‘विष्णु भैया’ का घर बना बहनों का मायका, तीजा-पोरा में दिखी छत्तीसगढ़ी संस्कृति की झलक
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर
मुख्यमंत्री निवास में फुगड़ी, रस्साकशी, मेहंदी और झूलों के बीच माताओं-बहनों ने मनाया तिहार, ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान और राष्ट्रीय पोषण माह का शुभारंभ
रायपुर ACGN:- नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास में शनिवार को तीजा-पोरा तिहार का आयोजन छत्तीसगढ़ी लोकसंस्कृति, पारिवारिक आत्मीयता और मातृशक्ति के उल्लास के बीच हुआ। प्रदेश के अलग-अलग अंचलों से बड़ी संख्या में पहुंचीं माताओं, बहनों और बेटियों के स्वागत के लिए मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव और मायके की तर्ज पर सजाया गया था। पारंपरिक बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, लोक शिल्प और ग्रामीण परिवेश के बीच फुगड़ी, रस्साकशी, कुर्सी दौड़, मेहंदी और झूलों ने पूरे परिसर को उत्सव के रंग में रंग दिया।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने माताओं-बहनों का आत्मीय स्वागत करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में तीजा के अवसर पर बेटियों और बहनों के मायके आने की सुंदर परंपरा है। उन्होंने कहा कि आज प्रदेशभर से बहनें उनके घर आई हैं, इसलिए मुख्यमंत्री निवास आज सभी बहनों का मायका है। उन्होंने कहा कि अपने भाई के घर बहनों का आना उनके लिए सौभाग्य और आनंद की बात है। मुख्यमंत्री के इस संबोधन पर पूरा परिसर तालियों से गूंज उठा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजा-पोरा केवल त्योहार नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की माटी, परिवार, रिश्तों, खेती-किसानी, पशुधन और लोकजीवन से जुड़ा जीवंत उत्सव है। हरेली से शुरू होने वाली छत्तीसगढ़ के तीज-त्योहारों की श्रृंखला लोगों को अपनी जड़ों, परंपराओं और संस्कारों से जोड़ती है।

शिव-पार्वती की पूजा कर मांगी प्रदेश की खुशहाली
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना के साथ की। उन्होंने प्रदेश की माताओं-बहनों सहित सभी नागरिकों के सुख, समृद्धि और खुशहाली की कामना की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तीजा का पर्व माता पार्वती की तपस्या, समर्पण और अटूट आस्था से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि हमारी माताएं और बहनें आज भी इस परंपरा को श्रद्धा के साथ आगे बढ़ा रही हैं। उन्होंने भगवान शिव और माता पार्वती से प्रदेश की माताओं-बहनों के सुख, समृद्धि और अखंड सौभाग्य के साथ छत्तीसगढ़ के निरंतर विकास की प्रार्थना की।
उन्होंने पोरा पर्व को कृषि संस्कृति और पशुधन के प्रति सम्मान एवं कृतज्ञता का प्रतीक बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ में खेती-किसानी केवल आजीविका नहीं, बल्कि जीवन पद्धति का अभिन्न हिस्सा है। तीजा और पोरा का संगम इसी लोकजीवन और संस्कृति की आत्मीयता को सामने लाता है।

‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ से सुपोषण का संदेश
तीजा-पोरा के अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रदेशव्यापी ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान का शुभारंभ किया और अभियान के लोगो का विमोचन किया। उन्होंने कहा कि मुनगा पोषक तत्वों और आवश्यक मिनरल्स से भरपूर है। इसकी पत्तियां और फलियां पोषण की दृष्टि से उपयोगी हैं और विशेषकर महिलाओं तथा बच्चों के आहार में इसका उपयोग बेहतर पोषण में सहायक हो सकता है।
मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपने घरों और आसपास मुनगा लगाने की अपील की। उन्होंने कहा कि जनभागीदारी से चलने वाला यह अभियान सुपोषित छत्तीसगढ़ के संकल्प को मजबूत कर सकता है।

