षा की गई। अधिकारियों के अनुसार, मुख्यमंत्री स्वस्थ बस्तर अभियान के तहत एक लाख लोगों को उपचार का लाभ मिला है।

त्योहारों में मिलावटखोरी पर सख्ती, खाद्य पदार्थों की होगी जांच

त्योहारी सीजन को देखते हुए मुख्यमंत्री ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन को मिठाई, दुग्ध उत्पाद और अन्य खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए सघन जांच अभियान चलाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि खाद्य पदार्थों के निर्माण, भंडारण और बिक्री स्थलों की नियमित जांच की जाए तथा अमानक या मिलावटी खाद्य पदार्थ पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई हो।

मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि नागरिकों के स्वास्थ्य से किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। उन्होंने अधिकारियों को स्वास्थ्य योजनाओं की नियमित निगरानी करने और कमियों का समयबद्ध निराकरण सुनिश्चित करने को कहा।

बैठक में स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल, मुख्य सचिव श्री विकास शील, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री सुबोध कुमार सिंह, स्वास्थ्य विभाग के सचिव श्री अमित कटारिया, मुख्यमंत्री के सचिव श्री पी. दयानंद सहित स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य योजनाओं की वास्तविक सफलता तभी है, जब उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक समय पर पहुंचे। सरकार का लक्ष्य है कि शहर हो या दूरस्थ वनांचल, प्रत्येक नागरिक को आवश्यकता पड़ने पर सुलभ, संवेदनशील और गुणवत्तापूर्ण उपचार उपलब्ध हो।



प्रदीप मिश्रा

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