वार्ड-07 का मानस भवन बना बदहाली की पहचान, विकास के दावों पर उठे गंभीर सवाल
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संजय जेठवानी
शिकायतों के बावजूद नहीं हुआ जीर्णोद्धार, जर्जर भवन और गंदगी से परेशान स्थानीय नागरिकों ने प्रशासन से की त्वरित कार्रवाई की मांग।
सूरजपुर ACGN :- एक ओर केंद्र और राज्य सरकारें शहरी विकास, स्वच्छता और आधारभूत सुविधाओं को मजबूत करने के दावे कर रही हैं, वहीं सूरजपुर नगर पालिका परिषद के वार्ड क्रमांक-07 स्थित पुराना बाजारपारा, फॉरेस्ट ऑफिस एवं मंडी रोड के समीप बना मानस भवन प्रशासनिक उपेक्षा की कहानी बयां करता नजर आ रहा है। वर्षों पहले सामाजिक, सांस्कृतिक और सार्वजनिक आयोजनों के लिए निर्मित यह भवन आज जर्जर अवस्था में पहुंच चुका है। भवन की टूटी दीवारें, उखड़ा फर्श, क्षतिग्रस्त छत, चारों ओर फैली गंदगी और साफ-सफाई के अभाव ने इसे उपयोग के लायक नहीं छोड़ा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि भवन की वर्तमान स्थिति को देखते हुए यहां किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

रहवासियों का आरोप है कि इस समस्या को लेकर कई बार नगर पालिका परिषद और संबंधित अधिकारियों को शिकायत दी गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। वर्षों बीत जाने के बावजूद न तो भवन का जीर्णोद्धार कराया गया और न ही नियमित सफाई एवं रखरखाव की कोई प्रभावी व्यवस्था की गई। परिणामस्वरूप सार्वजनिक धन से निर्मित यह भवन धीरे-धीरे अपनी उपयोगिता खोता जा रहा है और उपेक्षा का प्रतीक बन चुका है।
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि इस मानस भवन का निर्माण क्षेत्र के लोगों की सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किया गया था, लेकिन प्रशासनिक लापरवाही के कारण आज यह भवन स्वयं संरक्षण की प्रतीक्षा कर रहा है। लोगों का मानना है कि यदि समय-समय पर इसकी मरम्मत और रखरखाव किया जाता तो यह भवन आज भी वार्डवासियों के लिए उपयोगी साबित होता।

वार्डवासियों ने यह भी सवाल उठाया है कि जब नगर विकास, स्वच्छ भारत अभियान और बुनियादी सुविधाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाने के दावे किए जाते हैं, तब शहर के बीच स्थित एक सार्वजनिक भवन की ऐसी स्थिति आखिर क्यों बनी हुई है। उनका कहना है कि यदि मुख्य क्षेत्र में स्थित भवन की यह हालत है तो अन्य सार्वजनिक परिसंपत्तियों की स्थिति का सहज अनुमान लगाया जा सकता है।

स्थानीय लोगों ने योजनाओं के क्रियान्वयन पर भी गंभीर प्रश्न उठाते हुए कहा कि शासन स्तर पर भवनों के रखरखाव और विकास के लिए बजट स्वीकृत होने के बावजूद उसका लाभ धरातल पर दिखाई नहीं देता। नागरिकों ने संबंधित विभाग से यह स्पष्ट करने की मांग की है कि सार्वजनिक भवनों के रखरखाव के लिए स्वीकृत राशि का उपयोग कहां और किस प्रकार किया गया है तथा यदि योजनाएं बनी हैं तो उनका प्रभाव अब तक दिखाई क्यों नहीं दे रहा।
मोहल्लेवासियों का आरोप है कि चुनाव के समय विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद जनसमस्याएं प्राथमिकता से बाहर हो जाती हैं। उनका कहना है कि यदि समय रहते मानस भवन का जीर्णोद्धार नहीं कराया गया तो यह भवन भविष्य में किसी बड़े हादसे का कारण बन सकता है।
स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से मानस भवन की वर्तमान स्थिति की निष्पक्ष जांच कराने, संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय करने तथा भवन के तत्काल जीर्णोद्धार, नियमित साफ-सफाई और स्थायी रखरखाव की व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है। अब देखना यह होगा कि इस गंभीर समस्या पर प्रशासन कितनी शीघ्रता से संज्ञान लेकर कार्रवाई करता है या फिर वार्ड क्रमांक-07 का यह मानस भवन सरकारी उपेक्षा का एक और प्रतीक बनकर रह जाएगा।
प्रदीप मिश्रा
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