राष्ट्रीय पोषण माह शुरू, सुपोषण रथ को हरी झंडी
मुख्यमंत्री ने प्रदेश में राष्ट्रीय पोषण माह 2026 का भी शुभारंभ किया। उन्होंने पोस्टर का विमोचन करते हुए उपस्थित माताओं-बहनों को सुपोषण की शपथ दिलाई और सुपोषण रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
बताया गया कि 9 सितंबर से 8 अक्टूबर तक प्रदेशभर में पोषण माह के तहत महिलाओं, बच्चों और परिवारों को संतुलित एवं पौष्टिक आहार के प्रति जागरूक करने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। सुपोषण रथ अलग-अलग क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को पोषण संबंधी जानकारी देगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ मां और सुपोषित बच्चा स्वस्थ समाज की मजबूत नींव हैं। सरकार का प्रयास है कि योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और जनभागीदारी के माध्यम से पोषण के क्षेत्र में सकारात्मक बदलाव को गति दी जाए।

नन्हे बच्चों को खीर खिलाकर कराया अन्नप्राशन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री श्री साय ने नन्हे बच्चों को अपने हाथों से खीर खिलाकर अन्नप्राशन संस्कार कराया। उन्होंने बच्चों को स्नेह और आशीर्वाद देते हुए उनके स्वस्थ, खुशहाल और उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
तीजा-पोरा के पारिवारिक माहौल के बीच अन्नप्राशन संस्कार ने कार्यक्रम को मातृत्व और सुपोषण के संदेश से जोड़ दिया। मुख्यमंत्री ने बच्चों की माताओं से संवाद कर उनके स्वास्थ्य और पोषण की जानकारी भी ली।
महतारी वंदन की 31 किस्तों से 20 हजार करोड़ से अधिक का दावा
मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तिकरण को सरकार की प्राथमिकता बताते हुए कहा कि महतारी वंदन योजना के माध्यम से प्रदेश की 68 लाख से अधिक माताओं-बहनों को हर महीने एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता दी जा रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार अब तक 31 किस्तों के माध्यम से 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक की राशि सीधे महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचाई जा चुकी है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश के विभिन्न जिलों में प्रवास के दौरान माताओं-बहनों से मिलने पर योजना से जुड़े बदलावों की कई प्रेरक कहानियां सामने आती हैं। कुछ महिलाएं राशि को बेटी के भविष्य के लिए सुकन्या समृद्धि योजना में जमा कर रही हैं, तो कुछ सिलाई मशीन खरीदकर आजीविका का साधन तैयार कर रही हैं। कई महिलाएं सब्जी-भाजी, किराना दुकान और छोटे कारोबार में राशि लगाकर परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं के हाथ में अपनी राशि होने से उनके आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता में वृद्धि हुई है। सरकार का लक्ष्य आर्थिक सहायता के साथ महिलाओं को आजीविका, कौशल, स्वामित्व और उद्यमिता के अवसर उपलब्ध कराना भी है।

