नमस्कार 🙏 हमारे न्यूज पोर्टल - मे आपका स्वागत हैं ,यहाँ आपको हमेशा ताजा खबरों से रूबरू कराया जाएगा , खबर ओर विज्ञापन के लिए संपर्क करे +91 7647981711 ,हमारे यूट्यूब चैनल को सबस्क्राइब करें, साथ मे हमारे फेसबुक को लाइक जरूर करें , तुलसी का समन्वय 21वीं सदी के भारत की आवश्यकता : प्रो. नंदिनी साहू – Anjor Chhattisgarh News

Anjor Chhattisgarh News

सच की तह तक

तुलसी का समन्वय 21वीं सदी के भारत की आवश्यकता : प्रो. नंदिनी साहू

😊 कृपया इस न्यूज को शेयर करें😊

हावड़ा, पश्चिम बंगाल

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- विनोद यादव

हिंदी विश्वविद्यालय में गोस्वामी तुलसीदास जयंती पर विशेष व्याख्यान, वक्ताओं ने तुलसी साहित्य में समन्वय और सामाजिक एकता के महत्व को रेखांकित किया

हावड़ा ACGN:- हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल में गोस्वामी तुलसीदास जयंती के अवसर पर विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में तुलसीदास के साहित्य, उनकी समन्वयवादी दृष्टि और समाज को एक सूत्र में जोड़ने में उनके योगदान पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम की अध्यक्षता हिंदी विश्वविद्यालय की माननीया कुलपति प्रो. नंदिनी साहू ने की।

प्रो. नंदिनी साहू


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. नंदिनी साहू ने कहा कि गोस्वामी तुलसीदास ने लोक और शास्त्र, गृहस्थ और वैराग्य, भक्ति और ज्ञान, निर्गुण और सगुण के साथ-साथ भाषा और संस्कृति के बीच जिस प्रकार का समन्वय स्थापित किया, वह अपने आप में अत्यंत महत्वपूर्ण है। तुलसीदास का साहित्य समाज को जोड़ने और लोगों को एक साझा सांस्कृतिक चेतना से जोड़ने का कार्य करता है।

डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी


कार्यक्रम की विशिष्ट वक्ता गोखले मेमोरियल गर्ल्स कॉलेज की सह-प्राध्यापिका डॉ. रेशमी पांडा मुखर्जी ने अपने विशेष व्याख्यान में तुलसीदास के साहित्यिक और सामाजिक योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि 16वीं शताब्दी में भारतीय समाज जाति, धर्म, संप्रदाय और भाषा के आधार पर अनेक स्तरों पर विभाजित था। ऐसे समय में तुलसीदास ने अपने साहित्य, विशेष रूप से ‘रामचरितमानस’ के माध्यम से समाज को जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया। उनके साहित्य की मूल चेतना समन्वय की रही है।

डॉ. रेखा कुमारी त्रिपाठी

कार्यक्रम का कुशल संचालन डॉ. रेखा कुमारी त्रिपाठी ने किया। उन्होंने तुलसीदास की प्रसिद्ध पंक्ति “परहित सरिस धर्म नहिं भाई” का उल्लेख करते हुए कहा कि तुलसीदास का संपूर्ण साहित्य परहित और समन्वय की भावना पर आधारित है। उन्होंने कहा कि तुलसी की विचारधारा आज भी उतनी ही प्रासंगिक है, जितनी उनके समय में थी।


डॉ. त्रिपाठी ने कहा कि आज भारत विश्वगुरु बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में तुलसीदास का समन्वयवादी चिंतन हमें यह संदेश देता है कि समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर ही वास्तविक प्रगति संभव है। तुलसी का समन्वय केवल अतीत की विरासत नहीं, बल्कि 21वीं सदी के भारत की महत्वपूर्ण आवश्यकता है।
कार्यक्रम के दौरान तुलसीदास के साहित्य की सामाजिक उपयोगिता, मानवीय मूल्यों और वर्तमान समय में उनकी प्रासंगिकता पर विचार साझा किए गए। अंत में धन्यवाद ज्ञापन के साथ विशेष व्याख्यान कार्यक्रम का समापन हुआ।

प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर और जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़।
अपने क्षेत्र के छोटे-बड़े समाचार, घटना, दुर्घटना, भ्रष्टाचार एवं अपनी संस्था के विज्ञापन प्रसारण हेतु संपर्क करें: 7647981711, 9303948009

Whatsapp बटन दबा कर इस न्यूज को शेयर जरूर करें 

Advertising Space


स्वतंत्र और सच्ची पत्रकारिता के लिए ज़रूरी है कि वो कॉरपोरेट और राजनैतिक नियंत्रण से मुक्त हो। ऐसा तभी संभव है जब जनता आगे आए और सहयोग करे.

Donate Now