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खेल प्रतिभाओं को अब नहीं होगी संसाधनों की कमी, छत्तीसगढ़ में बढ़ेगा खेल का दायरा

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर

रायपुर में 60 करोड़ की आर्चरी अकादमी से लेकर पंडरापाठ में 20-25 करोड़ की अकादमी तक, वनांचल की प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण देने की तैयारी

रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ के गांवों, वनांचलों और दूरस्थ क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं को अब बेहतर प्रशिक्षण, आधुनिक संसाधन और बड़े मंच उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने अपनी योजनाओं को तेज करने की बात कही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, जरूरत केवल समय पर उनकी पहचान कर उन्हें आगे बढ़ने का अवसर देने की है। सरकार खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने के साथ प्रदेश में खेल अधोसंरचना का विस्तार कर रही है।
मुख्यमंत्री ने यह बात राजधानी रायपुर के सिविल लाइन स्थित न्यू सर्किट हाउस में आयोजित छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ की एग्जीक्यूटिव बॉडी मीटिंग एवं जनरल काउंसिल मीटिंग को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि खेल केवल पदक जीतने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि युवाओं में अनुशासन, आत्मविश्वास, टीम भावना और सकारात्मक ऊर्जा पैदा करने का प्रभावी माध्यम भी हैं।


               उद्योगों को खेलों से जोड़ने की तैयारी
मुख्यमंत्री ने प्रदेश के विभिन्न खेल संघों को उद्योग समूहों से जोड़ने की पहल में तेजी लाने की बात कही। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में कई बड़े उद्योग समूह काम कर रहे हैं। यदि इन उद्योग समूहों को अलग-अलग खेलों और खेल संघों से जोड़ा जाए तो खिलाड़ियों के प्रशिक्षण, आधुनिक उपकरणों, प्रतियोगिताओं के आयोजन और खेल अधोसंरचना के विस्तार में अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध हो सकते हैं।
उन्होंने अपने केंद्रीय राज्य मंत्री के कार्यकाल का उल्लेख करते हुए कहा कि उद्योग जगत और खेल गतिविधियों के बीच बेहतर समन्वय के सकारात्मक परिणाम उन्होंने देखे हैं। उनका कहना था कि सुनियोजित तरीके से उद्योगों की भागीदारी बढ़ाई जाए तो प्रदेश के खिलाड़ियों को बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं।
     खेल संघों और सरकार के बीच बनेगा बेहतर समन्वय
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ और राज्य शासन के बीच समन्वय को और मजबूत किया जाएगा। खेल संघों की आवश्यकताओं, प्रस्तावों और शासन स्तर पर लंबित प्रक्रियाओं को सुगम बनाने के लिए मुख्यमंत्री सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी को छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के साथ विशेष समन्वय की जिम्मेदारी दी जाएगी।
उन्होंने कहा कि खेलों से जुड़े विषयों का समयबद्ध समाधान और खिलाड़ियों को सरकारी योजनाओं तथा सुविधाओं का पूरा लाभ दिलाने के लिए शासन और खेल संगठनों के बीच लगातार संवाद जरूरी है।
             रायपुर में 60 करोड़ की आर्चरी अकादमी
प्रदेश में आधुनिक खेल अधोसंरचना के विस्तार की जानकारी देते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि रायपुर, रायगढ़ और कुनकुरी में स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण किया जा रहा है। रायपुर में लगभग 60 करोड़ रुपए की लागत से अत्याधुनिक आर्चरी अकादमी भी बनाई जा रही है।
सरकार का उद्देश्य ऐसी सुविधाएं विकसित करना है, जहां खिलाड़ियों को आधुनिक तकनीक, विशेषज्ञ प्रशिक्षकों और आवश्यक संसाधनों के साथ अपनी क्षमता निखारने का अवसर मिल सके। इससे प्रदेश के खिलाड़ियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
पंडरापाठ में बनेगी 20-25 करोड़ की आर्चरी अकादमी
जशपुर क्षेत्र में तीरंदाजी की परंपरा और वहां के युवाओं की प्रतिभा का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वनांचल के युवाओं में तीरंदाजी की नैसर्गिक क्षमता है। विशेष रूप से पहाड़ी कोरवा समुदाय में तीरंदाजी जीवन और परंपरा से जुड़ी रही है। ऐसे में यदि इन प्रतिभाओं को आधुनिक प्रशिक्षण और विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिले तो वे बड़े खेल मंचों तक पहुंच सकते हैं।
मुख्यमंत्री के अनुसार जशपुर के पंडरापाठ में करीब 20 से 25 करोड़ रुपए की लागत से आर्चरी अकादमी स्थापित की जा रही है। इससे जशपुर और आसपास के वनांचली क्षेत्रों के प्रतिभाशाली खिलाड़ियों को अपने क्षेत्र में ही आधुनिक प्रशिक्षण की सुविधा मिल सकेगी।
           बस्तर और सरगुजा से निकलेंगी नई प्रतिभाएं
मुख्यमंत्री ने बस्तर और सरगुजा में खेल प्रतिभाओं की संभावनाओं को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि बस्तर ओलंपिक ने दूरस्थ क्षेत्रों के हजारों युवाओं को अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच दिया है और राज्य सरकार इसका आयोजन हर वर्ष करेगी। इसी तरह सरगुजा ओलंपिक के माध्यम से भी क्षेत्रीय प्रतिभाओं को सामने आने का अवसर मिल रहा है।
उन्होंने कहा कि बस्तर में शांति और विकास के नए वातावरण के बीच खेल गतिविधियों को भी नई गति देने की जरूरत है। युवाओं को प्रशिक्षण, संसाधन और अवसर उपलब्ध कराकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी तैयार किए जा सकते हैं। खेल युवाओं को सकारात्मक दिशा देने के साथ उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का माध्यम भी बन सकते हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि खेल उत्कर्ष मिशन के माध्यम से प्रदेश की प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें प्रशिक्षण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि प्रतिभा चाहे बड़े शहर में हो या किसी दूरस्थ गांव और वनांचल में, उसे आगे बढ़ने का समान अवसर मिले।
    खेल अलंकरण की वापसी से बढ़ा खिलाड़ियों का उत्साह
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में खेलों और खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिला है। इसी भावना के अनुरूप छत्तीसगढ़ सरकार भी खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रयास कर रही है। राज्य में खेल अलंकरण समारोह की पुनः शुरुआत की गई है और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को सम्मानित करने के साथ आवश्यक आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में काम किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि खेल प्रतिभाओं को शासकीय सेवा में अवसर देने की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं, जिससे खिलाड़ियों को खेल के साथ भविष्य की सुरक्षा का भरोसा मिल सके।
           40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी पर नजर
बैठक में 40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को दिलाने के विषय पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में खेल अधोसंरचना का विस्तार हो रहा है और अब बड़े राष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी की दिशा में भी गंभीर प्रयास किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि 40वें नेशनल गेम्स की मेजबानी छत्तीसगढ़ को मिलती है तो इसके आयोजनों को बस्तर से भी जोड़ने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है। इससे बस्तर के युवाओं को देश के श्रेष्ठ खिलाड़ियों को देखने और उनसे सीखने का अवसर मिलने के साथ क्षेत्र की बदलती तस्वीर को राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाने का मौका भी मिल सकता है।
         वनांचल में तीरंदाजी और मलखम्ब की प्रतिभा
वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में प्रदेश की खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वनांचलों में तीरंदाजी जीवन और संस्कृति का हिस्सा रही है और यहां प्रतिभाओं की कमी नहीं है। आवश्यकता केवल तकनीकी प्रशिक्षण और उचित मार्गदर्शन की है।
उन्होंने बताया कि बस्तर के जनजातीय युवा मलखम्ब में भी बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। उन्होंने सामूहिक खेलों के साथ व्यक्तिगत खेलों में प्रतिभाओं की पहचान कर उन्हें विशेष प्रशिक्षण देने की आवश्यकता बताई।
सांसद श्री विजय बघेल ने भी प्रदेश में खेल गतिविधियों और अधोसंरचना के विस्तार की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की सराहना की। उन्होंने खेल अलंकरण की पुनः शुरुआत और उत्कृष्ट खिलाड़ियों को शासकीय सेवा में अवसर देने जैसे निर्णयों को खिलाड़ियों के मनोबल के लिए महत्वपूर्ण बताया।


