बैंक कर्मचारियों पर लगे आरोपों की पड़ताल में सामने आई अलग तस्वीर, ठोस प्रमाण नहीं मिले
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जी पी एम, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- दीपक गुप्ता
आरोपों की सच्चाई जानने पहुंची पड़ताल, संबंधित पक्षों से बातचीत के बाद कई सवालों पर स्थिति हुई स्पष्ट
मरवाही ACGN:- मरवाही स्थित एक बैंक में पदस्थ दो कर्मचारियों सुहैल अहमद और रामकृष्ण यादव के संबंध में कुछ गंभीर आरोप सामने आने के बाद मामले की पत्रकारिता के स्तर पर पड़ताल की गई। आरोपों में कर्मचारियों के समय पर बैंक नहीं पहुंचने, निजी व्यक्तियों के माध्यम से बैंकिंग कार्य कराए जाने तथा खाता खोलने, राशि स्थानांतरण और मृत्यु प्रमाण पत्र से जुड़े कार्यों के लिए कथित रूप से पैसे लिए जाने जैसी बातें कही गई थीं।
मामले की गंभीरता को देखते हुए उपलब्ध जानकारी के आधार पर संबंधित पक्षों से बातचीत की गई और सामने आए दावों को समझने का प्रयास किया गया। पड़ताल के दौरान लगाए गए आरोपों के समर्थन में ऐसे ठोस दस्तावेज अथवा प्रत्यक्ष प्रमाण सामने नहीं आए, जिनके आधार पर इन आरोपों को तथ्य के रूप में स्थापित किया जा सके।
वहीं, बैंक से जुड़े संबंधित पक्ष ने इन आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा कि बैंकिंग कार्य निर्धारित नियमों और प्रक्रिया के अनुसार किए जाते हैं तथा कर्मचारियों द्वारा किसी प्रकार की अवैध राशि लिए जाने की बात सही नहीं है। संबंधित पक्ष का यह भी कहना है कि कर्मचारियों के खिलाफ लगाए गए आरोपों के पीछे व्यक्तिगत विवाद अथवा आपसी रंजिश की पृष्ठभूमि हो सकती है।
हालांकि, इस संबंध में भी किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले संबंधित पक्षों के दावों और उपलब्ध प्रमाणों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि किया जाना आवश्यक है। पत्रकारिता की पड़ताल में फिलहाल इतना सामने आया कि कर्मचारियों के खिलाफ लगाए गए गंभीर आरोपों की पुष्टि करने वाला पर्याप्त ठोस प्रमाण उपलब्ध नहीं कराया गया है।
मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि यदि किसी कर्मचारी पर बैंकिंग कार्य के बदले अवैध रूप से राशि लेने या नियमों के विपरीत कार्य करने का आरोप लगाया जाता है तो उसके समर्थन में संबंधित दस्तावेज, रसीद, बैंक रिकॉर्ड अथवा अन्य प्रमाण भी सामने आने चाहिए। केवल मौखिक आरोपों के आधार पर किसी कर्मचारी की छवि को प्रभावित करना उचित नहीं माना जा सकता।
पड़ताल के दौरान यह भी सामने आया कि मामले से जुड़े पक्षों के बीच पूर्व विवाद अथवा व्यक्तिगत मतभेद की बात कही जा रही है। ऐसे में आरोपों के पीछे किसी प्रकार की आपसी रंजिश है या नहीं, इसका अंतिम निर्धारण संबंधित सक्षम अधिकारी द्वारा उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही किया जा सकता है।
फिलहाल पत्रकार द्वारा की गई पड़ताल में सामने आए उपलब्ध तथ्यों के आधार पर बैंक कर्मचारियों के विरुद्ध लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इस रिपोर्ट का उद्देश्य किसी व्यक्ति को दोषी अथवा निर्दोष घोषित करना नहीं, बल्कि सामने आए आरोपों और उपलब्ध जानकारी की स्थिति को पाठकों के सामने रखना है।
यदि भविष्य में संबंधित विभागीय जांच, बैंक के अभिलेख अथवा अन्य विश्वसनीय प्रमाणों से कोई नई तथ्यात्मक जानकारी सामने आती है तो उसका भी निष्पक्ष रूप से उल्लेख किया जा सकता है। सभी संबंधित पक्षों को अपना पक्ष रखने का समान अवसर दिया जाना आवश्यक है।
प्रदीप मिश्रा
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