पांच साल से अधूरा स्कूल, बंद पड़ी नल-जल योजना और विकास के खोखले दावे – आखिर कब जागेगा प्रशासन?
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता
डोंगरी पंचायत में अधूरे स्कूल भवन, जर्जर शिक्षा व्यवस्था, बंद पड़ी नल-जल योजना, मध्यान्ह भोजन में गैस सुविधा का अभाव और वर्षों से लंबित विकास कार्यों ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कोरबा ACGN:- कोरबा जिले के जनपद पंचायत कटघोरा अंतर्गत ग्राम पंचायत डोंगरी में विकास कार्यों की जमीनी हकीकत शासन और प्रशासन के बड़े-बड़े दावों की पोल खोल रही है। एक ओर वर्ष 2021 में स्वीकृत माध्यमिक शाला भवन आज वर्ष 2026 तक भी अधूरा पड़ा हुआ है, वहीं दूसरी ओर करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई ‘हर घर नल से जल’ योजना भी ग्रामीणों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है।

परिणामस्वरूप गांव के बच्चे आज भी जर्जर और असुरक्षित भवन में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जबकि ग्रामीण पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा के लिए परेशान हैं।
ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान स्कूल भवन की स्थिति अत्यंत दयनीय है। बरसात के दिनों में स्कूल के कमरों में पानी भर जाता है, छत से पानी टपकता है, दीवारों में भारी सीलन आ गई है और कई स्थानों पर प्लास्टर झड़ने लगा है। ऐसे हालात में नौनिहालों को पढ़ाई करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। यदि समय रहते नया भवन पूरा नहीं कराया गया तो कभी भी कोई बड़ी दुर्घटना घट सकती है।


इतना ही नहीं, शासन द्वारा विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन गैस चूल्हे पर तैयार करने का दावा भी यहां खोखला नजर आता है। विद्यालय में भोजन बनाने वाली महिलाओं ने बताया कि उन्हें आज तक नियमित रूप से गैस की सुविधा उपलब्ध नहीं कराई गई है। मजबूरी में आज भी लकड़ी और सिगड़ी पर भोजन बनाना पड़ रहा है। धुएं के बीच भोजन तैयार करना उनकी विवशता बन गया है। सवाल यह है कि जब सरकार स्वच्छ ईंधन और बेहतर व्यवस्था के दावे कर रही है, तब ग्रामीण विद्यालयों तक यह सुविधा क्यों नहीं पहुंच पा रही है?

वर्ष 2021 में खनिज न्यास मद (डीएमएफ) से माध्यमिक शाला भवन निर्माण की स्वीकृति मिली थी। प्रथम किश्त प्राप्त होने के बाद निर्माण कार्य प्रारंभ हुआ, लेकिन दूसरी किश्त आज तक जारी नहीं होने के कारण भवन अधूरा छोड़ दिया गया। पांच वर्षों से अधूरा पड़ा यह भवन प्रशासनिक उदासीनता और विभागीय सुस्ती की कहानी स्वयं बयां कर रहा है।
पूर्व विधायक प्रतिनिधि एवं स्कूल प्रबंधन समिति के सदस्य मनबोध दास महंत ने बताया कि वर्षों से अधूरे पड़े भवन के कारण विद्यार्थियों को लगातार कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विशेषकर बरसात के मौसम में बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमेशा चिंता बनी रहती है। कई बार संबंधित अधिकारियों का ध्यान इस ओर आकर्षित कराया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
जब इस संबंध में तत्कालीन सरपंच इंद्रपाल सिंह कंवर से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि भवन निर्माण के लिए लगभग 40 प्रतिशत राशि प्रथम किश्त के रूप में प्राप्त हुई थी, जिसके आधार पर निर्माण कार्य प्रारंभ कराया गया। लेकिन दूसरी किश्त आज तक जारी नहीं होने के कारण निर्माण कार्य रुक गया। उन्होंने बताया कि पुनः संबंधित विभाग को राशि जारी करने के लिए आवेदन भेजा गया है।

चिंता की बात यह भी है कि केवल माध्यमिक शाला ही नहीं, बल्कि ग्राम पंचायत के तिलवारीपारा में प्राथमिक शाला भवन भी वर्षों से अधूरा पड़ा हुआ है। एक ही पंचायत में दो-दो स्कूल भवनों का वर्षों तक अधूरा रहना प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। आखिर बच्चों की शिक्षा से जुड़े निर्माण कार्यों को ही सबसे अधिक उपेक्षित क्यों रखा जा रहा है?

