बच्चियां पैदल निकलीं तो सीएम सख्त, कलेक्टर से फोन पर मांगा जवाब
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सरगुजा, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संतोष यादव
सरगुजा एकलव्य विद्यालय की छात्राओं के पैदल निकलने पर मुख्यमंत्री सख्त
बिजली, पढ़ाई, शिक्षकों की कमी, मेस और साफ-सफाई की समस्याओं से परेशान छात्राओं के कलेक्टोरेट की ओर पैदल निकलने की घटना पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने जताई नाराजगी, जांच और जिम्मेदारी तय करने के दिए निर्देश
सरगुजा ACGN:-
जब बच्चियां पैदल निकलीं – सरगुजा जिले के शिवपुर एकलव्य आवासीय विद्यालय की छात्राओं को अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्टोरेट की ओर पैदल निकलना पड़ा तो इसकी खबर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय तक पहुंची। मामला सामने आते ही मुख्यमंत्री ने इसे गंभीरता से लिया और तत्काल सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत से फोन पर बात कर पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
सीएम का सीधा सवाल – मुख्यमंत्री ने कलेक्टर से स्पष्ट शब्दों में कहा कि बच्चियों को अपनी बुनियादी समस्याओं के समाधान के लिए विद्यालय से पैदल निकलना पड़े, यह किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है। यदि विद्यालय में लंबे समय से बिजली और दूसरी समस्याएं बनी हुई थीं तो संबंधित अधिकारियों ने समय रहते उनका समाधान क्यों नहीं किया? मुख्यमंत्री ने इस पूरे मामले को लेकर नाराजगी जताते हुए अधिकारियों से जवाबदेही तय करने को कहा।
अब जांच होगी – मुख्यमंत्री ने जिला प्रशासन को पूरे मामले की जांच कराने और लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों-कर्मचारियों के विरुद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने साफ किया कि आदिवासी अंचलों के आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों में बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और मूलभूत सुविधाओं के मामले में किसी भी स्तर की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
बिजली से पढ़ाई तक -छात्राओं ने विद्यालय में बिजली, शिक्षकों की कमी, नियमित पढ़ाई, मेस और साफ-सफाई सहित कई समस्याएं सामने रखी थीं। मुख्यमंत्री ने इन सभी समस्याओं का तत्काल समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि केवल अभी की समस्या दूर कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि ऐसी व्यवस्था बननी चाहिए कि भविष्य में छात्राओं को अपनी शिकायत लेकर विद्यालय से बाहर निकलने की जरूरत ही न पड़े।
जिम्मेदारी किसकी?
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि आवासीय विद्यालयों और छात्रावासों की व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा की जाए। अधिकारी समय-समय पर स्वयं निरीक्षण करें और बच्चों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याओं की जानकारी लें। मुख्यमंत्री की नाराजगी का केंद्र यही रहा कि यदि समस्याएं लंबे समय से थीं तो प्रशासन को इसकी जानकारी पहले क्यों नहीं हुई।
बच्चों की आवाज वहीं सुनी जाए – मुख्यमंत्री ने कहा कि छात्रावासों में रहने वाले बच्चों को किसी परेशानी के समाधान के लिए प्रशासन तक स्वयं पहुंचने की स्थिति दोबारा नहीं बननी चाहिए। विद्यालय और छात्रावास स्तर पर ही बच्चों की समस्याएं सुनी जाएं और उनका समयबद्ध समाधान किया जाए। इसके लिए अधिकारियों को सतत निगरानी रखने के निर्देश दिए गए हैं।
सिर्फ इमारत नहीं, माहौल भी जरूरी – मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी अंचलों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर सुविधाएं देने के लिए लगातार संसाधन उपलब्ध करा रही है। इन संसाधनों और योजनाओं का लाभ वास्तव में बच्चों तक पहुंचे, यह सुनिश्चित करना मैदानी अधिकारियों की जिम्मेदारी है। बच्चों को पढ़ाई के लिए सुरक्षित, सुविधाजनक और सकारात्मक वातावरण मिलना चाहिए।
“हमारे बच्चे हम पर भरोसा करते हैं” – मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बच्चे सरकार और प्रशासन पर विश्वास करके आवासीय विद्यालयों तथा छात्रावासों में रहकर पढ़ाई कर रहे हैं। उनकी छोटी से छोटी समस्या को संवेदनशीलता के साथ सुनना और समय पर उसका समाधान करना जिम्मेदार अधिकारियों की जिम्मेदारी है। उन्होंने जिला प्रशासन को छात्राओं से लगातार संवाद बनाए रखने तथा विद्यालय में किए जा रहे सुधारों की सतत निगरानी करने के निर्देश दिए।
अब नजर कार्रवाई पर – मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद अब निगाह इस बात पर है कि जांच में क्या सामने आता है और लंबे समय से बताई जा रही समस्याओं के लिए जिम्मेदारी किसकी तय होती है। फिलहाल मुख्यमंत्री ने स्पष्ट संदेश दिया है कि आवासीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को अपनी मूलभूत जरूरतों के लिए सड़क पर उतरने की नौबत नहीं आनी चाहिए।
प्रदीप मिश्रा
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