अन्य जिलों में भी जिला ओलंपिक संघ बनाने पर सहमति
छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के महासचिव डॉ. विक्रम सिसोदिया ने पिछली एग्जीक्यूटिव बॉडी बैठक का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। बैठक में ओलंपिक दिवस, विभिन्न खेल गतिविधियों, नेशनल गेम्स, खेल संघों की आवश्यकताओं और आगामी कार्यक्रमों के लिए बजटीय प्रावधानों सहित कई विषयों पर चर्चा हुई।
संघ की आय-व्यय संबंधी जानकारी भी प्रस्तुत की गई। प्रदेश में वर्तमान जिला ओलंपिक संघों के अतिरिक्त अन्य जिलों में भी जिला ओलंपिक संघ गठित करने के लिए समिति बनाने पर सहमति बनी। हैंडबॉल एसोसिएशन सहित विभिन्न खेल संघों से जुड़े विषयों और प्रदेश में खेल गतिविधियों के विस्तार पर भी विचार-विमर्श किया गया।
बैठक में छत्तीसगढ़ ओलंपिक संघ के पदाधिकारी, विभिन्न खेल संघों के प्रतिनिधि और अन्य सदस्य उपस्थित रहे।
छत्तीसगढ़ में खेल अधोसंरचना के विस्तार, वनांचल की प्रतिभाओं के लिए विशेष अकादमियों, उद्योगों की भागीदारी और बड़े राष्ट्रीय आयोजनों की मेजबानी की कोशिशों से खेल क्षेत्र को नई दिशा देने का दावा किया गया है। अब इन योजनाओं की वास्तविक सफलता इस बात से तय होगी कि प्रदेश के गांवों और दूरस्थ इलाकों में मौजूद प्रतिभाओं तक आधुनिक प्रशिक्षण और संसाधन कितनी प्रभावी तरीके से पहुंचते हैं।

प्रदीप मिश्रा
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