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हसदेव थर्मल पावर प्लांट (एचटीपीपी) के पुराने राखड़ डैम को फिर शुरू करने की कवायद, ग्रामीणों का विरोध तेज

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

भर चुके राखड़ डैम को बंद कर हटाई गई थी पाइपलाइन, अब दोबारा शुरू करने पर उठे सवाल; ग्रामीणों ने मुख्य अभियंता को सौंपा मांगपत्र, बैठक कर समाधान की मांग

कोरबा। हसदेव थर्मल पावर प्लांट (एचटीपीपी) क्षेत्र के लोल्लोलता स्थित पुराने राखड़ डैम को पुनः प्रारंभ करने की कवायद को लेकर ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यह राखड़ डैम वर्षों पहले पूरी तरह भर जाने के बाद सीएसईबी प्रबंधन द्वारा इसे बंद करने की कार्रवाई की गई थी। इसके साथ ही राखड़ परिवहन के लिए बिछाई गई पाइपलाइन भी पूरी तरह हटा दी गई थी। ऐसे में अब पुराने राखड़ डैम को दोबारा शुरू करने की आवश्यकता क्यों पड़ी, इसको लेकर ग्रामीणों ने सवाल खड़े किए हैं।
ग्रामीणों के मुताबिक राखड़ डैम लंबे समय से उपयोग में नहीं था और वर्तमान में इसकी स्थिति भी पुरानी एवं क्षतिग्रस्त है। ऐसे में यदि इसमें दोबारा राखड़ डाला जाता है तो आसपास के गांवों में प्रदूषण बढ़ने के साथ ही डैम की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर खतरा उत्पन्न हो सकता है। ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि पुराने राखड़ बांध के कमजोर होने की स्थिति में किसी प्रकार की दुर्घटना होने पर आसपास के गांवों, खेतों और लोगों की जान-माल को नुकसान पहुंच सकता है।
इसी मुद्दे को लेकर ग्रामीणों ने कुछ दिन पूर्व मौके पर पहुंचकर कार्य का विरोध किया था, जिसके बाद काम रोक दिया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि अब एक बार फिर कार्य प्रारंभ किए जाने की कोशिश की जा रही है। इससे ग्रामीणों की चिंता और नाराजगी दोनों बढ़ गई हैं।
ग्रामीणों ने इस संबंध में संबंधित मुख्य अभियंता को पत्र सौंपकर स्पष्ट किया है कि राखड़ डैम को शुरू करने से पहले ग्रामीणों की समस्याओं और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का समाधान किया जाए। ग्रामीणों ने मांग की है कि प्रशासनिक अधिकारियों, सीएसईबी प्रबंधन और प्रभावित ग्रामीणों की संयुक्त बैठक आयोजित कर पूरे मामले पर चर्चा की जाए और सहमति एवं सुरक्षा के ठोस उपायों के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाए।
पुराने डैम को लेकर ग्रामीणों की सबसे बड़ी चिंता सुरक्षा और प्रदूषण
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली उत्पादन के लिए उद्योग जरूरी है, लेकिन उसके नाम पर ग्रामीणों की सुरक्षा, पर्यावरण और उनके अधिकारों से समझौता नहीं किया जा सकता। पहले राखड़ डैम भर जाने के बाद उसे बंद किया गया और पाइपलाइन तक हटा दी गई। यदि अब उसे फिर उपयोग में लाया जाना है तो प्रबंधन को यह स्पष्ट करना चाहिए कि पुराने डैम की वर्तमान तकनीकी स्थिति क्या है, उसकी क्षमता कितनी है और उसकी सुरक्षा को लेकर क्या परीक्षण किए गए हैं।
ग्रामीणों ने यह भी कहा कि पूर्व में राखड़ डैम के स्पिलवे से खेतों को नुकसान होने की स्थिति सामने आ चुकी है। इसलिए भविष्य में ऐसी घटना दोबारा न हो, इसके लिए पहले से ठोस व्यवस्था जरूरी है। ग्रामीणों ने पुराने नुकसान की क्षतिपूर्ति की मांग भी अपने पत्र में रखी है।
                      ग्रामीणों की 13 प्रमुख मांगें
ग्रामीणों ने अपने मांगपत्र में राखड़ डैम शुरू करने से पहले विभिन्न मांगों को प्रमुखता से रखा है।


