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घोर लापरवाही: बैंक खाते की जानकारी मांगने में तत्परता, महीनों से वेतन के इंतजार में स्वास्थ्य केंद्रों के कर्मचारी

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कोरबा, छत्तीसगढ़

By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- कोरबा

कटघोरा स्वास्थ्य केंद्र के स्मरण पत्र से उठे सवाल, सफाई कर्मी, चौकीदार और आयुष्मान ऑपरेटरों के लंबित मानदेय पर जिम्मेदारी तय करने की मांग

कोरबा ACGN:- स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कटघोरा द्वारा 5 अगस्त 2026 को जारी किए गए स्मरण पत्र में दीपका, रंजना, चाकाबूड़ा, भिलाई बाजार, छुरी, मोगरा सहित विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के प्रभारी चिकित्सा अधिकारियों से साफ-सफाई मद में कार्यरत कर्मचारियों के बैंक खाते और आवश्यक विवरण तत्काल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं। पत्र में पूर्व में जारी निर्देशों के पालन नहीं होने का उल्लेख करते हुए जानकारी शीघ्र उपलब्ध कराने की बात कही गई है।


लेकिन इसी प्रशासनिक प्रक्रिया के बीच सबसे बड़ा सवाल यह सामने आ रहा है कि जिन कर्मचारियों के बैंक खाते की जानकारी उनके भुगतान के लिए मांगी जा रही है, जब वही कर्मचारी पिछले कई महीनों से अपने मानदेय का इंतजार कर रहे हैं, तो आखिर उनके भुगतान में इतनी देरी क्यों हो रही है?
बताया जा रहा है कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जे.डी.एस. के अंतर्गत कार्यरत सफाई कर्मचारी, चौकीदार और आयुष्मान योजना से जुड़े ऑपरेटर लगातार अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इन कर्मचारियों का काम स्वास्थ्य केंद्रों की रोजमर्रा की व्यवस्था से सीधे जुड़ा हुआ है। अस्पताल परिसर की साफ-सफाई से लेकर सुरक्षा और मरीजों को योजनाओं से संबंधित आवश्यक सहयोग देने तक इनकी महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। इसके बावजूद यदि इन्हें समय पर मानदेय नहीं मिलता तो यह निश्चित रूप से गंभीर प्रशासनिक चिंता का विषय है।
कटघोरा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले विभिन्न प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से आसपास के अनेक गांवों के लोग स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेते हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित इन स्वास्थ्य संस्थानों में सीमित संसाधनों के बीच काम करने वाले कर्मचारियों पर बड़ी जिम्मेदारी रहती है। सुबह से लेकर देर तक अस्पताल परिसर को व्यवस्थित रखने में सफाई कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है। इसी तरह चौकीदार सुरक्षा व्यवस्था में अपनी जिम्मेदारी निभाते हैं, जबकि आयुष्मान ऑपरेटर मरीजों को योजना संबंधी प्रक्रिया में सहयोग करते हैं।


ऐसे में सवाल यह उठता है कि यदि विभागीय अधिकारियों को कर्मचारियों के बैंक खाते और अन्य जानकारी की आवश्यकता थी तो इसे समय रहते संकलित क्यों नहीं किया गया? यदि किसी कर्मचारी का बैंक विवरण उपलब्ध नहीं था तो संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों से समय पर जानकारी क्यों नहीं ली गई? और सबसे महत्वपूर्ण बात यह कि जिन कर्मचारियों ने महीनों तक अपनी सेवाएं दी हैं, उनके मानदेय भुगतान में देरी के लिए आखिर जिम्मेदार कौन है?
कम मानदेय पर काम करने वाले इन कर्मचारियों के लिए कई महीनों तक भुगतान लंबित रहना सामान्य बात नहीं है। इनके परिवारों का घरेलू खर्च, बच्चों की पढ़ाई, राशन और रोजमर्रा की जरूरतें इसी आय पर निर्भर रहती हैं। ऐसे में मानदेय की देरी सीधे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को प्रभावित करती है।
एक ओर स्वास्थ्य विभाग समय-समय पर स्वास्थ्य संस्थानों की साफ-सफाई, मरीजों को बेहतर सुविधा और अस्पतालों की व्यवस्था को लेकर निर्देश जारी करता है, वहीं दूसरी ओर उन्हीं व्यवस्थाओं को जमीनी स्तर पर संभालने वाले कर्मचारियों के भुगतान में देरी का मामला सामने आना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है।


