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सच की तह तक

रक्षाबंधन राखी का धागा नहीं, बचपन लौट आता है

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संपादकीय

By ACGN 7647981711, 9303948009

रक्षाबंधन विशेष |

कुछ रिश्ते उम्र के साथ बड़े नहीं होते, बस दिल में और गहरे उतरते जाते हैं

रक्षाबंधन आते ही बाजारों में राखियां सज जाती हैं, मिठाइयों की खुशबू फैल जाती है और हर तरफ त्योहार की रौनक दिखाई देने लगती है। लेकिन इस त्योहार की असली खूबसूरती दुकानों की चमक में नहीं, उस पल में छिपी होती है जब एक बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है और दोनों की आंखों के सामने बचपन का पूरा आंगन उतर आता है।
वही बचपन जब एक ही खिलौने के लिए लड़ाई होती थी।
जब छोटी-सी बात पर भाई बहन को चिढ़ाता था और बहन मां से शिकायत कर देती थी।
जब दोनों एक-दूसरे से रूठते थे, लेकिन कुछ देर बाद बिना किसी औपचारिकता के फिर साथ बैठ जाते थे।
समय बीत गया। आंगन छोटे हो गए, घर बदल गए, शहर बदल गए और जिंदगी अपनी-अपनी राह पर चल पड़ी। लेकिन भाई-बहन का रिश्ता वहीं खड़ा रहा, उसी अपनापन लिए, उसी मासूमियत के साथ।


             बहन की राखी में सिर्फ धागा नहीं होता
बहन जब भाई की कलाई पर राखी बांधती है तो उसके हाथों में केवल एक धागा नहीं होता। उसमें मां के घर की याद होती है, बचपन की हंसी होती है, साथ बिताए अनगिनत पल होते हैं और भाई के लिए एक ऐसी चिंता होती है जिसे वह शायद शब्दों में कभी कह नहीं पाती।
कई बहनें राखी बांधते हुए सिर्फ इतना कहती हैं “अपना ख्याल रखना।”
लेकिन इन चार शब्दों के पीछे कितनी भावनाएं छिपी होती हैं, यह वही समझ सकता है जिसके घर से बेटी विदा होकर किसी दूसरे घर की हो गई हो।
               भाई भी हमेशा मजबूत नहीं होता
हम अक्सर कहते हैं कि भाई बहन की रक्षा करता है। लेकिन सच यह भी है कि कई बार बहन ही अपने भाई की सबसे बड़ी ताकत होती है।
जब भाई जिंदगी में हारता है, तो बहन कहती है, “फिर से कोशिश कर, तू कर सकता है।”
जब भाई परेशान होता है, तो बहन उसकी आवाज से ही समझ जाती है कि कुछ ठीक नहीं है। जब दुनिया उसे गलत समझती है, तब भी बहन उसके साथ खड़ी मिल सकती है।
इसलिए राखी सिर्फ भाई की जिम्मेदारी का त्योहार नहीं है। यह उस रिश्ते का उत्सव है, जहां दोनों एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी होते हैं।

कुछ बहनें राखी लेकर आती हैं, कुछ सिर्फ याद बनकर रह जाती हैं

रक्षाबंधन का सबसे भावुक पल शायद उनके लिए होता है जिनकी बहन या भाई अब इस दुनिया में नहीं हैं।
उस दिन घर में सब कुछ वैसा ही होता है, राखी होती है, मिठाई होती है, त्योहार होता है, बस वह इंसान नहीं होता, जिसके लिए यह सब था।
           कलाई खाली रहती है, लेकिन यादें भरी रहती हैं।
पुरानी तस्वीरें निकलती हैं। बचपन की बातें याद आती हैं। कभी जिस भाई से लड़कर दरवाजा बंद कर लिया था, उसी की याद में आज आंखें भर आती हैं। कभी जिस बहन की छोटी-छोटी शिकायतों से भाई परेशान होता था, आज उसकी वही आवाज सुनने को मन तरस जाता है।
शायद रिश्तों की यही सच्चाई है, जब लोग हमारे पास होते हैं, तब उनकी कीमत अक्सर समझ नहीं आती; और जब वे दूर चले जाते हैं, तब उनकी याद जिंदगीभर हमारे साथ रहती है।
राखी का मतलब सिर्फ रक्षा नहीं, साथ भी है
आज जरूरत इस बात की है कि रक्षाबंधन को केवल एक रस्म बनाकर न छोड़ दिया जाए।
बहन की रक्षा का मतलब केवल उसकी सुरक्षा करना नहीं है। उसके सपनों की रक्षा करना भी है। उसकी पढ़ाई में साथ देना, उसके फैसलों का सम्मान करना, उसके आत्मसम्मान के लिए खड़ा होना और उसे यह भरोसा देना कि वह जिंदगी में अकेली नहीं है, यही असली रक्षा है। और बहन के लिए भी भाई की रक्षा का अर्थ केवल उसकी कलाई पर राखी बांधना नहीं। उसके संघर्ष को समझना, उसकी गलतियों में सही रास्ता दिखाना और जरूरत पड़ने पर उसके साथ खड़े रहना भी इसी रिश्ते का हिस्सा है।

