डिजिटल न्याय प्रणाली से न्याय होगा अधिक पारदर्शी और समयबद्ध : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनादि पांडेय
स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस राज्य स्तरीय कार्यशाला में नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन, ई-साक्ष्य, ई-समन और डिजिटल तकनीक के व्यापक उपयोग पर दिया गया विशेष जोर।
रायपुर ACGN:- राजधानी रायपुर में आयोजित “स्ट्रेंथिंग डिजिटल जस्टिस” राज्य स्तरीय कार्यशाला में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि वर्तमान समय की चुनौतियों और आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार किए गए नए आपराधिक कानून देश की न्याय व्यवस्था में ऐतिहासिक परिवर्तन लेकर आए हैं। इन कानूनों का उद्देश्य केवल अपराधियों को दंडित करना नहीं, बल्कि आम नागरिक को त्वरित, पारदर्शी, सुलभ और समयबद्ध न्याय उपलब्ध कराना है। उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक, डिजिटल प्रणालियों और वैज्ञानिक साक्ष्यों को न्याय प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा बनाकर न्याय व्यवस्था को अधिक प्रभावी, विश्वसनीय और जवाबदेह बनाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगभग डेढ़ सौ वर्ष पुराने औपनिवेशिक कानूनों के स्थान पर भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता तथा भारतीय साक्ष्य अधिनियम लागू किए गए हैं। इन नए कानूनों की मूल भावना नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था स्थापित करना है, ताकि पीड़ित को शीघ्र न्याय मिले और अपराधी कानून के शिकंजे से बच न सके।

उन्होंने कहा कि पुराने कानून उस दौर में बने थे, जब डिजिटल तकनीक, सीसीटीवी, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और आधुनिक फॉरेंसिक विज्ञान का अस्तित्व नहीं था। आज अपराधों का स्वरूप बदल चुका है और तकनीक न्याय व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बन गई है। नए कानूनों में डिजिटल साक्ष्य, सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल चैट, इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड और वैज्ञानिक फॉरेंसिक जांच को विधिक मान्यता देकर अनुसंधान और अभियोजन को नई मजबूती प्रदान की गई है।

मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश में नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी की शाखा प्रारंभ होने से अपराध अनुसंधान और न्यायिक प्रक्रिया को नई दिशा मिलेगी। ई-साक्ष्य जैसी डिजिटल व्यवस्था इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के सुरक्षित संरक्षण और उनकी प्रामाणिकता सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने कहा कि ई-समन प्रणाली से समन की तामील पहले की तुलना में कहीं अधिक तेज और पारदर्शी हुई है तथा न्याय श्रुति जैसी व्यवस्था न्यायालयीन कार्यवाही के सुरक्षित डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करने के साथ-साथ ऑनलाइन और हाइब्रिड सुनवाई को भी अधिक प्रभावी बना रही है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम (सीसीटीएनएस) के माध्यम से देशभर के पुलिस थाने डिजिटल रूप से एक-दूसरे से जुड़े हैं। इससे अपराधियों का रिकॉर्ड तत्काल उपलब्ध हो जाता है और पुलिस कार्रवाई में तेजी आती है। उन्होंने जानकारी दी कि छत्तीसगढ़ के सभी थाने ऑनलाइन मोड में कार्य कर रहे हैं तथा अब तक प्रदेश में 1 लाख 97 हजार 547 एफआईआर ऑनलाइन दर्ज की जा चुकी हैं। नागरिकों को डिजिटल हस्ताक्षरित एफआईआर की प्रति भी इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) पुलिस, न्यायपालिका, अभियोजन, जेल और अन्य संबंधित संस्थाओं के बीच सुरक्षित डिजिटल समन्वय स्थापित कर रहा है। इससे सूचनाओं का त्वरित आदान-प्रदान संभव हुआ है और न्यायिक प्रक्रिया में होने वाली अनावश्यक देरी में उल्लेखनीय कमी आई है। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध जैसी नई चुनौतियों से निपटने के लिए राज्य में नौ नए साइबर थाने प्रारंभ किए गए हैं तथा व्यापक जनजागरूकता अभियान भी संचालित किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि तकनीक लगातार विकसित हो रही है, इसलिए न्याय व्यवस्था से जुड़े प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को समय-समय पर प्रशिक्षण देना आवश्यक है। राज्य सरकार नए कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए सतत प्रशिक्षण, तकनीकी क्षमता विकास और नियमित मॉनिटरिंग के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री रमेश सिन्हा ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य की न्याय प्रणाली अधिक पारदर्शी, वैज्ञानिक, त्वरित और तकनीक आधारित बनेगी। उन्होंने कहा कि इन कानूनों की सफलता केवल इनके लागू होने में नहीं, बल्कि सभी संबंधित संस्थाओं द्वारा प्रभावी क्रियान्वयन में निहित है। उन्होंने ई-साक्ष्य, ई-चालान, न्याय श्रुति और डिजिटल फॉरेंसिक्स जैसी व्यवस्थाओं को न्याय प्रक्रिया की विश्वसनीयता बढ़ाने वाला महत्वपूर्ण माध्यम बताया।
मुख्य न्यायाधीश ने बताया कि जून माह के दौरान जिला न्यायालयों में लगभग 9,910 मामलों तथा उच्च न्यायालय में 58 मामलों की सुनवाई वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से की गई। उन्होंने सभी हितधारकों से न्याय श्रुति प्लेटफॉर्म के व्यापक उपयोग का आग्रह करते हुए विश्वास व्यक्त किया कि सभी संस्थाओं के समन्वित प्रयासों से छत्तीसगढ़ नए आपराधिक कानूनों और डिजिटल न्याय प्रणाली के प्रभावी क्रियान्वयन में देश का अग्रणी राज्य बनेगा।
उपमुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री श्री विजय शर्मा ने कहा कि यह कार्यशाला न्याय व्यवस्था के इतिहास में मील का पत्थर सिद्ध होगी। उन्होंने बताया कि इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की समीक्षा के बाद इसके त्वरित क्रियान्वयन के निर्देश दिए गए हैं, जिससे न्याय एवं कानून व्यवस्था के डिजिटलीकरण की दिशा में तेजी से कार्य हो रहा है। उन्होंने “वन डेटा, वन एंट्री” की अवधारणा, एफआईआर की मैनुअल प्रक्रिया समाप्त करने तथा ई-फॉरेंसिक, ई-साक्ष्य, न्याय श्रुति, सीसीटीएनएस, डीएनए सैंपलिंग सहित आधुनिक तकनीकों के व्यापक उपयोग पर बल दिया।
कार्यक्रम में विधि एवं विधायी कार्य मंत्री श्री गजेंद्र यादव, उच्च न्यायालय के न्यायाधीश न्यायमूर्ति श्री एन.के. चन्द्रवंशी, वरिष्ठ न्यायमूर्तिगण, प्रमुख सचिव गृह श्रीमती निहारिका बारिक सिंह, प्रमुख सचिव विधि एवं विधायी कार्य विभाग श्रीमती सुषमा सावंत, पुलिस महानिदेशक श्री अरुण देव गौतम, विभिन्न जिलों के न्यायाधीश, वरिष्ठ पुलिस अधिकारी, अभियोजन अधिकारी, एफएसएल के अधिकारी, चिकित्सक, विधि विशेषज्ञ तथा विभिन्न विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रदीप मिश्रा
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