स्वास्थ्य व्यवस्था केवल चिकित्सकों और नियमित कर्मचारियों के भरोसे नहीं चलती। इसके पीछे बड़ी संख्या में ऐसे कर्मचारी काम करते हैं, जो भले ही कम मानदेय प्राप्त करते हों, लेकिन अस्पताल की व्यवस्था में उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। अस्पताल परिसर की स्वच्छता और सुरक्षा व्यवस्था बिगड़ने का सीधा असर मरीजों और उनके परिजनों पर पड़ सकता है।


यह भी ध्यान देने वाली बात है कि इन कर्मचारियों को नियमित कर्मचारियों की तुलना में काफी कम मानदेय प्राप्त होता है। कम आय के बावजूद उनसे नियमित रूप से कार्य करने और अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने की अपेक्षा की जाती है। ऐसे में प्रशासन की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाती है कि उनका भुगतान समय पर हो और उन्हें अनावश्यक रूप से आर्थिक परेशानी का सामना न करना पड़े।
विभागीय स्तर पर बैंक खाते की जानकारी मांगना आवश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया हो सकती है, लेकिन केवल कागजी प्रक्रिया पूरी करना ही पर्याप्त नहीं है। जरूरत इस बात की है कि बैंक विवरण प्राप्त करने के बाद लंबित मानदेय भुगतान की पूरी प्रक्रिया को समयबद्ध किया जाए। संबंधित अधिकारियों को यह भी स्पष्ट करना चाहिए कि किन कर्मचारियों का कितने समय से भुगतान लंबित है और भुगतान में देरी का वास्तविक कारण क्या है।
यदि किसी कर्मचारी का बैंक खाता, दस्तावेज या अन्य जानकारी भुगतान में बाधा बन रही है तो उसे तत्काल दूर किया जाना चाहिए। वहीं यदि किसी अन्य प्रशासनिक कारण से भुगतान रुका है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। आखिरकार कर्मचारी अपनी ओर से काम कर चुके हैं तो उनके पारिश्रमिक के भुगतान में अनिश्चितकाल तक देरी उचित नहीं मानी जा सकती।
इस पूरे मामले में यह भी जरूरी है कि स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कार्यरत इन कर्मचारियों की वास्तविक स्थिति की समीक्षा करें। केवल कार्यालयीन पत्राचार और स्मरण पत्र जारी करने के बजाय जमीनी स्तर पर यह देखा जाना चाहिए कि कर्मचारी किन परिस्थितियों में काम कर रहे हैं और उन्हें समय पर उनका मानदेय क्यों नहीं मिल पा रहा है।
स्वास्थ्य केंद्रों में काम करने वाले ये कर्मचारी व्यवस्था की ऐसी कड़ी हैं जो आमतौर पर सुर्खियों में नहीं आती। अस्पताल की सफाई हो, सुरक्षा व्यवस्था हो या मरीजों को योजनाओं से जोड़ने का काम, इनकी मौजूदगी स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान देती है। इसलिए इनके श्रम और अधिकारों को नजरअंदाज करना उचित नहीं होगा।
अब सवाल सिर्फ बैंक खाते की जानकारी जुटाने का नहीं है। असली सवाल यह है कि महीनों से लंबित मानदेय आखिर कब मिलेगा और इसके लिए जिम्मेदारी किसकी तय होगी?
प्रशासन यदि कर्मचारियों से समय पर काम और पूरी जवाबदेही की अपेक्षा करता है तो कर्मचारियों को भी समय पर उनका मानदेय मिलना चाहिए। व्यवस्था तभी संतुलित मानी जाएगी, जब निर्देशों के साथ-साथ कर्मचारियों के अधिकारों और भुगतान को लेकर भी उतनी ही गंभीरता दिखाई जाए।
स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से अपेक्षा है कि वे इस मामले को गंभीरता से लेते हुए लंबित मानदेय की स्थिति की जांच कराएं और पात्र कर्मचारियों को शीघ्र भुगतान सुनिश्चित करें, ताकि अस्पतालों की जमीनी व्यवस्था संभालने वाले इन कर्मचारियों को आर्थिक परेशानी से राहत मिल सके।

प्रदीप मिश्रा
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