*जमीन गई, जिंदगी मजदूरी में अटकी! आदिवासी मजदूर की हाजिरी कटी, सवाल पूछा तो विवाद! शिकायत के बाद प्रताड़ना के आरोपों से अडानी और लिफ्ट एंड शिफ्ट पर सवाल
|
😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊
|
सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
75 डिसमिल जमीन अधिग्रहण के बाद 2018 में ठेका कंपनी में मजदूरी, हाजिरी विवाद के बाद शिकायत और अब स्थानांतरण,आदिवासी प्रभावित परिवार के भविष्य पर सवाल
सूरजपुर ACGN:- जमीन किसी गरीब ग्रामीण के लिए केवल खेत का एक टुकड़ा नहीं होती, बल्कि वह उसके परिवार की आजीविका, बच्चों का भविष्य और आने वाली पीढ़ियों का सहारा होती है। सूरजपुर जिले के परसा क्षेत्र के चमन एक्का का मामला इसी मानवीय सवाल को सामने ला रहा है, जब जमीन चली जाए और उसके बदले मिलने वाला रोजगार भी स्थायी भविष्य की गारंटी न बन पाए, तो प्रभावित परिवार आखिर किस सहारे आगे बढ़े?
चमन एक्का के अनुसार उनकी करीब 75 डिसमिल जमीन रेलवे लाइन के लिए अडानी कंपनी द्वारा अधिग्रहित की गई थी। उनका कहना है कि जमीन जाने के बाद उन्हें अडानी कंपनी में नियमित नौकरी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन 14 जुलाई 2018 को उन्हें लिफ्ट एंड शिफ्ट आरसीसी एसोसिएट्स नामक ठेका कंपनी में गैंग नंबर 6 के मजदूर के रूप में काम दिया गया।
यहीं से उनके लिए एक बड़ा सवाल शुरू होता है, जमीन चली गई, लेकिन क्या उसके बदले मिला रोजगार परिवार के भविष्य के लिए पर्याप्त है?
चमन एक्का का कहना है कि उनके बाद काम पर आए कुछ लोगों को बेहतर पद और पदोन्नति के अवसर मिले, जबकि वे वर्षों से ठेका कंपनी के माध्यम से मजदूर के रूप में काम कर रहे हैं। यदि ऐसा है तो प्रभावित कर्मचारियों के लिए नियमित नियुक्ति और पदोन्नति के मापदंड क्या हैं? क्या इन मापदंडों को सार्वजनिक किया जा सकता है, ताकि किसी भी प्रकार के भेदभाव की आशंका दूर हो?
हाजिरी से शुरू हुआ विवाद, शिकायत पहुंची पुलिस तक
चमन एक्का द्वारा प्रस्तुत शिकायत के अनुसार 5 जून 2023 को उन्होंने अपनी हाजिरी काटे जाने के संबंध में जानकारी लेने के लिए सुपरवाइजर सुरेश बाबू से संपर्क किया था। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि इस दौरान उनके साथ गाली-गलौज, कथित जातिगत अपशब्द, मारपीट और धमकी जैसी घटनाएं हुईं।
इस घटना के संबंध में चमन एक्का ने पुलिस के समक्ष शिकायत की। उपलब्ध दस्तावेजों के अनुसार उन्होंने संबंधित पुलिस थाना स्तर पर शिकायत देने के साथ ही पुलिस अधीक्षक और पुलिस महानिरीक्षक, सरगुजा संभाग, अंबिकापुर के समक्ष भी कार्रवाई की मांग रखी। एक शिकायत पत्र में मामले को क्षेत्राधिकार के आधार पर संबंधित अजाक थाना भेजे जाने का उल्लेख भी मिलता है।
चमन एक्का का आरोप है कि शिकायत के बावजूद उन्हें अपेक्षित राहत नहीं मिली। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है और पुलिस कार्रवाई का पूरा रिकॉर्ड इस समाचार के लिए उपलब्ध नहीं है।
शिकायत के बाद स्थानांतरण ने बढ़ाए सवाल
मामला 2023 की शिकायत तक सीमित नहीं रहा। 22 सितंबर 2026 को लिफ्ट एंड शिफ्ट आरसीसी एसोसिएट्स की ओर से जारी आदेश में चमन एक्का को वर्तमान पदस्थापना से गैंग नंबर 8 में स्थानांतरित किए जाने की बात कही गई है। आदेश में इसे आवश्यकता एवं कार्य व्यवस्था के आधार पर किया गया स्थानांतरण बताया गया है।
लेकिन चमन एक्का इस स्थानांतरण को लेकर भी सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि वे लंबे समय से काम कर रहे हैं और शिकायतों के बाद उनके साथ मानसिक, शारीरिक और आर्थिक परेशानी की स्थिति बनी है।
क्या यह सामान्य कार्य व्यवस्था का निर्णय है या शिकायत के बाद पैदा हुई परिस्थितियों का कोई संबंध है? इसका जवाब निष्पक्ष जांच और प्रबंधन के स्पष्ट पक्ष से ही सामने आ सकता है।
जमीन गई तो भविष्य कौन सुरक्षित करेगा?