नल-जल योजना भी बनी शोपीस, टंकी बनी लेकिन पानी नहीं
जब पंचायत में पेयजल व्यवस्था और नल-जल योजना के संबंध में जानकारी ली गई तो सरपंच ने बताया कि तिलवारीपारा में पानी की टंकी का निर्माण तो कर दिया गया है, लेकिन आज तक ग्रामीणों को नियमित जलापूर्ति नहीं हो पा रही है। प्रारंभ में कुछ समय के लिए पानी की आपूर्ति शुरू की गई थी, लेकिन ठेकेदार द्वारा बिछाई गई पाइपलाइन में कई स्थानों पर लीकेज सामने आ गया। इसके बाद योजना को बंद कर दिया गया और आज तक दोबारा सुचारु रूप से शुरू नहीं किया गया।
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स्थिति यह है कि सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल से जल’ योजना डोंगरी पंचायत में केवल सरकारी रिकॉर्ड और कागजी उपलब्धियों तक सीमित होकर रह गई है। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यदि पाइपलाइन कुछ ही दिनों में जगह-जगह फट जाए और वर्षों तक उसकी मरम्मत तक न हो, तो यह केवल तकनीकी खामी नहीं बल्कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता, निगरानी व्यवस्था और संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच होती और दोषपूर्ण कार्य करने वाले ठेकेदार पर सख्त कार्रवाई की जाती, तो आज गांव के लोगों को पेयजल संकट का सामना नहीं करना पड़ता। लेकिन न तो दोषियों पर कार्रवाई हुई और न ही योजना को सुधारकर दोबारा चालू किया गया। इसका खामियाजा आज भी ग्रामीणों को भुगतना पड़ रहा है।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब सरकार ग्रामीण विकास, बेहतर शिक्षा, हर घर जल और गुणवत्तापूर्ण अधोसंरचना के बड़े-बड़े दावे करती है, तब डोंगरी जैसे गांव इन योजनाओं के वास्तविक लाभ से आज भी क्यों वंचित हैं? क्या योजनाओं का उद्देश्य केवल शिलान्यास, उद्घाटन, विज्ञापन और सरकारी रिपोर्टों तक सीमित रह गया है? क्या बच्चों की शिक्षा, ग्रामीणों का पेयजल और उनकी मूलभूत सुविधाएं केवल सरकारी फाइलों में ही पूरी हो चुकी हैं?
यदि पांच वर्षों तक स्कूल भवन की दूसरी किश्त जारी नहीं होती, नल-जल योजना वर्षों तक बंद पड़ी रहती है, विद्यालय में गैस उपलब्ध नहीं कराई जाती और बच्चों को जर्जर भवन में बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती है, तो यह केवल एक विभाग की विफलता नहीं बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र की जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़ा करता है। आखिर इन योजनाओं की निगरानी कौन कर रहा है? दोषपूर्ण निर्माण करने वाले ठेकेदारों और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही? क्या शासन किसी बड़ी दुर्घटना या जनआक्रोश का इंतजार कर रहा है?

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन कोरबा, जनपद पंचायत कटघोरा, शिक्षा विभाग, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग तथा खनिज न्यास प्रबंधन से मांग की है कि डोंगरी एवं तिलवारीपारा के अधूरे स्कूल भवनों का निर्माण तत्काल पूर्ण कराया जाए, मध्यान्ह भोजन के लिए गैस सुविधा तत्काल उपलब्ध कराई जाए, नल-जल योजना की उच्चस्तरीय तकनीकी जांच कर दोषपूर्ण निर्माण के लिए जिम्मेदार ठेकेदारों एवं संबंधित अधिकारियों पर कठोर कार्रवाई की जाए तथा ग्रामीणों को शीघ्र नियमित एवं सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराया जाए। विकास केवल भाषणों, विज्ञापनों और सरकारी रिपोर्टों में नहीं, बल्कि गांव के बच्चों के सुरक्षित विद्यालय, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रत्येक घर तक पहुंचने वाले स्वच्छ पानी में दिखाई देना चाहिए। यदि विकास की योजनाएं धरातल पर नहीं उतरतीं, तो वे केवल कागजी उपलब्धियां बनकर रह जाती हैं और सबसे बड़ा नुकसान उन ग्रामीणों को होता है, जिनके नाम पर ये योजनाएं बनाई जाती हैं।
प्रदीप मिश्रा
अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़
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