समान नागरिक संहिता पर छत्तीसगढ़ में मंथन, धर्म और समाज के प्रतिनिधियों ने रखे सुझाव
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर
विवाह, तलाक, उत्तराधिकार और लिव-इन संबंधों में समान अधिकारों को लेकर हुई विस्तृत चर्चा, जनजातीय परंपराओं के संरक्षण पर भी जोर
रायपुर, 27 अगस्त 2026। छत्तीसगढ़ में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर व्यापक विचार-विमर्श का दौर जारी है। इसी कड़ी में राजधानी रायपुर के न्यू सर्किट हाउस में धार्मिक एवं सामाजिक संगठनों, विभिन्न आयोगों, निगमों और मंडलों के पदाधिकारियों के साथ विस्तृत बैठक आयोजित की गई। बैठक में समान नागरिक संहिता के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए उपस्थित प्रतिनिधियों से सुझाव लिए गए।
धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने रखी अपनी बात
समान नागरिक संहिता के लिए गठित समिति के सदस्य सेवानिवृत्त आईएएस श्री शत्रुघ्न सिंह एवं श्री एम.के. राउत, वरिष्ठ अधिवक्ता श्री मोहन पवार, सेवानिवृत्त अधिकारी श्रीमती ज्योति रानी सिंह तथा सदस्य सचिव श्री श्याम धावड़े के समक्ष विभिन्न संगठनों और संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपने विचार एवं सुझाव साझा किए।
समिति का गठन संविधान के अनुच्छेद 44 के तहत राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों को साकार करने के उद्देश्य से किया गया है। समिति द्वारा प्रदेशभर में विभिन्न वर्गों, धार्मिक-सामाजिक संगठनों, समाज प्रमुखों, प्रबुद्धजनों और जनप्रतिनिधियों से सुझाव प्राप्त किए जा रहे हैं।
विवाह से उत्तराधिकार तक समान कानूनी व्यवस्था पर चर्चा
बैठक में प्रस्तावित समान नागरिक संहिता के तहत विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार, गोद लेने और लिव-इन संबंधों जैसे व्यक्तिगत मामलों में सभी नागरिकों के लिए समान एवं न्यायसंगत कानूनी अधिकार उपलब्ध कराने के विषय पर विचार किया गया।
चर्चा में महिलाओं के अधिकारों और संपत्ति में पुत्र एवं पुत्री को समान उत्तराधिकार दिए जाने जैसे विषयों को भी प्रमुखता से रखा गया। साथ ही मौखिक तलाक सहित असमानता अथवा भेदभाव को बढ़ावा देने वाली कुछ प्रथाओं पर रोक लगाने की संभावनाओं को लेकर भी सुझाव सामने आए।
आयोग, निगम और मंडल के पदाधिकारियों की सक्रिय भागीदारी
परिचर्चा में मध्य क्षेत्र आदिवासी विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री प्रणव कुमार मरपच्ची, विश्व हिंदू परिषद के अध्यक्ष श्री ललित माखीजा, क्रिश्चियन समाज के श्री जान राजेश पॉल, मुस्लिम समाज के अध्यक्ष श्री सलाम रिजवी, गुरुद्वारा कमेटी के अध्यक्ष श्री इंद्रजीत छाबड़ा, अन्य पिछड़ा वर्ग प्राधिकरण के उपाध्यक्ष श्री ललित चंद्राकर तथा राज्य नीति आयोग के अध्यक्ष श्री गणेश शंकर मिश्रा सहित अनेक प्रतिनिधियों ने अपने सुझाव दिए।
इसके अलावा राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष श्री संदीप शर्मा, महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. ममता साहू, सदस्य श्रीमती सरला कोसरिया एवं श्रीमती दीपिका सोरी, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री विशेषर पटेल, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष श्री अमरजीत छाबड़ा, राज्य नागरिक आपूर्ति निगम के अध्यक्ष श्री संजय श्रीवास्तव, अनुसूचित जनजाति आयोग के अध्यक्ष श्री रूप सिंह मंडावी तथा मछुआ कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष श्री लखन लाल धीवर भी बैठक में शामिल हुए।
जैतू साव मठ के महंत श्री रामसुंदर दास, अग्रवाल समाज, माहेश्वरी समाज सहित विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भी समान नागरिक संहिता को लेकर अपनी राय समिति के समक्ष रखी।
एक समान विधिक ढांचे की दिशा में कदम
बैठक में इस बात पर जोर दिया गया कि समान नागरिक संहिता का प्रारूप तैयार करते समय सभी नागरिकों के लिए समानता, न्याय और अधिकारों को केंद्र में रखा जाए। धर्म अथवा समुदाय से अलग हटकर विवाह, तलाक और उत्तराधिकार जैसे मामलों में एक समान विधिक व्यवस्था तैयार करने की दिशा में सुझाव दिए गए।
विशेष रूप से महिलाओं को वैवाहिक एवं उत्तराधिकार संबंधी मामलों में समान अधिकार देने तथा विभिन्न व्यक्तिगत कानूनों से उत्पन्न जटिलताओं को दूर कर स्पष्ट और सुव्यवस्थित कानूनी ढांचा तैयार करने पर चर्चा हुई।
जनजातीय परंपराओं और रूढ़िगत व्यवस्थाओं के संरक्षण पर जोर
बैठक में छत्तीसगढ़ की विशिष्ट जनजातीय परंपराओं और रूढ़िगत व्यवस्थाओं को लेकर भी संवेदनशीलता के साथ विचार किए जाने की आवश्यकता बताई गई। प्रस्तावित सुधारों का इन परंपराओं पर पड़ने वाले व्यावहारिक प्रभाव का आकलन करने पर जोर दिया गया।
जन-संवाद से तैयार होगा समावेशी प्रारूप
समिति प्रदेश के सभी जिलों में फील्ड स्टडी, ऑनलाइन पोर्टल और जन-संवाद के माध्यम से आम नागरिकों, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों, कानूनविदों तथा विभिन्न वर्गों की राय जुटा रही है। न्यू सर्किट हाउस में हुई यह परिचर्चा भी इसी प्रक्रिया का हिस्सा रही।
बैठक में मिले सुझावों से छत्तीसगढ़ में पारदर्शी, सर्वसमावेशी और जनहितैषी समान नागरिक संहिता के प्रारूप को तैयार करने की प्रक्रिया को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।
प्रदीप मिश्रा
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