‘मन की बात’ में गूंजा कोरबा, प्रधानमंत्री मोदी ने की जल संरक्षण मॉडल की सराहना
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
‘कैच द रेन’ अभियान के तहत कोरबा नगर निगम की अभिनव पहल को मिली राष्ट्रीय पहचान, कलेक्टर और निगमायुक्त ने नागरिकों से जल संरक्षण व वृक्षारोपण अभियान से जुड़ने की अपील की।
कोरबा, 26 जुलाई 2026। कोरबा जिले के लिए रविवार का दिन गौरवपूर्ण रहा, जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 136वें एपिसोड में कोरबा नगर पालिक निगम द्वारा संचालित ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत किए जा रहे जल संरक्षण कार्यों का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने वर्षा जल संचयन और जनभागीदारी पर आधारित इस मॉडल की सराहना करते हुए इसे देश के लिए प्रेरणादायक पहल बताया।
यह उपलब्धि कोरबा नगर पालिक निगम, जिला प्रशासन और जिले के नागरिकों के सामूहिक प्रयासों की राष्ट्रीय स्तर पर मिली बड़ी पहचान मानी जा रही है।
कलेक्टर कुणाल दुदावत के मार्गदर्शन तथा नगर निगम आयुक्त आशुतोष पांडेय के नेतृत्व में कोरबा में जल संरक्षण को जनआंदोलन बनाने के उद्देश्य से कई नवाचारी और स्थायी पहल की गई हैं। ‘कैच द रेन’ अभियान के तहत वर्षा जल का अधिकतम संचयन और भूजल स्तर बढ़ाने के लिए शहर में अनेक महत्वपूर्ण परियोजनाएं संचालित की गई हैं।
एसएएम-2.0 योजना के अंतर्गत शहर के 10 स्थानों पर आधुनिक रिचार्ज वेल बनाए गए हैं। इनका निर्माण नेशनल रिमोट सेंसिंग सेंटर (इसरो) के तकनीकी विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में इंजेक्ट वेल तकनीक से किया गया है। इन संरचनाओं के माध्यम से वर्षा का पानी सीधे भूगर्भ में पहुंचाया जा रहा है, जिससे जल का अपव्यय रुक रहा है और भूजल स्तर में सुधार हो रहा है।
नगर निगम ने जनभागीदारी को बढ़ावा देते हुए 757 शासकीय भवनों और 971 निजी भवनों सहित कुल 1,728 रेन वाटर हार्वेस्टिंग पिट स्थापित कराए हैं। साथ ही अब प्रत्येक नए भवन निर्माण की अनुमति में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम को अनिवार्य कर दिया गया है।
इसके अलावा सामुदायिक भवनों, विद्यालयों, अतिरिक्त कक्षों, आंगनबाड़ी केंद्रों, मंगल भवनों और अन्य सार्वजनिक भवनों में भी वर्षा जल संचयन की व्यवस्था अनिवार्य की गई है। वर्तमान में 109 निर्माण कार्यों में इस व्यवस्था को शामिल किया जा चुका है।
नगर निगम ने शहर के 95 अनुपयोगी और क्षतिग्रस्त बोरवेलों को पुनर्जीवित कर उन्हें रिचार्ज संरचनाओं में बदलने की कार्ययोजना भी तैयार की है, जिससे पुराने संसाधनों का उपयोग जल संरक्षण के लिए किया जा सके।
जल संरक्षण के साथ-साथ जिले में पर्यावरण संरक्षण को भी प्राथमिकता दी जा रही है। वन विभाग द्वारा कोरबा और कटघोरा वनमंडल में बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया जा रहा है। इस वर्ष कोरबा वनमंडल में ढाई लाख पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
कलेक्टर कुणाल दुदावत के निर्देशानुसार जिले में 15 सितंबर तक “एक पेड़ माँ के नाम” अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में नगर निगम ने 18 जुलाई को “रन फॉर ग्रीन कोरबा” का आयोजन कर नागरिकों और जनप्रतिनिधियों के साथ पौधरोपण किया। वहीं बीबी-राम-जी अभियान के माध्यम से पौधों का वितरण कर शासकीय कार्यालयों में भी वृक्षारोपण को प्रोत्साहित किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री द्वारा ‘मन की बात’ में कोरबा के जल संरक्षण मॉडल का उल्लेख किए जाने को जिला प्रशासन ने स्थानीय नवाचार और जनसहभागिता की बड़ी उपलब्धि बताया है। माना जा रहा है कि कोरबा का यह मॉडल अब देश के अन्य नगरीय निकायों के लिए भी प्रेरणास्रोत बन सकता है।
कलेक्टर कुणाल दुदावत और निगमायुक्त आशुतोष पांडेय ने जिलेवासियों से अपील की है कि वे अपने घरों, संस्थानों और प्रतिष्ठानों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग की व्यवस्था अपनाएं तथा जल संरक्षण और वृक्षारोपण अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित और हरित भविष्य के निर्माण में सहयोग करें।
प्रदीप मिश्रा
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