1. क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान: ग्रामीणों ने पूर्व वर्षों की क्षतिपूर्ति राशि का भुगतान किए जाने तथा प्रभावित परिवारों को नियमानुसार क्षतिपूर्ति उपलब्ध कराने की मांग की है।
2. वर्ष 1990 में सीएसईबी द्वारा अधिग्रहित भूमि के प्रभावित लोगों को स्थायी रोजगार: ग्रामीणों ने मांग की है कि अधिग्रहित भूमि से प्रभावित बचे हुए लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के बाद ही आगे की प्रक्रिया की जाए।
3. राखड़ डैम में फंसी जमीन का मुआवजा और रोजगार: लोल्लोलता स्थित सीएसईबी राखड़ डैम के भीतर प्रभावित एवं फंसी भूमि का उचित मुआवजा तथा प्रभावित परिवारों को स्थायी रोजगार देने की मांग की गई है।
4. ग्राम पंचायत में दो करोड़ रुपये के विकास कार्य: ग्रामीणों ने लोल्लोलता ग्राम पंचायत में लगभग दो करोड़ रुपये के विकास कार्य कराए जाने की मांग रखी है।
5. बिजली और पानी की सुविधा: ग्राम पंचायत क्षेत्र में पर्याप्त बिजली एवं पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
6. चिकित्सा सुविधा: ग्राम के प्रत्येक परिवार और व्यक्ति को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने तथा स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने की मांग की गई है।
7. पूर्व में हुए खेतों के नुकसान की क्षतिपूर्ति: ग्रामीणों का कहना है कि पूर्व में सीएसईबी राखड़ डैम लोल्लोलता के स्पिलवे से खेतों को नुकसान हुआ था। इस नुकसान की उचित क्षतिपूर्ति किए जाने की मांग की गई है।
8. स्कूलों का विकास: ग्राम पंचायत के प्रत्येक स्कूल को गोद लेकर वहां आवश्यक शैक्षणिक सामग्री, सुविधाएं एवं विकास कार्य कराने की मांग की गई है।
9. खेल मैदान का विकास: लोल्लोलता में युवाओं और बच्चों के लिए बेहतर खेल मैदान विकसित किए जाने की मांग की गई है।
10. बेरोजगारों को रोजगार: ग्राम के बेरोजगार युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने तथा स्थानीय लोगों को प्राथमिकता देने की मांग की गई है।
11. राखड़ डैम के कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी: ग्रामीणों ने मांग की है कि राखड़ डैम से जुड़े कार्य स्थानीय ग्राम समूहों एवं स्थानीय ठेकेदारों के माध्यम से कराए जाएं, ताकि गांव के लोगों को रोजगार और आर्थिक लाभ मिल सके।
12. दुर्घटना की स्थिति में मुआवजा और रोजगार: ग्रामीणों ने मांग रखी है कि यदि राखड़ डैम चालू होने के बाद किसी व्यक्ति की जान-माल को नुकसान होता है तो प्रभावित परिवार को एक करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति तथा परिवार के एक सदस्य को रोजगार देने की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
13. पुराने बकाया भुगतान का निराकरण: ग्रामीणों ने राखड़ डैम में पूर्व में कराए गए मिट्टी फिलिंग आदि कार्यों से संबंधित रोकी गई राशि का भुगतान किए जाने की मांग की है।

ग्रामीणों का कहना है कि पुराने भुगतान और मजदूरों/कार्य से जुड़े बकाया मामलों का निराकरण किए बिना नया कार्य शुरू नहीं किया जाना चाहिए।
      ‘पहले समाधान, फिर शुरू हो काम’ पर अड़े ग्रामीण
ग्रामीणों का कहना है कि वे विकास अथवा बिजली उत्पादन के विरोधी नहीं हैं, लेकिन पुराने राखड़ डैम को दोबारा शुरू करने से पहले उनकी सुरक्षा और समस्याओं का समाधान होना जरूरी है। उनका कहना है कि यदि डैम पहले ही भर जाने के कारण बंद किया जा चुका था और पाइपलाइन भी हटा दी गई थी, तो अब उसे पुनः शुरू करने का आधार ग्रामीणों को बताया जाना चाहिए।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि मौके की तकनीकी जांच कराई जाए और विशेषज्ञों से डैम की सुरक्षा, संरचनात्मक मजबूती, राखड़ भंडारण की क्षमता तथा संभावित पर्यावरणीय प्रभाव का परीक्षण कराया जाए। साथ ही प्रभावित गांवों के लोगों को पूरी जानकारी दी जाए।
ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि प्रशासनिक अधिकारियों, सीएसईबी प्रबंधन और ग्रामीणों के बीच बैठक के माध्यम से ही इस विवाद का समाधान निकाला जाना चाहिए। ग्रामीणों की मांग है कि जब तक उनकी समस्याओं पर चर्चा और उचित निर्णय नहीं हो जाता, तब तक राखड़ डैम को पुनः शुरू करने का कार्य आगे न बढ़ाया जाए।
राखड़ डैम सिर्फ उद्योग का मामला नहीं, गांवों की सुरक्षा से जुड़ा सवाल
लोतलोता के ग्रामीणों का यह विरोध अब केवल एक पुराने राखड़ डैम को दोबारा शुरू करने का मामला नहीं रह गया है। इसके साथ भूमि, रोजगार, मुआवजा, पर्यावरण, स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल और ग्रामीणों की सुरक्षा जैसे कई सवाल जुड़े हुए हैं। ग्रामीणों ने अपने मांगपत्र के माध्यम से इन सभी मुद्दों को एक साथ सामने रखा है।

प्रबंधन का पक्ष: प्रबंधन के अनुसार पुराने राखड़ डैम को पुनः शुरू करने से जुड़े विषय को लेकर ग्रामीणों की मांगों और स्थानीय समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारियों की मध्यस्थता में ग्रामीणों के साथ बैठक आयोजित की जाएगी। बैठक में ग्रामीणों की ओर से रखी जाने वाली आपत्तियों, मांगों और सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर विस्तार से चर्चा कर उनका समाधान तलाशने का प्रयास किया जाएगा। प्रबंधन ने स्पष्ट किया कि ग्रामीणों के पक्ष को सुनने और प्रशासन के समन्वय से आगे की प्रक्रिया तय करने के बाद ही आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
अब नजर प्रशासन और सीएसईबी प्रबंधन की प्रस्तावित चर्चा पर है। यदि संबंधित अधिकारी ग्रामीणों के साथ बैठक कर तकनीकी तथ्यों और उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार करते हैं तो लंबे समय से चले आ रहे विवाद का समाधान निकाला जा सकता है। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षा और अधिकारों की अनदेखी कर किसी भी कीमत पर पुराने राखड़ डैम को पुनः शुरू करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।


प्रदीप मिश्रा 

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