हाथी-मानव संघर्ष रोकने की बड़ी पहल, कलेक्टर ने दिए सख्त निर्देश; मुआवजा प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN: 7647981711, 9303948009
हाथियों को आबादी से दूर रखने, एलीफेंट कॉरिडोर सुरक्षित करने और प्रभावित परिवारों को त्वरित राहत देने पर जिला प्रशासन का जोर
कोरबा कलेक्ट्रेट सभाकक्ष में कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी कुणाल दुदावत की अध्यक्षता में मानव-हाथी द्वंद्व की रोकथाम, हाथी प्रभावित परिवारों के मुआवजा प्रकरणों के त्वरित निराकरण तथा वन्यजीव संरक्षण से जुड़े विभिन्न विषयों पर जिला स्तरीय समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में वन, राजस्व, पुलिस, विद्युत, कृषि एवं अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ वर्तमान स्थिति की विस्तृत समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश जारी किए गए।
कलेक्टर ने वन विभाग की हाथी निगरानी टीमों को पूरी सतर्कता और मुस्तैदी के साथ कार्य करने के निर्देश देते हुए कहा कि हाथियों को हरसंभव रिहायशी क्षेत्रों से दूर रखा जाए, ताकि जनहानि और दुर्घटनाओं की संभावना को न्यूनतम किया जा सके। उन्होंने हाथी प्रभावित गांवों में समय पर सूचना पहुंचाने, ग्रामीणों को सतर्क करने तथा भीड़ नियंत्रण की स्थिति में वन एवं पुलिस विभाग के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।
बैठक में हाथियों से हुई जनहानि, फसल, मकान एवं अन्य संपत्ति क्षति से संबंधित मुआवजा प्रकरणों की समीक्षा करते हुए कलेक्टर ने कहा कि किसी भी पात्र हितग्राही को राहत राशि मिलने में अनावश्यक विलंब नहीं होना चाहिए। उन्होंने पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए विशेष ऑनलाइन सॉफ्टवेयर विकसित करने के निर्देश दिए, जिससे प्रकरणों की ऑनलाइन निगरानी, लंबित मामलों की समीक्षा और भुगतान की प्रगति पर प्रभावी नियंत्रण रखा जा सके।
विद्युत विभाग को निर्देशित करते हुए कलेक्टर ने कहा कि हाथी विचरण क्षेत्रों से गुजरने वाली 11 केवी विद्युत लाइनों के झूलते तारों और कम ऊंचाई वाले हिस्सों का तत्काल सर्वे कर उन्हें मानक ऊंचाई तक सुधारा जाए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि विद्युत तारों की चपेट में आने से किसी भी हाथी की मृत्यु नहीं होनी चाहिए। साथ ही अवैध बिजली हुकिंग और खेतों में करंटयुक्त तार लगाने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए गए।
बैठक में हाथी प्रभावित क्षेत्रों के पात्र परिवारों को प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत प्राथमिकता के आधार पर पक्के मकान उपलब्ध कराने, भारतीय वन्यजीव संस्थान द्वारा चिन्हित एलीफेंट कॉरिडोर को सुरक्षित रखने तथा विकास कार्यों के दौरान हाथियों के पारंपरिक आवागमन मार्गों को बाधित नहीं करने पर विशेष जोर दिया गया। लेमरू हाथी रिजर्व क्षेत्र एवं राष्ट्रीय राजमार्ग चौड़ीकरण के दौरान भी वन्यजीव संरक्षण के सभी मानकों का पालन करने के निर्देश दिए गए।
कलेक्टर ने वनांचल क्षेत्रों में ग्रामीणों की आजीविका मजबूत करने के लिए लघु वनोपज आधारित उद्योगों को बढ़ावा देने, अवैध महुआ लाहान एवं महुआ शराब के निर्माण और भंडारण के विरुद्ध लगातार कार्रवाई करने तथा हाथियों के लिए पेयजल एवं प्राकृतिक भोजन की उपलब्धता बढ़ाने के निर्देश दिए। बैठक में हाईमास्ट और सोलर लाइट, जीपीएस ट्रैकिंग, मोबाइल अलर्ट, सीसीटीवी, थर्मल ड्रोन, सूचना संकेतकों एवं मोबाइल एप के माध्यम से हाथियों की निगरानी और ग्रामीणों को समय पर सूचना उपलब्ध कराने जैसे नवाचारों की भी जानकारी दी गई।
जिला शिक्षा अधिकारी को प्रत्येक शनिवार चयनित विद्यालयों के विद्यार्थियों का वन विभाग के जागरूकता केंद्रों में भ्रमण कराने के निर्देश दिए गए, ताकि उन्हें हाथियों के व्यवहार, वन संरक्षण, पौधारोपण, मृदा संरक्षण एवं वन अग्नि से बचाव संबंधी व्यवहारिक जानकारी दी जा सके।
बैठक में वनमण्डलाधिकारी कटघोरा कुमार निशांत ने मानव-हाथी द्वंद्व की वर्तमान स्थिति तथा विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि हाथी प्रभावित प्रकरणों के मुआवजा वितरण के लिए राशि की कोई कमी नहीं है और आवश्यक प्रतिवेदन प्राप्त होते ही मामलों का त्वरित निराकरण किया जा रहा है।
बैठक में वनमण्डलाधिकारी कोरबा प्रेमलता यादव, नगर पालिक निगम कोरबा के आयुक्त आशुतोष पांडेय, जिले के सभी अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व), विद्युत, कृषि, उद्यानिकी, पुलिस तथा अन्य संबंधित विभागों के अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रदीप मिश्रा
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