कचरे से बनेंगी गांव की सड़कें! 644 महिलाओं के लिए कमाई का नया रास्ता
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण में 55 सड़कों के लिए 61 टन प्लास्टिक की जरूरत, घर-घर से जुटाए जा रहे कचरे को मिलेगा उपयोग
कोरबा ACGN:- घरों से निकलने वाला प्लास्टिक कचरा अब कोरबा के दूरस्थ गांवों की सड़कों में नजर आ सकता है। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के चौथे चरण में जिले के लिए करीब 162 किलोमीटर लंबी 55 सड़कें स्वीकृत हुई हैं। इन सड़कों के निर्माण में डामर के साथ तकनीकी मानकों के अनुरूप उपयुक्त अपशिष्ट प्लास्टिक का उपयोग किया जाना प्रस्तावित है। इसके लिए प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना विभाग ने करीब 61 टन प्लास्टिक सामग्री की मांग की है।
कोरबा, करतला, पोड़ी-उपरोड़ा और पाली विकासखंड के अलग-अलग ग्रामीण क्षेत्रों में इन सड़कों का निर्माण किया जा रहा है। विभाग के अनुसार निर्माण प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और फिलहाल मिट्टी से संबंधित कार्य चल रहे हैं। पक्की सड़कें बनने के बाद ग्रामीण क्षेत्रों में आवागमन आसान होने के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंच बेहतर होने की उम्मीद है।
कलेक्टर कुणाल दुदावत ने कहा कि प्लास्टिक कचरे का उचित उपयोग केवल कचरा प्रबंधन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसे ग्रामीण विकास और पर्यावरण संरक्षण से जोड़ने का अवसर भी है। नगर निगम क्षेत्र में घर-घर कचरा संग्रहण से जुड़ी स्व-सहायता समूह की महिलाओं का श्रम इस पूरी प्रक्रिया की अहम कड़ी बन सकता है।
कलेक्टर ने संबंधित विभागों को निर्देश दिए हैं कि सड़क निर्माण के लिए जरूरी तकनीकी मानकों के अनुसार प्लास्टिक की छंटाई, तैयारी और आपूर्ति में समन्वय रखा जाए। उनका कहना है कि प्रयास ऐसा होना चाहिए कि एक तरफ ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क निर्माण हो, दूसरी तरफ कचरा प्रबंधन व्यवस्था मजबूत हो और स्व-सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को भी इससे आर्थिक लाभ मिल सके। उन्होंने सड़क सहित अन्य निर्माण कार्यों में उपयोगिता के आधार पर प्लास्टिक और फ्लाईएश के इस्तेमाल को प्राथमिकता देने की बात भी कही।
कोरबा नगर निगम क्षेत्र में करीब 62 हजार घरों से रोजाना कचरा एकत्र किया जाता है। इस काम से स्व-सहायता समूहों की 644 महिला सदस्य जुड़ी हुई हैं। घरों से एकत्र कचरा 16 एमआरएफ केंद्रों तक पहुंचता है, जहां प्लास्टिक समेत अलग-अलग प्रकार के कचरे को अलग किया जाता है। उपयोगी सामग्री की छंटाई के बाद उसका विक्रय भी किया जाता है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार नगर निगम क्षेत्र में प्रतिदिन करीब 155 टन कचरा एकत्र होता है। इसमें लगभग 40 प्रतिशत सूखा और 60 प्रतिशत गीला कचरा होता है। इसी कचरे में रोजाना करीब चार से पांच टन प्लास्टिक भी शामिल रहता है। यदि सड़क निर्माण के लिए जरूरी गुणवत्ता वाला प्लास्टिक अलग कर उपलब्ध कराया जाता है तो कचरा संग्रहण और पृथक्करण से जुड़ी महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का रास्ता बन सकता है।
प्लास्टिक को दूसरे कचरे से अलग कर उपयोगी सामग्री के रूप में तैयार करने से खुले में बिखरे प्लास्टिक कचरे को कम करने में भी मदद मिल सकती है। गुणवत्ता और उपयोगिता के अनुसार छांटे गए प्लास्टिक का इस्तेमाल सड़क निर्माण के अलावा अन्य उपयोगी वस्तुओं के निर्माण में भी किया जा सकता है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के कार्यपालन अभियंता सी.एस. तंवर ने बताया कि स्वीकृत सड़कों के निर्माण में करीब 61 टन अपशिष्ट प्लास्टिक की आवश्यकता होगी। निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार उपयुक्त प्लास्टिक को तैयार कर डामर के साथ सड़क निर्माण में इस्तेमाल किया जाएगा। विभाग के अनुसार इससे डामर की आवश्यकता कुछ कम हो सकती है। प्लास्टिक सामग्री उपलब्ध कराने के लिए कलेक्टर को मांग भेजी गई है।
अब देखना यह होगा कि घर-घर से जुटाया जाने वाला प्लास्टिक कितनी प्रभावी तरीके से सड़क निर्माण की जरूरत तक पहुंचता है और इस प्रक्रिया से कचरा संग्रहण में जुटी महिलाओं की आय में वास्तव में कितना इजाफा होता है। फिलहाल पहल के सामने एक साथ दो लक्ष्य हैं—गांवों तक बेहतर सड़क पहुंचाना और शहर के प्लास्टिक कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलना।
प्रदीप मिश्रा
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