गांधी जयंती पर हथियारों की तस्वीरों से उठा सवाल, IG से जांच और कार्रवाई की मांग
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अंबिकापुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अंबिकापुर
अधिवक्ता और उनके नाबालिग पुत्र के फेसबुक पोस्ट का मामला, शिकायतकर्ता ने पुराने फोटो और डिजिटल साक्ष्य जांच के लिए सौंपने की बात कही
अंबिकापुर ACGN:- गांधी जयंती के दिन जब देशभर में महात्मा गांधी के सत्य, अहिंसा और शांति के संदेश को याद किया जा रहा था, उसी दिन अंबिकापुर में सोशल मीडिया पर कथित रूप से हथियारों के प्रदर्शन से जुड़ी शिकायत सामने आई है। समाजसेवी अभय नारायण पांडेय ने सरगुजा रेंज के पुलिस महानिरीक्षक को पत्र देकर अधिवक्ता संजय अंबष्ट और उनके नाबालिग पुत्र से संबंधित फेसबुक पोस्ट तथा तस्वीरों की उच्चस्तरीय जांच कराने और यदि कानून का उल्लंघन पाया जाए तो नियमानुसार कार्रवाई करने की मांग की है।

शिकायतकर्ता का आरोप है कि संजय अंबष्ट के फेसबुक अकाउंट पर अलग-अलग समय में हथियारों के साथ तस्वीरें पोस्ट की गई हैं। शिकायत में 5 जनवरी 2015 की एक तस्वीर का उल्लेख किया गया है, जिसमें एके-पैटर्न राइफल जैसी दिखाई देने वाली बंदूक के साथ तस्वीर होने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से हथियार की विशेषज्ञ से पहचान कराने और यह पता लगाने की मांग की है कि हथियार वास्तविक था या नहीं तथा यदि वास्तविक था तो उसके स्वामित्व और वैध स्रोत की क्या स्थिति थी।

इसी तरह 21 फरवरी 2015 की एक तस्वीर में पिस्तौल जैसी दिखाई देने वाली आग्नेयास्त्र के साथ फोटो होने का उल्लेख शिकायत में किया गया है। इसके अलावा 25 जून 2017 की स्कोप लगी लंबी राइफल वाली तस्वीर का भी हवाला देते हुए उसके स्रोत और लाइसेंस की जांच की मांग की गई है।

शिकायत का एक प्रमुख हिस्सा कथित तौर पर नाबालिग से जुड़ी तस्वीरों को लेकर है। शिकायतकर्ता के अनुसार 7 अक्टूबर 2015 की सोशल मीडिया तस्वीर में संजय अंबष्ट के नाबालिग पुत्र के हाथ में लंबी बैरल वाली बंदूक या शॉटगन जैसी दिखाई देने वाली वस्तु नजर आती है। शिकायत में संबंधित कैप्शन का भी उल्लेख किया गया है। वहीं 28 जुलाई 2018 की एक अन्य तस्वीर में नाबालिग के हाथ में तलवार जैसी धारदार वस्तु होने का दावा किया गया है।
शिकायतकर्ता ने पुलिस से यह भी मांग की है कि तस्वीरों में दिखाई देने वाले हथियार वास्तविक हैं या नहीं, उनकी प्रकृति क्या है और यदि वे वास्तविक आग्नेयास्त्र हैं तो उनके लाइसेंस, स्वामित्व, उपयोग तथा उपलब्धता से संबंधित दस्तावेजों की जांच की जाए।

Arms Act, 1959 की धारा 9 में 21 वर्ष से कम आयु के व्यक्ति द्वारा firearm या ammunition हासिल करने, अपने कब्जे में रखने या ले जाने पर रोक का प्रावधान है। वहीं धारा 7 प्रतिबंधित हथियारों और प्रतिबंधित ammunition के संबंध में विशेष प्राधिकरण के बिना acquisition, possession या carrying पर रोक लगाती है।

शिकायतकर्ता ने Arms Act की विभिन्न धाराओं के तहत जांच की मांग की है। हालांकि किसी तस्वीर में दिखाई देने वाले हथियार के आधार पर कौन-सी कानूनी धारा लागू होगी, यह हथियार की वास्तविक पहचान, लाइसेंस की स्थिति, तस्वीर की प्रमाणिकता और अन्य जांच तथ्यों पर निर्भर करेगा। इसलिए इन तस्वीरों को लेकर अंतिम कानूनी स्थिति पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

शिकायत में नाबालिग से संबंधित कानूनी पहलुओं की भी जांच की मांग की गई है। यहां यह महत्वपूर्ण है कि Juvenile Justice (Care and Protection of Children) Act, 2015 की धारा 23 संयुक्त कार्यवाही से संबंधित है, जबकि बच्चे के साथ क्रूरता से संबंधित प्रावधान धारा 75 में है। इसलिए शिकायत में उद्धृत धाराओं की वास्तविक लागू होने की स्थिति भी जांच एजेंसी द्वारा तथ्यों और कानून के आधार पर तय की जानी होगी।
शिकायतकर्ता का कहना है कि संबंधित फेसबुक पोस्ट और तस्वीरों के डिजिटल साक्ष्य तथा मेटाडेटा सुरक्षित किए गए हैं और जरूरत पड़ने पर इन्हें जांच अधिकारी को उपलब्ध कराया जाएगा। इसके साथ ही पोस्ट की तारीख, समय और प्रमाणिकता की पुष्टि के लिए संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आधिकारिक रिकॉर्ड प्राप्त कराने की मांग भी की गई है।
अब इस शिकायत के बाद पुलिस की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है, यह महत्वपूर्ण होगा। क्या तस्वीरों में दिखाई देने वाले हथियार वास्तविक हैं, क्या उनके पास वैध लाइसेंस या अन्य अधिकृत दस्तावेज थे, नाबालिग को हथियार जैसी वस्तु किस परिस्थिति में दी गई और सोशल मीडिया पर पोस्ट की गई तस्वीरों की वास्तविकता क्या है—इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।
प्रदीप मिश्रा
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