लखपति दीदी से ड्रोन दीदी तक बदलती तस्वीर
मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ की महिलाएं आत्मनिर्भरता की नई कहानी लिख रही हैं। उनके अनुसार प्रदेश में 13 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जबकि निर्धारित लक्ष्य 8 लाख महिलाओं का था।
उन्होंने कहा कि महिलाएं अब पारंपरिक भूमिकाओं से आगे बढ़कर नए क्षेत्रों में भी अपनी पहचान बना रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी निर्माण सामग्री की आपूर्ति में महिलाएं ‘डीलर दीदी’ के रूप में काम कर रही हैं, वहीं प्रशिक्षण प्राप्त महिलाएं ‘रानी मिस्त्री’ के रूप में निर्माण कार्य से जुड़ रही हैं। कृषि क्षेत्र में ‘ड्रोन दीदी’ आधुनिक तकनीक के जरिए खेतों में उर्वरक और दवाइयों का छिड़काव कर आय के नए अवसर तैयार कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि कई ड्रोन दीदियां एक दिन में 20 से 25 एकड़ तक खेतों में छिड़काव कर लगभग सात हजार रुपए तक की आय अर्जित कर रही हैं। उन्होंने सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले के ग्राम दानसरा की महिलाओं का भी उल्लेख किया, जिन्होंने महतारी वंदन योजना से मिली राशि को एकत्र कर भगवान श्रीराम का मंदिर बनाने का संकल्प लिया है।
महिलाओं के नाम संपत्ति से बढ़ेगा स्वामित्व
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के साथ उन्हें संपत्ति में स्वामित्व दिलाने की दिशा में भी सरकार काम कर रही है। महिलाओं के नाम संपत्ति की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत तथा स्टांप शुल्क में एक प्रतिशत की छूट दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण का अर्थ केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि महिलाओं को सम्मान, आर्थिक स्वतंत्रता, संपत्ति में अधिकार और निर्णय लेने में भागीदारी देना भी है।
हर जरूरतमंद परिवार को पक्का घर देने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री आवास योजना का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रदेश में प्रतिदिन 1,600 से अधिक आवासों का निर्माण हो रहा है। उनके अनुसार पिछले ढाई वर्षों में प्रदेश में 18 लाख प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत हुए हैं, जिनमें से साढ़े 11 लाख से अधिक आवास पूरे किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय ग्रामीण विकास एवं कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के छत्तीसगढ़ प्रवास के दौरान प्रदेश के लिए 3 लाख 65 हजार नए प्रधानमंत्री आवासों की स्वीकृति दी गई है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का संकल्प है कि कोई भी जरूरतमंद परिवार पक्के मकान से वंचित न रहे।
मुख्यमंत्री निवास में दिखा छत्तीसगढ़ी गांव का रंग
तीजा-पोरा के लिए मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी गांव की थीम पर सजाया गया था। बैलगाड़ी, नंदिया-बइला, पारंपरिक खिलौने और ग्रामीण परिवेश ने लोगों को गांव की याद दिलाई। लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों के बीच माताओं-बहनों ने फुगड़ी, रस्साकशी और कुर्सी दौड़ में उत्साह से हिस्सा लिया। मेहंदी और झूलों के बीच पूरा परिसर पारंपरिक मायके के उत्सव जैसा नजर आया।
महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने भी प्रदेश की माताओं-बहनों को तीजा-पोरा की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि तीजा मातृशक्ति और छत्तीसगढ़ की समृद्ध परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। उन्होंने ‘हर घर मुनगा-घर घर मुनगा’ अभियान को पोषण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताते हुए लोगों से इसमें भागीदारी की अपील की।
कार्यक्रम में मंत्री श्री गजेंद्र यादव, मंत्री श्री दयाल दास बघेल, राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, बाल संरक्षण आयोग की अध्यक्ष श्रीमती वर्णिका शर्मा, छत्तीसगढ़ हस्तशिल्प विकास बोर्ड की अध्यक्ष श्रीमती शालिनी राजपूत, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, महापौर श्रीमती मीनल चौबे, श्रीमती वीणा सिंह, महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव सुश्री शहला निगार सहित विभिन्न संस्थाओं की पदाधिकारी और बड़ी संख्या में माताएं-बहनें उपस्थित रहीं।
तीजा-पोरा के बहाने मुख्यमंत्री निवास में जहां छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति और पारिवारिक रिश्तों की झलक दिखाई दी, वहीं कार्यक्रम को महिला सशक्तिकरण और सुपोषण के संदेश से भी जोड़ा गया। सरकार की योजनाओं और दावों के बीच अब इन पहलों का वास्तविक प्रभाव गांव और वनांचल की महिलाओं के जीवन में कितना पहुंचता है, यह आने वाले समय में महत्वपूर्ण रहेगा।
प्रदीप मिश्रा
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