सुना वेश में सजे महाप्रभु… उमड़ा लाखों श्रद्धालुओं का सैलाब
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पुरी, ओडिशा
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- ओड़िशा ब्यूरो स्वामी विजयानंद जी महाराज
रथयात्रा के दौरान महाप्रभु जगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान सुदर्शन ने धारण किया दिव्य स्वर्णाभूषणों से सुसज्जित ‘सुना वेश’। लाखों श्रद्धालुओं ने किए दुर्लभ दर्शन, सुरक्षा व्यवस्था के बीच भक्ति का अद्भुत संगम

पुरी ACGN :- विश्वप्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ धाम पुरी में शनिवार को रथयात्रा महोत्सव के सबसे भव्य और श्रद्धा से परिपूर्ण अनुष्ठानों में से एक ‘सुना वेश’ (स्वर्ण वेश) का दिव्य आयोजन संपन्न हुआ। हरिशयनी एकादशी के पावन अवसर पर तीनों रथों पर विराजमान भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान श्रीबलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान श्रीसुदर्शन को बहुमूल्य स्वर्णाभूषणों से अलंकृत कर राजाधिराज स्वरूप में श्रद्धालुओं को दर्शन कराए गए। इस दुर्लभ अवसर के दर्शन के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचे और पूरा बड़दांड़ “जय जगन्नाथ” के जयघोष से गूंज उठा।
बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं दिखाई दी। सुबह से ही श्रद्धालुओं का जनसैलाब रथों के आसपास उमड़ पड़ा। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच भक्तों ने महाप्रभु के दुर्लभ स्वर्ण स्वरूप के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस किया। पूरा श्रीक्षेत्र भक्ति, उल्लास और आध्यात्मिक ऊर्जा से सराबोर दिखाई दिया।

सुना वेश के दौरान भगवान श्रीजगन्नाथ को स्वर्ण मुकुट, स्वर्ण भुजाएं, श्रीपयर, स्वर्ण ओढ़ियानी, स्वर्ण कुंडल, चंद्र-सूर्य, घाघड़ा माला, बहाड़ा माला, सेवती माला, कदंब माला, बाघनखी माला, झोबीकंठी, तिलक, चंद्रिका सहित अनेक बहुमूल्य स्वर्णाभूषणों से अलंकृत किया गया। उनके हाथों में स्वर्ण चक्र और रजत शंख भी सुशोभित किए गए। सेवायतों द्वारा पारंपरिक वैदिक विधि-विधान से संपन्न इस अलंकरण ने महाप्रभु के दिव्य स्वरूप को और भी अलौकिक बना दिया।
भगवान श्रीबलभद्र को भी किरीट, श्रीभुज, हल-मूसल, श्रीपयर, ओढ़ियानी, कुंडल, चंद्र-सूर्य, कमर पट्टी, अड़कानी, घाघड़ा माला, कदंब माला, बहाड़ा माला, बाघनखी माला, सेवती माला, तिलक, चंद्रिका और अन्य स्वर्णाभूषणों से विभूषित किया गया। वहीं देवी सुभद्रा और भगवान सुदर्शन को भी किरीट, ओढ़ियानी, चंद्र-सूर्य, काना, घाघड़ा माला, कदंब माला तथा सेवती माला सहित अनेक स्वर्णाभूषणों से सजाया गया। भगवान चतुर्धा का यह राजसी और दिव्य स्वरूप श्रद्धालुओं के लिए आकर्षण और आस्था का केंद्र बना रहा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार महाप्रभु का सुना वेश वर्ष में पांच बार किया जाता है। इनमें चार बार श्रीमंदिर के रत्न सिंहासन पर तथा केवल एक बार रथयात्रा के दौरान रथों पर यह विशेष स्वर्ण वेश धारण कराया जाता है। रथों पर होने वाला यह सुना वेश सबसे अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि इस दौरान बिना किसी भेदभाव के सभी धर्मों और समुदायों के श्रद्धालु महाप्रभु के दुर्लभ दर्शन कर सकते हैं। यही कारण है कि इस अवसर पर देश ही नहीं, बल्कि विदेशों से भी लाखों श्रद्धालु पुरी पहुंचते हैं।
पुरी ACGN :- धार्मिक परंपराओं के अनुसार सुना वेश के बाद रविवार को अधरपाना नीति संपन्न होगी, जिसके उपरांत भगवान श्रीजगन्नाथ, भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान सुदर्शन नीलाद्री बीजे की रस्म के साथ पुनः श्रीमंदिर में प्रवेश करेंगे। इसके साथ ही विश्वप्रसिद्ध श्रीजगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव का समापन होगा।
प्रदीप मिश्रा
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