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सिंघाली में सड़क किनारे झटका तार से ग्रामीणों में चिंता, जांच की मांग

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009

ढेलवाड़ीह–सिंघाली मुख्य मार्ग पर खेत में कथित झटका फेंसिंग का मामला, ग्रामीण बोले, सुरक्षा के लिए जांच जरूरी, विवाद नहीं चाहते लेकिन खतरे से भी समझौता नहीं

कोरबा ACGN:- कोरबा जिले के कटघोरा विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत सिंघाली में ढेलवाड़ीह–सिंघाली मुख्य मार्ग के किनारे खेत में लगी कथित झटका फेंसिंग को लेकर ग्रामीणों में चिंता और नाराजगी सामने आई है। ग्रामीणों के अनुसार ग्राम पंचायत सिंघाली निवासी रमेश पटेल द्वारा अपने खेत की सुरक्षा के लिए फेंसिंग तार लगाया गया है, जिसमें विद्युत झटका होने की बात कही जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क और फेंसिंग के बीच की दूरी पांच मीटर से भी कम है।


ग्रामीणों के अनुसार इस मार्ग के दोनों ओर और आसपास कई अन्य किसानों के खेत भी सड़क से लगे हुए हैं, लेकिन ग्रामीणों का कहना है कि अन्य खेत मालिकों द्वारा इस प्रकार की कथित झटका फेंसिंग नहीं लगाई गई है। ग्रामीणों की चिंता मुख्य रूप से इसी बात को लेकर है कि सार्वजनिक आवागमन वाले मुख्य मार्ग के इतने नजदीक एक खेत में विद्युत झटका देने वाली फेंसिंग क्यों लगाई गई है और क्या इसके लिए सभी आवश्यक सुरक्षा नियमों का पालन किया गया है।
        साधारण फेंसिंग की बात पर भी विवाद की स्थिति?
ग्रामीणों का कहना है कि उनका उद्देश्य किसी किसान की फसल सुरक्षा में बाधा डालना नहीं है। उनका कहना है कि सड़क किनारे खेतों में जानवरों के प्रवेश को रोकने के लिए साधारण जाली या सुरक्षित फेंसिंग भी लगाई जा सकती है।
ग्रामीणों के अनुसार जब उन्होंने खेत मालिक से इसी तरह की सामान्य फेंसिंग लगाने और झटका तार हटाने की बात कही, तो बातचीत के दौरान विवाद जैसी स्थिति बनने की बात सामने आई। ग्रामीणों का कहना है कि उन्हें यह भी कहा गया कि झटका तार हटाया नहीं जाएगा। हालांकि इस बातचीत की स्वतंत्र पुष्टि समाचार लिखे जाने तक नहीं हो सकी है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे एक ही गांव में रहने के कारण किसी प्रकार का व्यक्तिगत विवाद या आपसी मनमुटाव नहीं चाहते। इसी कारण कई ग्रामीण अपना नाम सार्वजनिक नहीं करना चाहते। उनका कहना है कि मामला किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ शिकायत का नहीं, बल्कि सार्वजनिक मार्ग से गुजरने वाले लोगों, बच्चों और पशुओं की सुरक्षा का है।


      ग्रामीणों का सवाल—तार टूटकर सड़क पर गिरा तो?
ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता फेंसिंग के तार के टूटने को लेकर बताई जा रही है। उनका कहना है कि यदि तार टूटकर जमीन पर या सड़क की ओर गिर जाता है और उसमें विद्युत प्रवाह बना रहता है, तो राहगीरों और छोटे पशुओं के लिए खतरा पैदा हो सकता है।
ग्रामीणों के अनुसार बच्चे और छोटे जानवर अक्सर सड़क किनारे से आते-जाते रहते हैं। ऐसे में कोई बच्चा या पशु अनजाने में तार के संपर्क में आ जाए तो चोट अथवा गंभीर दुर्घटना की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।
इसी वजह से ग्रामीणों का कहना है कि किसी दुर्घटना के बाद कार्रवाई करने के बजाय पहले ही इसकी जांच क्यों नहीं कराई जाए?

