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कलेक्टर की दो टूक चेतावनी, निर्माण में गड़बड़ी मिली तो होगी एफआईआर

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009

सेजेस के अधूरे काम जल्द होंगे पूरे, पंचायतों के भुगतान में देरी पर भी तय होगी जिम्मेदारी

कोरबा ACGN:- जिले में सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और समयबद्धता को लेकर कलेक्टर कुणाल दुदावत ने अधिकारियों को सख्त संदेश दिया है। कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में आयोजित समय-सीमा की बैठक में उन्होंने कहा कि सरकारी निर्माण में स्वीकृत प्राक्कलन और निर्धारित मापदंडों से किसी भी तरह का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। गड़बड़ी की शिकायत या जांच में अनियमितता की पुष्टि होने पर जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और गंभीर मामलों में एफआईआर भी दर्ज कराई जाएगी।
            सरकारी निर्माण में अब गुणवत्ता की परीक्षा
कलेक्टर ने सभी जनपद पंचायतों के सीईओ और निर्माण कार्यों की क्रियान्वयन एजेंसियों को निर्देश दिए कि जिले में चल रहे सभी निर्माण कार्य स्वीकृत प्राक्कलन और निर्धारित मापदंडों के अनुसार ही किए जाएं।
उन्होंने निर्माण में गुणवत्तापूर्ण सामग्री के इस्तेमाल और प्रत्येक स्तर पर कार्य की गुणवत्ता की निगरानी सुनिश्चित करने को कहा। संदेश साफ था, सरकारी पैसे से बनने वाले निर्माण में लापरवाही हुई तो जिम्मेदारी तय होगी।
                 गड़बड़ी साबित हुई तो एफआईआर
कलेक्टर ने अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी देते हुए कहा कि निर्धारित मानकों का उल्लंघन अथवा घटिया सामग्री के इस्तेमाल की शिकायत यदि जांच में सही पाई जाती है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी।
गंभीर अनियमितता मिलने पर संबंधित के खिलाफ एफआईआर कराने की बात भी उन्होंने कही। अब देखना होगा कि यह सख्ती जिले में चल रहे निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर कितना असर डालती है।
                 पंचायतों का भुगतान क्यों रोका?
बैठक में ग्राम पंचायतों के पूर्ण हो चुके निर्माण कार्यों के भुगतान का मुद्दा भी उठा। कलेक्टर ने जनपद पंचायतों के सीईओ को निर्देश दिया कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद भुगतान संबंधी प्रकरणों को अनावश्यक रूप से लंबित न रखा जाए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि बिना ठोस कारण किसी ग्राम पंचायत के दस्तावेज या भुगतान संबंधी प्रकरण को रोका गया और भुगतान में अनावश्यक विलंब हुआ तो संबंधित लिपिक और जनपद सीईओ की जिम्मेदारी तय कर कार्रवाई की जाएगी।
                  सेजेस के अधूरे काम पर भी नजर
कलेक्टर ने जिले में संचालित सेजेस से जुड़े अपूर्ण निर्माण कार्यों की स्थिति की समीक्षा करते हुए उन्हें शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए। शिक्षा से जुड़े इन कार्यों में देरी का सीधा असर विद्यार्थियों और स्कूल की व्यवस्थाओं पर पड़ता है, इसलिए निर्माण कार्यों को प्राथमिकता से पूरा करने के निर्देश दिए गए।
                 लंबित फाइलों पर भी कलेक्टर सख्त
समय-सीमा की बैठक में विभिन्न विभागों के लंबित प्रकरणों की विभागवार समीक्षा की गई। कलेक्टर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि निर्धारित समय-सीमा के भीतर सभी लंबित मामलों का निराकरण किया जाए।
प्रधानमंत्री कार्यालय, मुख्यमंत्री जनदर्शन सहित अन्य महत्वपूर्ण पत्रों और प्रकरणों की भी समीक्षा की गई। संबंधित अधिकारियों को प्राथमिकता के साथ मामलों का निराकरण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा गया।
          प्राकृतिक खेती से लेकर किसानों के केसीसी तक
कलेक्टर ने प्रधानमंत्री धन-धान्य योजना के अंतर्गत प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने और किसानों को इसके लिए प्रोत्साहित करने के निर्देश दिए।
मत्स्य पालन एवं पशुधन चिकित्सा विभाग को निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप किसानों के किसान क्रेडिट कार्ड तैयार कराने के निर्देश भी दिए गए, ताकि पात्र किसानों को संस्थागत वित्तीय सहायता तक पहुंच मिल सके।
                 युवाओं और प्रशिक्षण पर भी जोर
‘माय भारत’ पोर्टल से अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने और प्रश्नोत्तरी आयोजित करने के निर्देश दिए गए। कौशल विकास विभाग की समीक्षा के दौरान ड्रोन दीदी प्रशिक्षण और कृषि विज्ञान केंद्र के विभिन्न प्रशिक्षण कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संचालित करने पर जोर दिया गया।
कलेक्टर ने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल प्रमाण पत्र देना नहीं, बल्कि पात्र हितग्राहियों को प्रशिक्षण के बाद रोजगार और आजीविका से जोड़ना होना चाहिए।
             अब दफ्तर में भी ऑनलाइन निगरानी
सरकारी कार्यालयों में अधिकारियों और कर्मचारियों की उपस्थिति और समयपालन को लेकर भी कलेक्टर ने सख्ती दिखाई। सभी जिला अधिकारियों को अपने अधीनस्थ अधिकारियों-कर्मचारियों को ई-एचआरएमएस और ई-ऑफिस में अनिवार्य रूप से ऑनबोर्ड कराने के निर्देश दिए गए।
ऑनलाइन बायोमेट्रिक उपस्थिति की समीक्षा करते हुए सभी विभागों को निर्धारित समय पर उपस्थिति दर्ज कराने के निर्देश दिए गए। कार्यालयीन समय में कर्मचारियों की मौजूदगी और समयबद्धता को गंभीरता से सुनिश्चित करने को कहा गया।
            समय पर आने वालों को मिलेगा सम्मान
सिर्फ निगरानी ही नहीं, बेहतर प्रदर्शन करने वालों को प्रोत्साहन देने की भी बात कही गई। कलेक्टर ने नियमित रूप से समय पर कार्यालय पहुंचने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों का ऑनलाइन उपस्थिति रिकॉर्ड निकालकर उत्कृष्ट समयपालन करने वालों को प्रोत्साहित एवं सम्मानित करने के निर्देश दिए।
यानी सरकारी दफ्तरों में समय की पाबंदी को अब जवाबदेही के साथ-साथ प्रोत्साहन से भी जोड़ने की तैयारी है।
      अब सरकारी काम में जवाबदेही सबसे बड़ा सवाल
बैठक से कलेक्टर ने एक स्पष्ट संदेश देने की कोशिश की है, सरकारी निर्माण हो या भुगतान, कार्यालयीन व्यवस्था हो या लंबित प्रकरण, हर स्तर पर जिम्मेदारी तय होगी।
खासकर निर्माण कार्यों में एफआईआर की चेतावनी ने यह संकेत जरूर दिया है कि अब गुणवत्ता से समझौते के मामलों को हल्के में नहीं लिया जाएगा। असली परीक्षा अब उन निर्माण कार्यों की होगी, जहां जांच के बाद यह तय होगा कि कलेक्टर की चेतावनी सिर्फ बैठक तक सीमित रहती है या वास्तव में जमीन पर भी कार्रवाई दिखाई देती है।

प्रदीप मिश्रा
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