हाईकोर्ट के फैसले को भी दी चुनौती… आखिर किस लड़ाई के लिए मैदान में उतरी अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता?
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नई दिल्ली
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :
गुजरात के समुद्री तेल-गैस ब्लॉक को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले को वेदांता ने डिवीजन बेंच में दी चुनौती, ONGC को सौंपे जाने के फैसले पर जारी है कानूनी संघर्ष।
नई दिल्ली ACGN:- वेदांता के चेयरमैन अनिल अग्रवाल की कंपनी वेदांता लिमिटेड ने गुजरात के समुद्र में स्थित महत्वपूर्ण CB-OS/2 ऑफशोर ऑयल एवं गैस ब्लॉक को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल बेंच के फैसले को चुनौती देते हुए डिवीजन बेंच में अपील दायर की है। कंपनी केंद्र सरकार के उस निर्णय को चुनौती दे रही है, जिसमें उसे अनुबंध का विस्तार देने से इनकार करते हुए ब्लॉक का संचालन ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉर्पोरेशन (ONGC) को सौंपने का फैसला लिया गया था।
वेदांता ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 22 जुलाई 2026 को सरकार के निर्णय को सही ठहराते हुए आदेश पारित किया था। कंपनी ने अब उसी आदेश के खिलाफ डिवीजन बेंच में अपील दायर की है। मामला वर्तमान में न्यायालय के विचाराधीन है।
इस विवाद की शुरुआत सितंबर 2025 में हुई, जब पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने सरकार की प्री-एनईएलपी (Pre-NELP) अनुबंध विस्तार नीति के तहत वेदांता को 10 वर्षों का अनुबंध विस्तार देने से इनकार कर दिया। इसके बाद सरकार ने इस ऑफशोर ऑयल एवं गैस ब्लॉक की परिसंपत्तियां और संचालन ONGC को हस्तांतरित करने का निर्णय लिया।
वेदांता का प्रोडक्शन शेयरिंग कॉन्ट्रैक्ट (PSC) 29 जून 2023 को समाप्त हो गया था। समीक्षा प्रक्रिया के दौरान कंपनी को कुछ समय के लिए अंतरिम विस्तार दिया गया, लेकिन बाद में सरकार ने अंतिम निर्णय लेते हुए अनुबंध बढ़ाने से इनकार कर दिया। इस फैसले को पहले सिंगल बेंच में चुनौती दी गई, जहां कंपनी को राहत नहीं मिली। अब अंतिम उम्मीद डिवीजन बेंच की सुनवाई पर टिकी हुई है।
यदि अदालत का पूर्व फैसला बरकरार रहता है तो ONGC गुजरात के सुवाली तट के निकट स्थित इस महत्वपूर्ण ऑफशोर ब्लॉक की संपत्तियों और संचालन का पूर्ण नियंत्रण अपने हाथ में ले सकती है। इस ब्लॉक में लक्ष्मी और गौरी गैस फील्ड शामिल हैं, जिन्हें देश की महत्वपूर्ण ऊर्जा परिसंपत्तियों में गिना जाता है।
यह ब्लॉक वर्ष 1998 में केर्न एनर्जी, टाटा पेट्रोडाइन और ONGC के संयुक्त उपक्रम को आवंटित किया गया था। बाद में वेदांता इसकी ऑपरेटर बनी। वर्तमान में इस परियोजना में ONGC की 50 प्रतिशत तथा वेदांता की 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है।
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का मानना है कि इस मामले का फैसला केवल वेदांता और ONGC तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भविष्य में तेल एवं गैस क्षेत्र के अनुबंधों, निवेश नीतियों और निजी कंपनियों की भागीदारी पर भी इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।
प्रदीप मिश्रा
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