बचपन वापस नहीं आता, लेकिन भाई-बहन का रिश्ता उसे याद जरूर दिलाता है

जिंदगी कितनी भी बदल जाए, भाई-बहन का रिश्ता एक ऐसी जगह है जहां इंसान अपने बचपन को फिर से महसूस कर सकता है।
उम्र बढ़ जाती है, जिम्मेदारियां बढ़ जाती हैं, बाल सफेद हो जाते हैं, लेकिन बहन के लिए भाई वही रहता है जो बचपन में उसकी चोटी खींचकर भाग जाता था और भाई के लिए बहन वही रहती है जो कभी उसकी शिकायत मां से करती थी, कभी उसकी किताब छिपा देती थी और कभी उसके हिस्से की मिठाई भी खा जाती थी।
रिश्ते शायद इसी को कहते हैं, जहां उम्र बदल जाती है, लेकिन अपनापन नहीं बदलता, इस राखी पर एक बार फोन जरूर करिए…
अगर आपकी बहन आपसे दूर है तो उसे केवल सोशल मीडिया पर संदेश मत भेजिए। एक बार फोन करिए। उसकी आवाज सुनिए। पूछिए “कैसी हो?”
अगर आपका भाई दूर है तो उसे केवल राखी की तस्वीर मत भेजिए। उसे फोन करिए और कहिए “भैया, अपना ख्याल रखना।”
क्योंकि जिंदगी बहुत छोटी है।
हम अक्सर सोचते हैं कि अगले साल मिल लेंगे, अगली बार बात कर लेंगे, अगली राखी पर साथ बैठेंगे… लेकिन जिंदगी हर बार अगली मुलाकात का मौका दे, यह जरूरी नहीं।
इसलिए जो अपने हैं, उन्हें आज ही महसूस कर लीजिए।
राखी बांधिए, लेकिन उससे पहले रिश्ते को महसूस कीजिए।
मिठाई खिलाइए, लेकिन साथ में दो पल दिल की बात भी कीजिए। और अगर कोई शिकायत बाकी है, तो इस राखी पर उसे भी खत्म कर दीजिए।
क्योंकि आखिर में याद वही नहीं रहता कि राखी कितनी महंगी थी…
याद रहता है तो बस यह कि उस दिन भाई की कलाई पर बहन का हाथ था और दोनों के बीच बचपन फिर से जिंदा हो गया था।


अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़ की ओर से रक्षाबंधन के इस पावन अवसर पर हर भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम बना रहे, दूरियां कम हों, पुराने गिले-शिकवे मिटें और हर बहन को अपने भाई का साथ मिले, हर भाई को अपनी बहन का विश्वास मिले।
उन बहनों के नाम, जो राखी बांधते समय अपनी आंखों में आंसू छिपा लेती हैं…
और उन भाइयों के नाम, जो मजबूत बनने का दिखावा करते हैं, लेकिन बहन के सामने आज भी बच्चे बन जाते हैं।
राखी कलाई पर बंधने वाला धागा है,
लेकिन भाई-बहन का रिश्ता पूरी जिंदगी को बांधे रखता है।
रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं।

प्रदीप मिश्रा संपादक
अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़

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