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सांसद आदर्श ग्राम तिलकेजा में पीएम आवास जांच के बीच नया रहस्य! शिकायत हुई, जांच दल पहुंचा, लेकिन सभी हितग्राही नहीं पहुंचे, कहीं शिकायत के पीछे कोई और कहानी तो नहीं?

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़

सांसद आदर्श ग्राम तिलकेजा में प्रधानमंत्री आवास से जुड़ी शिकायत की जांच करने पहुंचा दल, सरपंच-सचिव व शिकायतकर्ता सहित 7-8 लोग मौजूद; शिकायत की प्रति और संबंधित अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए जाने पर उठे सवाल, वर्तमान महिला सरपंच तेरस कंवर ने प्रस्तुत किया लिखित जवाब

कोरबा। सांसद आदर्श ग्राम के रूप में पहचान रखने वाली ग्राम पंचायत तिलकेजा में पिछले कुछ दिनों से शिकायतों और आरोप-प्रत्यारोप का दौर चर्चा में है। इसी कड़ी में प्रधानमंत्री आवास योजना से जुड़ी शिकायत की जांच के लिए 10 अगस्त 2026 को जांच दल ग्राम तिलकेजा पहुंचा, लेकिन जांच के दौरान सभी संबंधित हितग्राही उपस्थित नहीं हो सके। बताया गया कि मौके पर सरपंच, सचिव, शिकायतकर्ता और करीब 7 से 8 हितग्राही और अन्य ग्रामीण मौजूद रहे।

अब सवाल यह उठ रहा है कि जब शिकायत के आधार पर जांच होनी थी, तो शिकायत में जिन हितग्राहियों के नाम शामिल हैं, उनमें से सभी जांच के समय मौजूद क्यों नहीं थे? क्या उन्हें सूचना नहीं मिली, या फिर वे स्वयं नहीं पहुंचे? यही सवाल अब पूरे मामले को और रहस्यमय बना रहा है।

इस दौरान वर्तमान महिला सरपंच तेरस कंवर, सचिव नविता दुबे , पूर्व सरपंच कुल सिंह कंवर, जनपद सदस्य किशन कोसले, शिकायतकर्ता पूर्व जनपद सदस्य शकुंतला कैवर्त सहित अन्य ग्रामीण उपस्थित रहे। वर्तमान सरपंच तेरस कंवर तथा शिकायतकर्ता द्वारा अपना लिखित जवाब जांच दल के समक्ष प्रस्तुत किया गया, जबकि कुछ अन्य संबंधित लोगों के लिखित जवाब अभी आना बाकी बताए जा रहे हैं।

सबसे महत्वपूर्ण बात वर्तमान सरपंच की ओर से सामने आई है। उनका कहना है कि जनपद पंचायत की ओर से जांच के लिए सरपंच और सचिव को समय निर्धारित कर पत्र तो भेजा गया, लेकिन शिकायत की प्रति उपलब्ध नहीं कराई गई। इतना ही नहीं, जिन हितग्राहियों के संबंध में शिकायत की गई है, उनके नामों की प्रमाणित प्रति तथा संबंधित राशि के आहरण अथवा भुगतान का पूरा ब्यौरा भी पंचायत को जांच से पहले उपलब्ध नहीं कराया गया।

ऐसे में सवाल यह है कि जिस शिकायत की जांच हो रही है, उसके पूरे तथ्यों और दस्तावेजों की जानकारी संबंधित पंचायत को उपलब्ध कराए बिना जांच कितनी स्पष्ट और प्रभावी हो पाएगी?

प्रधानमंत्री आवास योजना में ग्राम पंचायत की भूमिका मुख्य रूप से पात्र हितग्राहियों के चयन और ग्राम सभा के प्रस्ताव से जुड़ी होती है, जबकि योजना की आगे की प्रक्रिया और हितग्राही के खाते में राशि का भुगतान शासन की निर्धारित व्यवस्था के अनुसार संबंधित स्तर से किया जाता है। ऐसे में यदि शिकायत में यह आरोप है कि किसी व्यक्ति के नाम के स्थान पर किसी दूसरे व्यक्ति के खाते में राशि पहुंची, तो इसकी तह तक जाने के लिए केवल पंचायत के दस्तावेज ही नहीं, बल्कि जनपद स्तर से लेकर भुगतान संबंधी पूरे अभिलेखों की जांच भी आवश्यक होगी।

यही वजह है कि अब निगाहें केवल ग्राम पंचायत तिलकेजा पर नहीं, बल्कि जनपद पंचायत स्तर की पूरी प्रक्रिया पर भी टिक गई हैं। यदि किसी हितग्राही के नाम, पिता के नाम अथवा अन्य विवरण में सामान्य त्रुटि हुई हो तो उसे दस्तावेजों से स्पष्ट किया जा सकता है, लेकिन यदि शिकायत में किसी अन्य व्यक्ति के नाम से राशि जाने जैसी बात सामने आती है तो यह गंभीर विषय होगा और इसकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

स्थानीय स्तर पर पिछले कुछ दिनों से शिकायतों का सिलसिला और आपसी आरोप-प्रत्यारोप भी चर्चा में हैं। ऐसे में यह सवाल भी उठना स्वाभाविक है कि कहीं पूरा विवाद स्थानीय राजनीति, व्यक्तिगत रंजिश अथवा आपसी खींचतान का परिणाम तो नहीं? क्या शिकायतों के माध्यम से किसी एक पक्ष को निशाना बनाकर पूरी पंचायत की छवि प्रभावित तो नहीं की जा रही? इसका जवाब जांच के दस्तावेज और तथ्य ही दे सकते हैं।

लेकिन यदि जांच में किसी स्तर पर कूटरचना, मिलीभगत अथवा जानबूझकर गलत तरीके से राशि हस्तांतरण की पुष्टि होती है तो दोषी चाहे पंचायत स्तर का हो या जनपद स्तर का, उसके विरुद्ध तत्काल नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए। वहीं यदि आरोप तथ्यहीन पाए जाते हैं तो शिकायत के पीछे की वास्तविक मंशा भी सामने आनी चाहिए।

सांसद आदर्श ग्राम तिलकेजा की छवि केवल एक पंचायत की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की पहचान से जुड़ी है। इसलिए आरोपों को दबाने के बजाय पूरे मामले की पारदर्शी जांच कर उसे सार्वजनिक किया जाना ही सबसे उचित रास्ता है। आज की जांच में सभी संबंधित हितग्राहियों की अनुपस्थिति और शिकायत से जुड़े दस्तावेज पंचायत को पूरी तरह उपलब्ध नहीं होने की बात ने कई सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं। अब देखना होगा कि आगामी जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं और जिम्मेदारी आखिर किसकी तय होती है।

तिलकेजा की इस जांच में सबसे बड़ा सवाल यही है, शिकायत हुई, जांच दल पहुंचा, लेकिन शिकायत के सभी हितग्राही सामने क्यों नहीं आए और पंचायत को शिकायत व भुगतान संबंधी पूरा ब्यौरा पहले से क्यों नहीं मिला? इन सवालों के जवाब यदि दस्तावेजों के साथ सामने आते हैं, तभी इस पूरे मामले से उठ रहे संदेह का पर्दा हट सकेगा।

आगे की कार्यवाही और जांच की जानकारी के लिए हमारे साथ बने रहे

प्रदीप मिश्रा
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