आखिर कौन दबा रहा है सरकार के 18 आदेश? पूर्व मंत्री अकबर ने मुख्य सचिव से मांगा जवाब
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
सांसदों और विधायकों के सम्मान से जुड़े सरकारी निर्देशों के पालन पर उठे सवाल, अधिकारियों के रवैये पर पूर्व मंत्री ने जताई कड़ी नाराजगी
रायपुर ACGN:- छत्तीसगढ़ में जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच समन्वय को लेकर एक बार फिर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। इस बार मुद्दा सरकार के उन 18 महत्वपूर्ण आदेशों का है, जो सांसदों और विधायकों के सम्मान, उनके पत्रों के समय पर जवाब तथा शासकीय कार्यक्रमों में उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने के लिए वर्षों पहले जारी किए गए थे। इन आदेशों के पालन पर सवाल उठाते हुए प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री मोहम्मद अकबर ने मुख्य सचिव से हस्तक्षेप की मांग की है।
पूर्व मंत्री मोहम्मद अकबर ने एक वीडियो संदेश जारी कर कहा कि राज्य शासन द्वारा समय-समय पर सांसदों और विधायकों के साथ अधिकारियों के व्यवहार तथा उन्हें आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने के संबंध में कई परिपत्र जारी किए गए हैं। उन्होंने दावा किया कि ऐसे कुल 18 आदेश मौजूद हैं, लेकिन मैदानी स्तर पर इनका प्रभावी पालन नहीं हो रहा है। उन्होंने मुख्य सचिव से आग्रह किया कि सभी विभागों और अधिकारियों को इन आदेशों का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए जाएं।

उन्होंने विशेष रूप से सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा 21 अप्रैल 2010 को जारी आदेश का उल्लेख किया। उनके अनुसार इस आदेश में स्वयं शासन ने माना था कि जनप्रतिनिधियों से संबंधित पूर्व में जारी निर्देशों का समुचित पालन नहीं हो रहा है, जिसे शासन ने खेदजनक माना था। इसी आदेश के साथ पूर्व में जारी 18 महत्वपूर्ण निर्देशों की सूची भी संलग्न की गई थी।

इन निर्देशों में सांसदों और विधायकों के पत्रों की तत्काल अभिस्वीकृति देना, 15 दिनों के भीतर तथ्यात्मक उत्तर उपलब्ध कराना, शासकीय कार्यक्रमों, भूमि पूजन और लोकार्पण समारोहों में क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित करना, जिला एवं विकासखंड स्तर की समीक्षा बैठकों की समय पर सूचना देना तथा अधिकारियों द्वारा जनप्रतिनिधियों के साथ सौहार्दपूर्ण और सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित करना जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं।
पूर्व मंत्री अकबर ने कहा कि यदि शासन के अपने आदेशों का पालन ही नहीं होगा तो जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना कठिन होगा। उन्होंने मुख्य सचिव से अपेक्षा जताई कि वे इस विषय को गंभीरता से लेते हुए सभी विभागों को स्पष्ट निर्देश जारी करें, ताकि शासन के आदेश केवल फाइलों तक सीमित न रह जाएं बल्कि उनका पालन भी सुनिश्चित हो।
अब राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों की निगाहें मुख्य सचिव कार्यालय पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि इस मांग के बाद सरकार क्या कदम उठाती है और क्या वास्तव में वर्षों से जारी 18 आदेशों को फिर से प्रभावी ढंग से लागू कराया जाता है या यह मामला भी केवल चर्चाओं तक सीमित रह जाएगा।
प्रदीप मिश्रा
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