साइबर ठगी से बचाव का पाठ पढ़ रहे विद्यार्थी, नॉर्थ जोन में 800 से अधिक छात्र-छात्राओं को किया जागरूक
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय रायपुर
खम्हारडीह, खमतराई, गुढ़ियारी और उरला के शैक्षणिक संस्थानों में पहुंची पुलिस, संदिग्ध लिंक, एपीके फाइल और ऑनलाइन ठगी से बचने की दी समझाइश
रायपुर ACGN:- मोबाइल और इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल के साथ साइबर अपराध भी लगातार नए तरीकों के साथ सामने आ रहे हैं। ऐसे में बच्चों और युवाओं को साइबर अपराध से बचाने तथा उनके माध्यम से परिवारों तक जागरूकता का संदेश पहुंचाने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ पुलिस का साइबर जागृति अभियान रायपुर में व्यापक स्तर पर चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत पुलिस कमिश्नरेट रायपुर के नॉर्थ जोन में विभिन्न शैक्षणिक संस्थानों में साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर करीब 800 से अधिक छात्र-छात्राओं और स्कूल स्टाफ को साइबर अपराधों से बचाव के उपाय बताए गए।

छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक चलाए जा रहे विशेष साइबर जागृति अभियान के अंतर्गत थाना खम्हारडीह, खमतराई, गुढ़ियारी और उरला क्षेत्र के विभिन्न शासकीय एवं निजी विद्यालयों में पुलिस टीमों ने विद्यार्थियों और शिक्षकों से सीधे संवाद किया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल साइबर अपराध की जानकारी देना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों को डिजिटल दुनिया में सतर्क और जिम्मेदार नागरिक बनाना भी रहा।

पुलिस आयुक्त डॉ. संजीव शुक्ला के निर्देशन एवं मार्गदर्शन तथा अतिरिक्त पुलिस आयुक्त श्री अमित तुकाराम कांबले, पुलिस उपायुक्त नॉर्थ जोन श्रीमती दीपमाला कश्यप और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त नॉर्थ जोन श्री आदित्य पांडे के मार्गदर्शन में आयोजित इन कार्यक्रमों में विद्यार्थियों और स्कूल स्टाफ ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की।

थाना खम्हारडीह क्षेत्र के शासकीय स्कूल खम्हारडीह, थाना खमतराई क्षेत्र के हायर सेकेंडरी स्कूल खमतराई एवं डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी शासकीय उच्चतर माध्यमिक कन्या विद्यालय डब्ल्यूआरएस, थाना गुढ़ियारी क्षेत्र के महावीर हायर सेकेंडरी स्कूल तथा थाना उरला क्षेत्र के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गुमां में साइबर अपराध और ऑनलाइन ठगी के अलग-अलग तरीकों की जानकारी दी गई।

पुलिस ने विद्यार्थियों को समझाया कि अनजान नंबरों से आने वाले संदिग्ध संदेशों और लिंक पर बिना जांचे क्लिक करना भारी पड़ सकता है। किसी भी अनजान एपीके फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल नहीं करना चाहिए और ऐसी संदिग्ध फाइल या लिंक को दूसरों के साथ साझा करने से भी बचना चाहिए। विद्यार्थियों को यह भी बताया गया कि बैंकिंग या डिजिटल लेन-देन से जुड़ी गोपनीय जानकारी किसी अनजान व्यक्ति के साथ साझा न करें।

कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को ओटीपी, पिन, सीवीवी और अन्य गोपनीय जानकारी किसी भी व्यक्ति के साथ साझा नहीं करने की समझाइश दी गई। इसके साथ ही फर्जी केवाईसी, डिजिटल अरेस्ट, ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी, सोशल मीडिया के माध्यम से होने वाले अपराध और अन्य साइबर धोखाधड़ी के तरीकों के बारे में भी जागरूक किया गया।

पुलिस ने विद्यार्थियों से कहा कि साइबर सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि प्रत्येक मोबाइल और इंटरनेट उपयोगकर्ता की भी जिम्मेदारी है। एक छोटी सी लापरवाही से आर्थिक नुकसान के साथ निजी जानकारी भी अपराधियों के हाथ लग सकती है। इसलिए किसी भी ऑनलाइन गतिविधि में जल्दबाजी के बजाय सावधानी जरूरी है।

कार्यक्रम में विद्यार्थियों को अपने माता-पिता, भाई-बहन और अन्य परिजनों को भी साइबर अपराधों के प्रति जागरूक करने के लिए प्रेरित किया गया। पुलिस का प्रयास है कि स्कूलों से शुरू हुआ साइबर सुरक्षा का संदेश विद्यार्थियों के माध्यम से घर-घर और समाज के प्रत्येक वर्ग तक पहुंचे।

इस दौरान विद्यार्थियों को पुलिस कमिश्नरेट रायपुर के सामाजिक माध्यमों से जुड़ने तथा साइबर जागरूकता अभियान के अंतर्गत दिए गए क्यूआर कोड को स्कैन कर अभियान का हिस्सा बनने की जानकारी भी दी गई। ‘जागरूकता की एक सेल्फी’ के माध्यम से विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा का संदेश अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
नॉर्थ जोन पुलिस ने ‘संवाद से समाधान’ की भावना के अनुरूप विद्यार्थियों और शिक्षकों से सीधे संवाद किया। साइबर अपराध से जुड़े सवालों और जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उन्हें व्यवहारिक सावधानियों की जानकारी दी गई। पुलिस ने विद्यार्थियों से अपील की कि वे स्वयं सतर्क रहें और अपने आसपास के लोगों को भी साइबर ठगी के नए तरीकों के बारे में बताते रहें।
पुलिस ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर ठगी हो जाती है तो घबराने के बजाय तत्काल कार्रवाई करना जरूरी है। ठगी की स्थिति में राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर तुरंत संपर्क कर शिकायत दर्ज कराने की जानकारी विद्यार्थियों और शिक्षकों को दी गई।

साइबर जागृति अभियान के माध्यम से पुलिस और विद्यार्थियों के बीच सीधा संवाद आने वाले समय में डिजिटल सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। जागरूक नागरिक ही साइबर अपराधियों की सबसे बड़ी चुनौती बन सकते हैं और इसी सोच के साथ नॉर्थ जोन पुलिस का यह अभियान लगातार आगे बढ़ रहा है।

प्रदीप मिश्रा
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