आईजी की दो टूक- ढिलाई नहीं, समय पर जांच और सख्त पुलिसिंग से ही अपराध पर लगेगी लगाम
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रायगढ़, छत्तीसगढ़
By ACGN – 7647981711, 9303948009
राम गोपाल गर्ग ने रायगढ़ पुलिस की समीक्षा बैठक में नवीन कानूनों, त्वरित एफआईआर, समयबद्ध विवेचना और तकनीक आधारित पुलिसिंग को लेकर दिए सख्त निर्देश
रायगढ़ ACGN:- मुख्यमंत्री के रायगढ़ प्रवास कार्यक्रम के सफल समापन के बाद बिलासपुर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक श्री राम गोपाल गर्ग ने पुलिस कंट्रोल रूम में जिले के राजपत्रित अधिकारियों, थाना और चौकी प्रभारियों की समीक्षा बैठक ली। बैठक में कानून व्यवस्था, अपराध नियंत्रण, नवीन आपराधिक कानूनों के क्रियान्वयन और विवेचना की गुणवत्ता की विस्तार से समीक्षा की गई।

आईजी ने कहा कि वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में रायगढ़ पुलिस बेहतर कार्य कर रही है, लेकिन बदलती परिस्थितियों में पुलिसिंग को और अधिक पेशेवर, तकनीक आधारित तथा परिणाममुखी बनाने की जरूरत है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि अपराध की विवेचना केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि न्याय तक पहुंचने की महत्वपूर्ण कड़ी है। इसलिए प्रत्येक प्रकरण में समयसीमा और गुणवत्ता दोनों का ध्यान रखा जाए।

90 और 60 दिन की समयसीमा में पूरी हो विवेचना – नवीन आपराधिक कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर देते हुए आईजी ने निर्देश दिया कि सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में 90 दिनों तथा अन्य अपराधों में 60 दिनों के भीतर विवेचना पूरी कर चालान प्रस्तुत किया जाए।
लंबित प्रकरणों की श्रेणीवार सूची तैयार कर प्राथमिकता के आधार पर उनका निराकरण करने के निर्देश दिए गए। सामान्य प्रकृति के मामलों को अधिकतम आठ दिनों में निपटाने तथा जटिल मामलों में संबंधित अनुविभागीय अधिकारी पुलिस के मार्गदर्शन में गुणवत्तापूर्ण विवेचना करने को कहा गया।

संपत्ति संबंधी अपराधों में तत्काल एफआईआर – आईजी ने संपत्ति संबंधी अपराधों को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए कि वैधानिक शिकायत मिलने पर एफआईआर दर्ज करने में किसी प्रकार की टालमटोल नहीं होनी चाहिए। थाना प्रभारी की मौजूदगी में शिकायत पर तत्काल कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
चोरी के वाहनों की बरामदगी के लिए सशक्त ऐप का अधिकतम उपयोग करने, आदतन अपराधियों और गुंडा-बदमाशों की लगातार निगरानी रखने तथा जमानत पर बाहर आए अपराधियों द्वारा दोबारा अपराध करने की स्थिति में जमानत निरस्त कराने के लिए न्यायालय में आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।
फरार आरोपियों के खिलाफ चालान पेश होने के बाद वारंट जारी कराने की प्रक्रिया में देरी नहीं करने तथा शून्य मर्ग दर्ज होने पर संबंधित थाना क्षेत्र को तत्काल सूचना देने को कहा गया, ताकि महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित किया जा सके।

तकनीक बनेगी पुलिसिंग की ताकत – आईजी ने नवीन कानूनों के अनुरूप ई-साक्ष्य, ऑडियो-वीडियोग्राफी, सीसीटीएनएस में समय पर प्रविष्टि, डिजिटल हस्ताक्षर और मेडिकल अनुरोध मेडलर पोर्टल के माध्यम से भेजने की प्रक्रिया को अनिवार्य रूप से अपनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने न्यायालयीन पेशियों में पुलिस कर्मचारियों की समय पर उपस्थिति सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया। एनडीपीएस मामलों की विवेचना को मजबूत बनाने के लिए अधिकारियों और विवेचकों के नियमित प्रशिक्षण की आवश्यकता भी बताई।

रायगढ़ पुलिस ने दिए प्रभावी अमल के संकेत – बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री शशि मोहन सिंह ने आईजी को आश्वस्त किया कि सभी निर्देशों का गंभीरता और प्रतिबद्धता के साथ पालन किया जाएगा। उन्होंने कहा कि अपराध नियंत्रण, गुणवत्तापूर्ण विवेचना, नवीन कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन और तकनीक आधारित पुलिसिंग को जिले में प्राथमिकता दी जाएगी।
बैठक में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अनिल सोनी, डीएसपी श्रीमती उन्नति ठाकुर, डीएसपी उत्तम प्रताप सिंह, डीएसपी सुशांतो बनर्जी, डीएसपी सतीश भार्गव, रक्षित निरीक्षक अमित सिंह सहित जिले के सभी थाना और चौकी प्रभारी मौजूद रहे।
बैठक से साफ है कि रायगढ़ पुलिस अब अपराध नियंत्रण के साथ-साथ समयबद्ध विवेचना, डिजिटल साक्ष्य और त्वरित कार्रवाई को अपनी पुलिसिंग का अहम हिस्सा बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है।
प्रदीप मिश्रा
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