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शहरों की तस्वीर बदलने का प्लान! साय ने कहा- काम में देरी बर्दाश्त नहीं

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009

अमृत मिशन से पानी, नालंदा परिसर से पढ़ाई और ई-बसों से सफर, शहरी विकास की योजनाओं को समय पर जमीन पर उतारने के निर्देश

रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ के शहरों में विकास की रफ्तार बढ़ाने को लेकर सरकार ने अब योजनाओं की मंजूरी से आगे बढ़कर उनके जमीनी क्रियान्वयन और समयसीमा पर जोर देना शुरू कर दिया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने मंत्रालय महानदी भवन में नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि नागरिकों से सीधे जुड़ी सुविधाओं में किसी भी तरह की लापरवाही और अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी।


मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरों का विकास सिर्फ सड़क और इमारत बनाने तक सीमित नहीं होना चाहिए। नागरिकों को शुद्ध पेयजल, स्वच्छता, बेहतर सड़क, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और सुगम सार्वजनिक परिवहन जैसी मूलभूत सुविधाएं समय पर और गुणवत्तापूर्ण तरीके से मिलनी चाहिए।
               नालंदा परिसर की रफ्तार पर नजर
शहरों के युवाओं के लिए आधुनिक अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाए जा रहे सेंट्रल लाइब्रेरी सह रीडिंग जोन ‘नालंदा परिसर’ की प्रगति की भी समीक्षा हुई।
विभाग के अनुसार प्रदेश के 38 नगरीय निकायों में नालंदा परिसर निर्माण की स्वीकृति दी गई है, जिनमें 31 कार्य वर्तमान में प्रगतिरत हैं। मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन परिसरों में तेजी लाने और उन्हें जल्द पूरा करने के निर्देश दिए। रायपुर में निर्माणाधीन नालंदा परिसर की प्रगति की भी जानकारी ली गई।
           सड़कें चौड़ी होंगी, ट्रैफिक को मिलेगा रास्ता
नगरोत्थान योजना की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर शहरों की अधोसंरचना विकसित करने पर जोर दिया।
योजना के तहत प्रदेश के 14 नगर निगमों में मुख्य सड़कों के चौड़ीकरण, बाईपास, फ्लाईओवर, सर्विस लेन और अंडरपास जैसी यातायात सुविधाओं को विकसित किया जा रहा है। मुख्यमंत्री ने अपनी पूर्व घोषणाओं के तहत स्वीकृत कार्यों को भी समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए।
वहीं नागरिक-केंद्रित और संगठित शहरी विकास के लिए ‘आदर्श शहर समृद्धि योजना’ शुरू की गई है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में इसके लिए 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है और 32 नगरीय निकायों का चयन किया गया है।


