60–70 साल से बसे घर की जमीन पर 50 मजदूरों से खुदाई का सरपंच पर आरोप, ₹2 लाख का ड्रिप सिस्टम तबाह!
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू
62 वर्षीय महिला का दावा—बिना सहमति घर-बाड़ी में गड्ढे खोदकर कराया पौधरोपण, तीन महीने से अधिकारियों के चक्कर
सूरजपुर ACGN:- जिले के खड़गवां निवासी 62 वर्षीय नरमादिया पति रामकिशुन ने अपनी जमीन और घर-बाड़ी को लेकर गंभीर शिकायत की है। महिला ने ग्राम पंचायत के सरपंच ओमप्रकाश सिंह पर आरोप लगाया है कि 7 जुलाई 2026 को करीब 50 मजदूरों के साथ उसके घर और बाड़ी में पहुंचकर कथित तौर पर जबरन गड्ढे खुदवाए गए और बाद में वहां पौधरोपण कराया गया। महिला का यह भी आरोप है कि खुदाई के दौरान करीब 2 लाख रुपये की लागत से लगाया गया ड्रिप सिंचाई सिस्टम क्षतिग्रस्त हो गया।
शिकायतकर्ता नरमादिया के अनुसार वह अपने परिवार के साथ इस जगह पर कई दशकों से निवास करती आ रही है। महिला का दावा है कि भूमि को लेकर पटवारी और राजस्व निरीक्षक यानी आरआई से संबंधित लिखित दस्तावेज भी उसके पास हैं। उसने आवेदन में 1988 और 2001 में भूमि का लगान पटाने का भी उल्लेख किया है।

महिला का आरोप है कि 7 जुलाई को सरपंच ओमप्रकाश सिंह करीब 50 मजदूरों के साथ उसकी बाड़ी में पहुंचे और खुदाई शुरू करा दी। नरमादिया के मुताबिक उसने मौके पर काम रोकने का विरोध किया और खुदाई का कारण पूछा, तब पौधरोपण के लिए गड्ढे किए जाने की बात कही गई। शिकायत में कहा गया है कि विरोध के बावजूद खुदाई जारी रही और बाद में घर के आसपास पौधे लगा दिए गए।
शिकायतकर्ता का कहना है कि बड़े-बड़े गड्ढे और पौधरोपण के कारण उसके घर से बाहर निकलने और आने-जाने में परेशानी हो रही है। महिला के मुताबिक घर के पास स्थित कुएं तक पानी लेने जाने में भी दिक्कत हो रही है। उसका आरोप है कि इस पूरी कार्रवाई के दौरान उसकी बाड़ी में लगा ड्रिप सिंचाई सिस्टम भी खराब हो गया, जिसकी कीमत करीब 2 लाख रुपये बताई गई है।
नरमादिया का कहना है कि घटना के बाद वह लगातार अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगा रही है। उसके आवेदन के अनुसार उसने कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, एसडीएम और तहसील कार्यालय में शिकायत की है। महिला का दावा है कि करीब तीन महीने बीत जाने के बाद भी उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल जमीन की वास्तविक स्थिति और पंचायत द्वारा कराई गई कार्रवाई के आधार को लेकर है। यदि संबंधित भूमि शासकीय है तो राजस्व रिकॉर्ड और मौके की स्थिति क्या बताती है? वहीं यदि महिला के दावे के अनुसार उसके पास पुराने राजस्व दस्तावेज और लगान भुगतान से जुड़े प्रमाण हैं, तो पौधरोपण और खुदाई से पहले भूमि का सीमांकन तथा अभिलेखों की जांच हुई थी या नहीं, यह भी जांच का विषय है।
महिला ने प्रशासन से मौके पर जांच कराने, राजस्व अभिलेखों के आधार पर जमीन की स्थिति स्पष्ट करने, घर-बाड़ी में कराई गई खुदाई और पौधरोपण की जांच करने तथा ड्रिप सिस्टम को हुए कथित नुकसान की जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में यह आशंका भी जताई है कि भविष्य में उसके साथ कोई अप्रिय घटना होती है तो इसके लिए सरपंच ओमप्रकाश सिंह और संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों को जिम्मेदार माना जाए।
फिलहाल महिला द्वारा लगाए गए आरोपों पर सरपंच ओमप्रकाश सिंह और संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष सामने नहीं आया है। जमीन किसके नाम और किस प्रकृति की है, पंचायत को वहां पौधरोपण कराने का क्या अधिकार या आदेश था और ड्रिप सिस्टम को वास्तव में कितना नुकसान हुआ, इन सभी सवालों का स्पष्ट जवाब राजस्व रिकॉर्ड, मौके की जांच और संबंधित पक्षों के बयान के बाद ही सामने आ सकेगा।
प्रदीप मिश्रा
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