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अब गांवों में सिर्फ रोजगार नहीं, विकास की भी नई तस्वीर! 375 कामों से बदलेगी ग्रामीण जिंदगी

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर

जल संरक्षण, सड़क, स्कूल, पंचायत भवन से लेकर कृषि, पशुपालन, महिला स्व-सहायता समूह, ग्रामीण बाजार और आपदा प्रबंधन तक के काम होंगे अनुमेय; 2026-27 के बजट में 4 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान

रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ के गांवों में रोजगार को केवल मजदूरी तक सीमित रखने के बजाय उसे स्थायी विकास, आजीविका और मजबूत बुनियादी सुविधाओं से जोड़ने की दिशा में सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण) यानी वीबी-जीरामजी के अंतर्गत अब अनुमेय कार्यों की संख्या 318 से बढ़ाकर 375 कर दी गई है। इसका सीधा अर्थ यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों में अब रोजगार के साथ ऐसी परिसंपत्तियों के निर्माण पर भी जोर होगा, जिनका लाभ गांवों को आने वाले वर्षों तक मिल सकेगा।
उप मुख्यमंत्री एवं पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा ने अनुमेय कार्यों की संख्या बढ़ाए जाने पर कहा कि 375 कार्यों के शामिल होने से ग्रामीण विकास को गति मिलेगी और गांवों में रोजगार, आजीविका तथा अधोसंरचना के बीच बेहतर तालमेल स्थापित होगा। छत्तीसगढ़ शासन ने वीबी-जीरामजी के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए वर्ष 2026-27 के बजट में 4 हजार करोड़ रुपए का प्रावधान किया है। वहीं केंद्र सरकार की ओर से छत्तीसगढ़ के लिए मिशन के तहत 3,354.85 करोड़ रुपए का अंतरिम आवंटन प्रदान किया गया है।
मिशन के अंतर्गत अकुशल श्रमिकों की मजदूरी दर भी 261 रुपए से बढ़ाकर 300 रुपए प्रतिदिन की गई है। रोजगार के दिनों में वृद्धि, मजदूरी दर में सुधार और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण को एक साथ जोड़ने से ग्रामीण परिवारों की आर्थिक सुरक्षा बढ़ाने के साथ गांवों में विकास की नई संभावनाएं तैयार करने का प्रयास किया जा रहा है।


उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की विकसित भारत@2047 की परिकल्पना में गांवों को विकास की केंद्रीय इकाई के रूप में महत्व दिया गया है। वीबी-जीरामजी के माध्यम से रोजगार, आजीविका, जल संरक्षण, कृषि उत्पादकता, महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण अधोसंरचना को एक साथ जोड़ने का प्रयास इसी व्यापक दृष्टिकोण का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन तथा केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व में ग्रामीण विकास को नई दिशा मिली है।