चमन एक्का की कहानी का सबसे संवेदनशील पक्ष यही है कि जिस जमीन को वे अपने परिवार की आजीविका और भविष्य का आधार मानते थे, वह अधिग्रहण में चली गई। अब यदि वे केवल ठेका मजदूरी पर निर्भर हैं तो उनके सामने स्वाभाविक सवाल है—क्या एक दिन की मजदूरी उस जमीन का विकल्प हो सकती है, जो परिवार की पीढ़ियों की आजीविका का आधार थी?
यह सवाल केवल चमन एक्का तक सीमित नहीं है। भू-अधिग्रहण वाले आदिवासी क्षेत्रों में प्रभावित परिवारों के लिए जमीन के बदले रोजगार, रोजगार की प्रकृति, नियमित नियुक्ति, पदोन्नति और कार्यस्थल पर सम्मान जैसे विषय सीधे उनके भविष्य से जुड़े होते हैं।
शासन, पुलिस और प्रबंधन से स्पष्ट सवाल
क्या चमन एक्का को नियमित रोजगार का कोई अधिकार या आश्वासन दिया गया था? यदि दिया गया था तो उसकी वर्तमान स्थिति क्या है?
उनके बाद नियुक्त हुए कर्मचारियों की पदोन्नति हुई तो उनकी पदोन्नति क्यों नहीं हुई? क्या पदोन्नति और नियुक्ति की प्रक्रिया सार्वजनिक की जा सकती है?
5 जून 2023 की शिकायत में लगाए गए आरोपों पर पुलिस स्तर पर क्या कार्रवाई हुई?
और सबसे महत्वपूर्ण—यदि किसी कर्मचारी ने अपनी हाजिरी काटे जाने का कारण पूछते हुए शिकायत की, तो उसके बाद उसके साथ किसी भी प्रकार का प्रतिशोधात्मक व्यवहार हुआ या नहीं, इसकी निष्पक्ष जांच क्यों न हो?
यह मामला अब प्रशासन और संबंधित प्रबंधन दोनों के लिए गंभीरता से देखने का विषय है। चमन एक्का के आरोप सही हैं या नहीं, यह जांच से तय होगा, लेकिन 75 डिसमिल जमीन गंवाने वाले एक आदिवासी परिवार के रोजगार और भविष्य का सवाल निश्चित रूप से जवाब मांगता है।
यह समाचार में चमन एक्का द्वारा प्रस्तुत शिकायतों और दस्तावेजों में दर्ज आरोपों को आधार बनाया गया है। आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी शेष है। अडानी प्रबंधन, लिफ्ट एंड शिफ्ट आरसीसी एसोसिएट्स, सुरेश बाबू तथा संबंधित पुलिस अधिकारियों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
|
Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें |
Advertising Space
















