बैटरी से करंट या सीधे बिजली से – यह भी जांच का विषय
ग्रामीणों के बीच यह चर्चा है कि फेंसिंग में झटका देने के लिए किसी विद्युत स्रोत का इस्तेमाल किया जा रहा है। जिस घर से कनेक्शन होने की बात ग्रामीण बता रहे हैं, उसकी वास्तविक स्थिति क्या है, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
यह भी स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है कि फेंसिंग को बैटरी/सोलर आधारित झटका मशीन से विद्युत प्रवाह दिया जा रहा है अथवा सीधे बिजली कनेक्शन से। ग्रामीणों का कहना है कि इस बात की वास्तविकता विद्युत विभाग द्वारा मौके पर जांच के बाद ही सामने आ सकती है।


        नियम सही है तो ग्रामीणों को भी कोई आपत्ति नहीं
ग्रामीणों का कहना है कि यदि खेत में लगाई गई फेंसिंग पूरी तरह नियमों के अनुरूप है और इससे किसी व्यक्ति या पशु की सुरक्षा को खतरा नहीं है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
लेकिन यदि जांच में यह पाया जाता है कि फेंसिंग में विद्युत प्रवाह की व्यवस्था नियमों के विपरीत है, सुरक्षा मानकों का पालन नहीं किया गया है या सार्वजनिक मार्ग के आसपास ऐसी व्यवस्था से दुर्घटना की आशंका है, तो संबंधित विभाग को नियमानुसार कार्रवाई करनी चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी किसान की फसल बर्बाद नहीं करवाना चाहते। उनका कहना सिर्फ इतना है कि फसल भी बचे और इंसान व पशु भी सुरक्षित रहें।
                  अब कई विभागों की जिम्मेदारी
ग्रामीणों की चिंता को देखते हुए मामले की जांच केवल एक विभाग तक सीमित न रखकर संबंधित विभागों से कराई जानी चाहिए।
CSPDCL के संबंधित विद्युत अधिकारी यह जांच करें कि फेंसिंग में वास्तव में विद्युत प्रवाह है या नहीं और यदि है तो उसका स्रोत क्या है तथा कनेक्शन किस प्रकार लिया गया है।
विद्युत निरीक्षक/विद्युत सुरक्षा विभाग यह देखे कि झटका फेंसिंग की तकनीकी व्यवस्था निर्धारित सुरक्षा मानकों के अनुरूप है या नहीं।
राजस्व विभाग खसरा एवं नक्शे के आधार पर यह जांच करे कि फेंसिंग निजी भूमि की सीमा में है अथवा सड़क की सरकारी भूमि/सीमा में किसी प्रकार का अतिक्रमण तो नहीं है।
PWD अथवा संबंधित सड़क निर्माण विभाग सड़क की वास्तविक सीमा और Right of Way की स्थिति स्पष्ट करे, क्योंकि सड़क की डामर पट्टी से दिखाई देने वाली दूरी ही सरकारी सड़क की पूरी सीमा नहीं मानी जा सकती।
यदि मार्ग PMGSY अथवा ग्रामीण सड़क योजना के अंतर्गत आता है तो संबंधित विभाग के अधिकारी भी मौके का निरीक्षण करें।
जरूरत पड़ने पर वन विभाग भी यह देखे कि यदि इस क्षेत्र से वन्यजीवों का आवागमन होता है तो विद्युत फेंसिंग से वन्यजीवों के लिए कोई खतरा तो नहीं है।
इसके अलावा SDM कटघोरा, तहसीलदार कटघोरा, जनपद पंचायत कटघोरा और ग्राम पंचायत सिंघाली को भी ग्रामीणों की इस जनसुरक्षा संबंधी चिंता पर संज्ञान लेकर संबंधित विभागों से जांच करानी चाहिए।
          ग्रामीणों की मांग – जांच हो, सच सामने आए
ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी व्यक्ति के साथ विवाद नहीं चाहते और न ही किसी किसान के अधिकार के खिलाफ हैं। लेकिन सार्वजनिक सड़क के किनारे ऐसी फेंसिंग को लेकर यदि ग्रामीणों में सुरक्षा की चिंता है तो प्रशासन को इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क किनारे कई खेत हैं, अधिकांश किसान सामान्य तरीके से अपनी फसल की सुरक्षा कर रहे हैं। ऐसे में केवल एक खेत में कथित विद्युत झटका फेंसिंग लगाए जाने को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है।
उनकी मांग है कि संबंधित अधिकारी मौके पर पहुंचें, फेंसिंग की वास्तविक स्थिति देखें, विद्युत स्रोत की जांच करें, सड़क की सीमा की पुष्टि करें और यदि व्यवस्था नियमों के अनुरूप है तो ग्रामीणों को इसकी जानकारी दें। वहीं यदि किसी नियम या सुरक्षा मानक का उल्लंघन पाया जाता है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
क्योंकि सवाल किसी एक किसान और किसी एक खेत का नहीं—सवाल उस रास्ते से गुजरने वाले हर बच्चे, हर ग्रामीण और हर छोटे-बड़े पशु की सुरक्षा का है। हादसा होने के बाद जिम्मेदारी तय करने से बेहतर है कि प्रशासन मौके पर पहुंचकर स्थिति स्पष्ट करे।

प्रदीप मिश्रा
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