समावेशी शिक्षा पर प्रो. नंदिनी साहू का जोर
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कोलकाता, पश्चिम बंगाल
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- विनोद यादव
राष्ट्रीय महिला आयोग के सम्मेलन में उच्च शिक्षा को महिला-संवेदनशील, तकनीक आधारित और समावेशी बनाने की वकालत
कोलकाता ACGN:- राष्ट्रीय महिला आयोग द्वारा आयोजित “शिक्षा, साहित्य, कला और संस्कृति में बदलाव की संवाहक के रूप में महिलाएं” विषयक सम्मेलन में हिंदी विश्वविद्यालय, पश्चिम बंगाल की कुलपति प्रोफेसर नंदिनी साहू ने विशिष्ट वक्ता के रूप में भाग लेते हुए समावेशी और आधुनिक उच्च शिक्षा व्यवस्था की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आज के दौर में शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए, जिसमें सभी वर्गों को समान अवसर मिले, महिलाओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण विकसित हो और तकनीक का प्रभावी उपयोग किया जाए।
सम्मेलन में देशभर से पहुंचे शिक्षाविदों, नीति-निर्माताओं, विधायकों और विद्वानों को संबोधित करते हुए प्रोफेसर साहू ने विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में व्यापक बदलाव की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में संवैधानिक मूल्यों, सामाजिक जिम्मेदारी और समानता की भावना विकसित करने के लिए स्त्रीवादी भाषाविज्ञान, जेंडर संवेदीकरण और महिला अध्ययन जैसे विषयों को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया जाना चाहिए। उनका कहना था कि महिला शिक्षा केवल औपचारिकता तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि इसे शिक्षा नीति और शिक्षण प्रक्रिया के केंद्र में स्थान मिलना चाहिए।

प्रोफेसर साहू ने डिजिटल शिक्षा की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने डिजिटल लाइब्रेरी, ऑनलाइन और ऑफलाइन शिक्षण के मिश्रित मॉडल तथा आधुनिक तकनीक आधारित शिक्षण पद्धतियों को अपनाने की आवश्यकता बताते हुए कहा कि 21वीं सदी में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी संभव है, जब तकनीक और समावेशी शिक्षा का बेहतर समन्वय स्थापित किया जाए।
उन्होंने उच्च शिक्षण संस्थानों की सामाजिक जिम्मेदारी पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि छात्रवृत्ति, आर्थिक सहायता, कौशल विकास, मार्गदर्शन, परामर्श और रोजगारपरक प्रशिक्षण जैसी योजनाओं के माध्यम से जरूरतमंद एवं वंचित वर्ग के विद्यार्थियों को मुख्यधारा से जोड़ना समय की आवश्यकता है। विश्वविद्यालयों को सामाजिक न्याय और समान अवसरों का मजबूत माध्यम बनना चाहिए, ताकि समाज के अंतिम व्यक्ति तक शिक्षा का लाभ पहुंच सके।
सम्मेलन में शिक्षा, साहित्य, कला और संस्कृति के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका पर व्यापक चर्चा हुई। विभिन्न क्षेत्रों से आए विशेषज्ञों ने महिलाओं के नेतृत्व को मजबूत करने, लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और शिक्षा में नवाचार लाने संबंधी विषयों पर अपने विचार साझा किए। प्रोफेसर नंदिनी साहू के विचारों को उपस्थित शिक्षाविदों और प्रतिभागियों ने सराहा तथा उनके सुझावों को उच्च शिक्षा के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनके वक्तव्य ने यह संदेश दिया कि ज्ञान, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है और समावेशी शिक्षा ही विकसित भारत की मजबूत आधारशिला बन सकती है।
प्रदीप मिश्रा
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