तहसील की सुस्ती, जमीन विवादों में बढ़ती खूनी हिंसा
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बलांगीर, ओड़िशा
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- ओड़िशा ब्यूरो स्वामी विजयानंद जी महाराज
जमीन का झगड़ा या प्रशासन की नाकामी? समय पर सीमांकन और रिकॉर्ड सत्यापन नहीं होने से बढ़ रहा विवाद
बलांगीर ACGN:- बलांगीर जिले और शहर सहित आसपास के क्षेत्रों में जमीन की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के साथ भूमि विवादों के मामले भी चिंता बढ़ा रहे हैं। स्थानीय स्तर पर सामने आ रही शिकायतों के अनुसार कई मामलों में जमीन के सीमांकन, कब्जे, नाप-जोख और दस्तावेजों को लेकर विवाद लंबे समय तक चलते रहते हैं। जब इन विवादों का समय पर प्रशासनिक स्तर पर समाधान नहीं होता, तो कई बार मामूली विवाद भी तनाव और हिंसा का रूप लेने लगते हैं।
सबसे गंभीर सवाल यह है कि जब जमीन का विवाद तहसील कार्यालय में समाधान की प्रक्रिया से आगे बढ़कर अस्पताल और श्मशान तक पहुंचने लगे, तब केवल विवादित जमीन पर सवाल नहीं उठता, बल्कि राजस्व व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े होते हैं। स्थानीय लोगों के बीच यह चर्चा भी है कि प्रभावशाली लोगों के हस्तक्षेप से कुछ मामलों में विवाद और अधिक जटिल हो जाते हैं। हालांकि ऐसे आरोपों की निष्पक्ष जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
बलांगीर शहर के कुछ प्रमुख व्यापारियों और कथित जमीन कारोबारियों पर भी निजी जमीनों पर जबरन कब्जे या जमीन हड़पने के प्रयास से जुड़े आरोप समय-समय पर चर्चा में रहे हैं। इन आरोपों की वास्तविकता संबंधित दस्तावेजों और प्रशासनिक जांच के बाद ही सामने आ सकती है, लेकिन लगातार उठती शिकायतों ने भूमि विवादों के निपटारे की व्यवस्था को लेकर सवाल जरूर खड़े किए हैं।
बलांगीर के पुइंतला थाना क्षेत्र के खमारमुंडा में चर्चित गीतांजलि सरंगी हत्याकांड और पटनागढ़ क्षेत्र में सामने आई खूनी झड़प जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए स्थानीय स्तर पर यह सवाल उठाया जा रहा है कि जमीन से जुड़े विवादों को शुरुआती स्तर पर गंभीरता से क्यों नहीं सुलझाया जाता। सीमांकन, कब्जे और नाप-जोख जैसे मामलों में देरी विवाद को बढ़ाने का कारण बन सकती है। हालांकि किसी घटना को सीधे राजस्व विवाद से जोड़ने से पहले संबंधित जांच और आधिकारिक तथ्यों को देखना जरूरी है।
स्थानीय लोगों का सबसे बड़ा सवाल यह है कि पहली शिकायत मिलने के बाद समयबद्ध तरीके से सरकारी सीमांकन, दस्तावेजों का सत्यापन और वास्तविक स्थिति की जांच क्यों नहीं हो पाती। यदि विवादित जमीन की स्थिति, स्वामित्व और सीमाओं को लेकर समय रहते स्पष्ट निर्णय हो जाए, तो कई विवादों को हिंसक टकराव में बदलने से रोका जा सकता है।
राजस्व विभाग की जिम्मेदारी केवल फाइलों का निपटारा करने तक सीमित नहीं है। जमीन से जुड़े विवादों का समय पर और निष्पक्ष समाधान कर संभावित कानून-व्यवस्था की स्थिति को रोकना भी प्रशासनिक व्यवस्था की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। इसके लिए पारदर्शी प्रक्रिया, समयबद्ध सीमांकन, रिकॉर्ड का सही सत्यापन और शिकायतों पर जवाबदेही के साथ कार्रवाई जरूरी है।
बलांगीर में बढ़ते भूमि विवादों के बीच अब लोगों को केवल आश्वासन नहीं, बल्कि ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था की जरूरत है जहां किसी भी नागरिक को अपनी जमीन के अधिकार के लिए वर्षों तक कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। समय पर सीमांकन और निष्पक्ष रिकॉर्ड सत्यापन से न केवल विवादों का समाधान हो सकता है, बल्कि जमीन से जुड़े तनाव को हिंसक रूप लेने से भी रोका जा सकता है। अब निगाहें इस बात पर हैं कि प्रशासन इन बढ़ती शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेता है और राजस्व विवादों के निपटारे के लिए क्या ठोस कदम उठाता है।
प्रदीप मिश्रा
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