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एक क्लिक से पहले रुकें, सोचें और जांचें, 1200 विद्यार्थियों को साइबर ठगी से बचाव का पाठ

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर

साइबर जागृति अभियान में एपीके फाइल, डिजिटल अरेस्ट, ओटीपी और यूपीआई ठगी से बचने की दी गई जानकारी

रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस के साइबर जागृति अभियान के तहत रायपुर कमिश्नरेट सेंट्रल जोन के विभिन्न थाना क्षेत्रों में स्कूल, महाविद्यालय और शैक्षणिक संस्थानों में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। अभियान के दौरान करीब 1200 विद्यार्थियों को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार, साइबर स्वच्छता और ऑनलाइन ठगी से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।
सिविल लाइन थाना क्षेत्र के सालेम इंग्लिश मीडियम स्कूल, तेलीबांधा क्षेत्र के जे.आर. नायडू उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रविग्राम, देवेंद्र नगर के बालाजी स्कूल, कोतवाली एवं गोलबाजार क्षेत्र के शासकीय पोस्ट मैट्रिक बालिका छात्रावास, मौदहापारा स्थित शासकीय फिजियोथेरेपी महाविद्यालय तथा गंज थाना क्षेत्र के विवेक कॉन्वेंट उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए।


‘.APK’ दिखे तो सावधान, एक क्लिक पड़ सकता है भारी
पुलिस टीम ने विद्यार्थियों को विशेष रूप से एपीके फाइल ठगी के संबंध में सचेत किया। बताया गया कि साइबर ठग सरकारी योजना, नौकरी, त्योहार, शुभकामना संदेश, निमंत्रण, बैंक संबंधी जानकारी या केवाईसी के नाम पर व्हाट्सऐप के माध्यम से ऐसी फाइल भेज सकते हैं, जो देखने में फोटो, कार्ड या दस्तावेज जैसी लगती है, लेकिन उसके अंत में “.apk” लिखा हो सकता है।
पुलिस ने समझाइश दी कि किसी भी अनजान एपीके फाइल को खोलने या स्थापित करने से पहले उसका पूरा नाम और विस्तार जरूर जांचें। परिचित व्यक्ति के व्हाट्सऐप से आई संदिग्ध फाइल को भी बिना पुष्टि के नहीं खोलना चाहिए, क्योंकि उसका खाता भी साइबर ठगों के कब्जे में हो सकता है।


  ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर डराने वालों से रहें सावधान
कार्यक्रम में डिजिटल अरेस्ट ठगी को लेकर भी विद्यार्थियों को जागरूक किया गया। पुलिस या जांच एजेंसी का अधिकारी बनकर वीडियो कॉल करने, गिरफ्तारी का डर दिखाने, पैसे हस्तांतरित कराने अथवा व्यक्तिगत जानकारी मांगने वाले ठगों से घबराने के बजाय तत्काल कॉल काटकर संबंधित विभाग से स्वतंत्र रूप से सत्यापन करने की सलाह दी गई।
इसके साथ ही ओटीपी, यूपीआई पिन और बैंक संबंधी जानकारी किसी से साझा नहीं करने, अनजान लिंक पर क्लिक न करने, व्हाट्सऐप में दो-स्तरीय सुरक्षा सक्रिय रखने तथा सामाजिक माध्यमों की गोपनीयता सेटिंग मजबूत रखने की जानकारी दी गई। ऑनलाइन खेलों में आयु सीमा और अभिभावकीय नियंत्रण के महत्व पर भी चर्चा की गई।


पुलिस ने विद्यार्थियों को “STOP • THINK • ACT” का संदेश देते हुए कहा,रुकिए, सोचिए, जांचिए और फिर कार्रवाई कीजिए। थोड़ी सी सतर्कता साइबर ठगी से होने वाले बड़े नुकसान से बचा सकती है।

प्रदीप मिश्रा
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