              शहर की सफाई में अब ढिलाई नहीं
मुख्यमंत्री ने पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और साफ-सफाई जैसी सेवाओं की नियमित निगरानी पर विशेष जोर दिया। उनका स्पष्ट कहना था कि नागरिकों से सीधे जुड़ी इन मूलभूत सुविधाओं में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
शहरी ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए प्रत्येक नगरीय निकाय में अपशिष्ट प्रसंस्करण प्लांट स्थापित करने की दिशा में काम करने के निर्देश भी दिए गए।
                   रायपुर का प्रदर्शन बना मिसाल
बैठक में स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में रायपुर नगर निगम के प्रदर्शन की भी चर्चा हुई। अधिकारियों के अनुसार 10 लाख से अधिक आबादी वाले शहरों की श्रेणी में रायपुर ने 189 अंक हासिल कर देश में छठा स्थान प्राप्त किया।
राज्य स्तरीय वार्ड रैंकिंग-2026 में रायपुर के वार्ड क्रमांक 46 ने 30 हजार से अधिक आबादी वाली श्रेणी और वार्ड क्रमांक 30 ने 10 हजार से 30 हजार आबादी वाली श्रेणी में स्थान हासिल किया।
मुख्यमंत्री ने इसके लिए विभाग और नगर निगम की टीम को बधाई दी, लेकिन साथ ही शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने पर भी जोर दिया। कम वृक्षों वाले क्षेत्रों को चिन्हित कर व्यापक वृक्षारोपण और वार्डों में उद्यान विकसित करने के निर्देश दिए गए।
                पक्के घरों का इंतजार अब लंबा नहीं
प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 1.0 और 2.0 की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने स्वीकृत आवासों, निर्माण, आवंटन और व्यवस्थापन की स्थिति की जानकारी लेते हुए पात्र हितग्राहियों को जल्द से जल्द आवास उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।
सरकार का जोर यह है कि योजना की फाइल और स्वीकृति के बाद लाभार्थी को वास्तविक रूप से उसका पक्का घर भी समय पर मिले।
                 चार शहरों में दौड़ेंगी 240 ई-बसें
शहरी परिवहन के मोर्चे पर भी बड़ा बदलाव आने वाला है। प्रधानमंत्री ई-बस सेवा के तहत रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में कुल 240 ई-बसें चलाने की तैयारी की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार ई-बसों के संचालन से संबंधित आवश्यक अधोसंरचना का काम मार्च 2027 से पहले पूरा करने और इसके बाद बस सेवा शुरू करने का लक्ष्य है।
मुख्यमंत्री ने निर्माण एवं अधोसंरचना से जुड़े सभी कार्यों को तेजी से पूरा करने के निर्देश दिए। ई-बसों को आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया।
शिकायतों पर अब सिर्फ जवाब नहीं, समाधान चाहिए
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में नगरीय प्रशासन से संबंधित शिकायतों की भी समीक्षा हुई। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को नागरिकों की शिकायतों का संवेदनशीलता के साथ त्वरित और प्रभावी निराकरण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
साथ ही प्रॉपर्टी टैक्स के पुनरीक्षण और नगरीय निकायों के विद्युत देयकों की स्थिति की जानकारी ली गई। निकायों को हर महीने बिजली बिल का नियमित भुगतान सुनिश्चित करने को कहा गया।
             कमाई बढ़ेगी तभी निकाय होंगे मजबूत
मुख्यमंत्री ने नगरीय निकायों को आर्थिक रूप से मजबूत और आत्मनिर्भर बनाने के लिए राजस्व एवं कर संग्रह बढ़ाने पर जोर दिया। बेहतर कर संग्रह करने वाले निकायों को प्रोत्साहित और सम्मानित करने की व्यवस्था विकसित करने के निर्देश भी दिए गए।
इसका सीधा मतलब है कि सरकार शहरों को केवल अनुदान पर निर्भर रखने के बजाय उनकी अपनी आय बढ़ाने की दिशा में भी आगे बढ़ाना चाहती है।
         अमृत मिशन की धीमी रफ्तार पर सीएम नाराज
समीक्षा बैठक का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा अमृत मिशन 2.0 रहा। अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर मुख्यमंत्री ने नाराजगी जताई और अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि लंबित कार्यों को मिशन मोड में पूरा किया जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि शहरी क्षेत्रों में शत-प्रतिशत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता है। इसके साथ ही सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण में आधुनिक तकनीक और उच्च गुणवत्ता सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।
स्लम रिडेवलपमेंट और लैंड मोनेटाइजेशन की दिशा में भी योजनाबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
           कचरे से बनेगी गैस, 800 करोड़ का निवेश
शहरी कचरे के बेहतर उपयोग की दिशा में भी बड़ा कदम उठाया जा रहा है। बैठक में बताया गया कि प्रदेश के 8 नगरीय निकायों में लगभग 800 करोड़ रुपये की लागत से कम्प्रेस्ड बायो गैस यानी सीबीजी प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं।
यह परियोजनाएं शहरी कचरे के वैज्ञानिक प्रबंधन के साथ स्वच्छ एवं सतत ईंधन के उत्पादन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
         अब सवाल सिर्फ योजना का नहीं, नतीजे का है
मुख्यमंत्री साय ने अधिकारियों को साफ संदेश दिया कि शहरी विकास से जुड़ी योजनाओं का असर कागजों में नहीं, बल्कि जमीन पर दिखाई देना चाहिए। निर्माण की गुणवत्ता, समयसीमा और नियमित निगरानी पर विशेष जोर दिया गया।
अब आने वाले महीनों में इन निर्देशों की असली परीक्षा शहरों की सड़कों, नलों, सफाई व्यवस्था, सार्वजनिक परिवहन, आवास और नागरिक शिकायतों के समाधान में दिखाई देगी। क्योंकि शहरों की तस्वीर बदलने का दावा तभी मजबूत होगा, जब आम नागरिक को अपने रोजमर्रा के जीवन में उसका फर्क महसूस हो।

प्रदीप मिश्रा
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