एक पहिया फंसा, पूरी व्यवस्था हिली! अंबिकापुर की सड़क ने पूछे कई सवाल
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अंबिकापुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संतोष यादव
जनता रोज गड्ढों से गुजरती रही, संगठन महामंत्री की कार फंसी तो अगले दिन सड़क पर शुरू हुआ काम

अंबिकापुर। सरगुजा में बारिश के साथ सड़कों की बदहाली एक बार फिर सामने है। सीतापुर क्षेत्र के राष्ट्रीय राजमार्ग पर जगह-जगह बने गड्ढों से आम लोग लंबे समय से परेशान हैं। इसी बीच 19 अगस्त को भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय की कार इन्हीं गड्ढों में फंस गई। वाहन निकालने के लिए मैकेनिक बुलाना पड़ा और करीब दो घंटे की मशक्कत करनी पड़ी।
कार किसी तरह निकली, लेकिन इसके बाद सड़क की बदहाली का मुद्दा सीधे जिम्मेदारों तक पहुंच गया। अंबिकापुर पहुंचने के बाद पवन साय ने प्रभारी मंत्री ओपी चौधरी और राष्ट्रीय राजमार्ग के अधिकारियों से सड़क की स्थिति को लेकर नाराजगी जताई।

फटकार के बाद सड़क पर दिखी रफ्तार
घटनाक्रम के अगले दिन राष्ट्रीय राजमार्ग पर गड्ढे भरने और मरम्मत का काम शुरू कर दिया गया। अब यही बात लोगों के बीच चर्चा का विषय है। बताया गया कि कुछ दिन पहले जर्जर सड़क का वीडियो सांसद चिंतामणि महाराज को भी भेजा गया था। उनके निर्देश पर कलेक्टर ने अधिकारियों के साथ सड़क का निरीक्षण भी किया था, लेकिन सुधार कार्य शुरू नहीं हुआ था।
अब सवाल उठ रहा है, जब जनता की परेशानी पहले से सामने थी, तो कार्रवाई तब क्यों नहीं हुई?

‘सब नेता ठेकेदार हैं तो श्रमदान क्यों नहीं?’
सड़क की स्थिति को लेकर पवन साय ने नेताओं और जिम्मेदार लोगों पर भी नाराजगी जताई। उन्होंने कथित रूप से सवाल किया कि यदि सब नेता ठेकेदार हैं तो श्रमदान क्यों नहीं करते।
यह टिप्पणी अब इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि सड़क की बदहाली केवल सीतापुर तक सीमित नहीं बताई जा रही। भारत माता चौक से दरिमा, एमजी रोड और बनारस मार्ग सहित कई सड़कों की स्थिति बारिश में खराब हो गई है।

गड्ढा छोटा, सवाल बड़ा
मंत्री, अधिकारी और जनप्रतिनिधि भी इन्हीं सड़कों से गुजरते हैं। फिर जनता की परेशानी पहले क्यों नहीं दिखाई दी?
क्या सड़क की मरम्मत के लिए किसी बड़े व्यक्ति की गाड़ी का फंसना जरूरी है?
यही इस पूरे मामले का सबसे बड़ा सवाल है। पवन साय की नाराजगी के बाद सड़क सुधरना राहत की बात है, लेकिन असली परीक्षा यह होगी कि आगे आम नागरिक की शिकायत पर भी इतनी ही तेजी से कार्रवाई होती है या नहीं।
क्योंकि जनता को अपनी परेशानी साबित करने के लिए किसी बड़े पहिए के गड्ढे में फंसने का इंतजार नहीं होना चाहिए।

गड्ढा पहले भी था, परेशानी पहले भी थी, शिकायतें पहले भी थीं… लेकिन सड़क तब जागी, जब संगठन का पहिया उसमें अटक गया।
प्रदीप मिश्रा
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