क्यूआर कोड से गांव में बैठे मिल सकेगी 375 कार्यों की जानकारी
वीबी-जीरामजी के तहत 375 अनुमेय कार्यों को चार प्रमुख श्रेणियों और 30 उप-श्रेणियों में व्यवस्थित किया गया है। इनमें 68 प्रकार के व्यक्तिगत कार्य, 99 प्रकार के मरम्मत एवं रखरखाव से जुड़े कार्य तथा समूह एवं सामुदायिक उपयोगिता से संबंधित कार्य शामिल हैं। ग्रामीणों को इन सभी अनुमेय कार्यों की जानकारी आसानी से उपलब्ध हो सके, इसके लिए राज्य में क्यूआर कोड भी जारी किया गया है। इसके माध्यम से ग्रामीण अनुमेय कार्यों की विस्तृत जानकारी प्राप्त कर सकेंगे।
2027 तक हर बालिका के लिए स्कूल में शौचालय का लक्ष्य
ग्रामीण विद्यालयों की अधोसंरचना को भी वीबी-जीरामजी की कार्य-सूची में विशेष स्थान दिया गया है। इसके तहत शासकीय विद्यालयों में शौचालयों की मरम्मत, अतिरिक्त कक्षों का निर्माण, प्रयोगशालाएं, रसोई शेड, परिसर की दीवार और खेल मैदान जैसे कार्य किए जा सकेंगे।
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा संचालित ‘मेरी बेटी-मेरा अभिमान’ अभियान के अंतर्गत 26 जनवरी 2027 तक ग्रामीण क्षेत्रों के शासकीय विद्यालयों में 6,671 बालिका शौचालयों के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है। इसका उद्देश्य बालिकाओं की गरिमा, स्वच्छता और विद्यालयों में बेहतर सुविधाजनक वातावरण सुनिश्चित करना है।
  हर गांव में मुक्तिधाम और प्रतीक्षालय की दिशा में पहल
ग्रामीण क्षेत्रों में आवश्यक सामुदायिक अधोसंरचना के विस्तार के लिए राज्य सरकार ने हर गांव में मुक्तिधाम निर्माण का संकल्प लिया है। 6,524 गांवों में प्रतीक्षालय सहित मुक्तिधाम के निर्माण की दिशा में काम किया जा रहा है। वीबी-जीरामजी में श्मशान घाट तथा अन्य सामुदायिक अधोसंरचना से जुड़े निर्माण और मरम्मत कार्यों को भी अनुमेय बनाया गया है।
जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए राज्य के 10 हजार से अधिक बंद अथवा डिफंक्ट बोरवेलों में सैंड फिल्टर और रिचार्ज संरचनाओं के निर्माण की भी योजना है। ऐसे प्रयासों से बेकार पड़े जलस्रोतों को भूजल पुनर्भरण के उपयोग में लाने की संभावना बढ़ेगी।
जल सुरक्षा से भूजल पुनर्भरण तक गांवों में बनेंगी स्थायी संरचनाएं
वीबी-जीरामजी की पहली प्रमुख श्रेणी में जल संरक्षण और जल सुरक्षा से जुड़े कार्य शामिल किए गए हैं। इनमें नहर, बाढ़ नियंत्रण चैनल, चेकडैम, गली प्लग, भूमिगत डाइक, तालाबों का पुनर्जीवन, परकोलेशन टैंक, रिचार्ज पिट, रिचार्ज शाफ्ट, इंजेक्शन वेल और सिंचाई कुएं जैसे कार्य शामिल हैं।
इसके अलावा माइक्रो एवं ड्रिप सिंचाई चैनल, वाटरशेड भूमि का पुनरुद्धार, वनीकरण एवं पौधरोपण, मृदा-नमी संरक्षण और रूफटॉप वर्षाजल संचयन जैसी गतिविधियों को भी स्थान दिया गया है। व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर जल संरक्षण से जुड़ी संरचनाओं के निर्माण और रखरखाव से गांवों में जल संचयन क्षमता बढ़ाने, भूजल पुनर्भरण तथा सिंचाई सुविधाओं के विस्तार में मदद मिलने की उम्मीद है।
सड़क से स्कूल और पंचायत भवन तक मजबूत होगी ग्रामीण अधोसंरचना
दूसरी प्रमुख श्रेणी ग्रामीण अधोसंरचना से संबंधित है। इसमें ग्रामीण सड़कें, पुलिया, क्रॉस-ड्रेनेज संरचनाएं, ग्राम संपर्क सुविधाएं, ग्राम पंचायत भवन, आंगनबाड़ी केंद्र, ग्रामीण पुस्तकालय और सार्वजनिक भवनों के साथ स्कूल अधोसंरचना से जुड़े कार्य शामिल हैं।
विद्यालयों में रसोई शेड, अतिरिक्त कक्ष, प्रयोगशालाएं, परिसर की दीवार और खेल मैदान बनाए जा सकेंगे। वहीं श्मशान घाट, कब्रिस्तान, ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता परिसर, अपशिष्ट पृथक्करण एवं संग्रहण केंद्र, सौर प्रकाश व्यवस्था, बायोगैस प्लांट, पार्किंग और परिवहन शेड जैसी सामुदायिक सुविधाओं को भी अनुमेय कार्यों में शामिल किया गया है।
प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के अंतर्गत अनुमेय ग्रामीण आवास कार्य तथा जल जीवन मिशन के तहत निर्मित जलापूर्ति परिसंपत्तियों की मरम्मत एवं रखरखाव को भी इस श्रेणी में स्थान दिया गया है।
       रोजगार के साथ गांव में ही आय के नए रास्ते
तीसरी प्रमुख श्रेणी आजीविका संबंधी अधोसंरचना की है। इसके अंतर्गत प्रशिक्षण-सह-कौशल विकास केंद्र, स्वयं सहायता समूहों के लिए वर्कशेड, ग्रामीण हाट एवं साप्ताहिक बाजार, खाद्यान्न और कृषि उपज भंडारण, कोल्ड स्टोरेज तथा कृषि मूल्य श्रृंखला से जुड़ी संरचनाओं का विकास किया जा सकेगा।
स्वयं सहायता समूह एवं फेडरेशन स्तर के भवन, वर्मी कम्पोस्ट और नाडेप इकाइयां, सिल्विपास्चर, डेयरी एवं दुग्ध संग्रहण केंद्र, पशु आश्रय, मत्स्य पालन अधोसंरचना, नर्सरी एवं पौधरोपण तथा भवन निर्माण सामग्री के उत्पादन से जुड़े कार्य भी इसके अंतर्गत आएंगे।
कृषि आधारित प्रसंस्करण को भी विशेष महत्व दिया गया है। मिनी फ्लोर मिल, खाद्य प्रसंस्करण, तेल प्रसंस्करण, एकीकृत कृषि प्रसंस्करण, वन उत्पाद प्रसंस्करण, हस्तशिल्प प्रसंस्करण, जैव-अवक्रमणीय उत्पाद प्रसंस्करण और बांस शिल्प जैसी गतिविधियों के लिए आवश्यक अधोसंरचना विकसित की जा सकेगी। इससे स्थानीय संसाधनों को गांव में ही प्रसंस्कृत कर उनका मूल्य बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर आय के अवसर विकसित करने की संभावना बनेगी।
महिला स्व-सहायता समूहों को मिलेगा काम और कारोबार का आधार
स्वयं सहायता समूहों के लिए वर्कशेड और समूह स्तर की गतिविधियों के लिए अधोसंरचना को अनुमेय कार्यों में शामिल किए जाने से ग्रामीण महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों के लिए आवश्यक स्थान और सुविधाएं विकसित की जा सकेंगी।
वर्मी कम्पोस्ट, नाडेप, नर्सरी, कृषि उत्पाद भंडारण, पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन से जुड़ी परिसंपत्तियां ग्रामीण परिवारों के लिए आय के अलग-अलग स्रोत विकसित करने में सहायक बन सकती हैं। इससे रोजगार के साथ स्थानीय उद्यमिता को भी बढ़ावा देने का प्रयास किया जाएगा।
     आपदा और बदलते मौसम से निपटने की भी तैयारी
375 अनुमेय कार्यों में चौथी प्रमुख श्रेणी अति विषम मौसमी घटनाओं के न्यूनीकरण और आपदा सजगता से संबंधित है। इसके तहत चक्रवात आश्रय, बाढ़ आश्रय, तटबंध, मिट्टी एवं गेबियन संरचनाएं, रिटेनिंग वॉल, बाढ़ सुरक्षा दीवार, लेवल बेंच टेरेस, अपलैंड बेंच टेरेस और स्थिरीकरण तालाब जैसे कार्य किए जा सकेंगे।
आपदा के बाद ग्रामीण सड़कों और सामुदायिक परिसंपत्तियों के पुनर्स्थापन, विंडब्रेक एवं शेल्टरबेल्ट पौधरोपण तथा वन अग्नि प्रबंधन से जुड़े कार्य भी इसमें शामिल हैं। वन अग्नि प्रबंधन के तहत फायर ब्रेक हेज, वन अग्नि रेखा और फ्यूल बफर जोन सहित अन्य सहायक कार्य किए जा सकेंगे।
इससे बाढ़, चक्रवात, वनाग्नि और अन्य चरम मौसमी परिस्थितियों के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों में सार्वजनिक एवं सामुदायिक परिसंपत्तियों की सुरक्षा और संरक्षण क्षमता मजबूत करने का प्रयास किया जाएगा।
वीबी-जीरामजी के तहत 375 अनुमेय कार्यों का विस्तार ग्रामीण विकास को केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं रखता, बल्कि रोजगार को स्थायी परिसंपत्ति निर्माण और परिसंपत्तियों को स्थानीय अर्थव्यवस्था से जोड़ने की दिशा में एक व्यापक व्यवस्था तैयार करता है। जल संरक्षण से कृषि तक, सड़क से स्कूल तक, महिला स्व-सहायता समूहों से ग्रामीण बाजार तक और आजीविका से आपदा प्रबंधन तक अलग-अलग क्षेत्रों को एक साथ जोड़कर गांवों में विकास की आधारभूत संरचना मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है।
उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा के अनुसार, वीबी-जीरामजी के माध्यम से रोजगार, प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय आजीविका और टिकाऊ ग्रामीण अधोसंरचना को एक साथ आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। 375 अनुमेय कार्यों के माध्यम से गांवों में आज के रोजगार को आने वाले वर्षों की परिसंपत्तियों और आर्थिक अवसरों से जोड़ते हुए विकसित गांव की दिशा में आधार तैयार किया जा रहा है।

प्रदीप मिश्रा
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