ड्रोन की खामोश उड़ान… क्या खदान की नई पटकथा लिखी जा रही है? किसानों की महापंचायत में उठेंगे कई बड़े सवाल
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रायगढ़, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- अनिता गर्ग
एसईसीएल के ड्रोन सर्वे से दुर्गापुर-शाहपुर में बढ़ी हलचल, प्रभावित ग्रामीण बोले, पहले जवाब, फिर कोई कार्रवाई
रायगढ़ ACGN:- धरमजयगढ़ क्षेत्र के दुर्गापुर और शाहपुर गांवों में इन दिनों आसमान में उड़ते ड्रोन ने केवल तस्वीरें ही नहीं ली हैं, बल्कि ग्रामीणों के मन में कई अनुत्तरित सवाल भी छोड़ दिए हैं। आखिर यह सर्वे किस उद्देश्य से किया जा रहा है? क्या यह केवल तकनीकी प्रक्रिया है, या फिर इसके पीछे प्रस्तावित खदान विस्तार और भूमि अधिग्रहण की अगली तैयारी छिपी है? इन सवालों के स्पष्ट उत्तर अभी सामने नहीं आए हैं, लेकिन इन्हीं आशंकाओं ने किसानों को एकजुट होकर आंदोलन का रास्ता अपनाने के लिए मजबूर कर दिया है।
इसी मुद्दे को लेकर रविवार को दुर्गापुर के कीर्तन ग्राउंड में प्रभावित किसानों की महापंचायत और महा मोर्चा आयोजित किया जाएगा। इसमें दुर्गापुर, शाहपुर सहित आसपास के अनेक गांवों के सैकड़ों किसान, ग्रामीण, सामाजिक कार्यकर्ता और जनप्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है। पंचायत में आंदोलन की अगली रणनीति पर निर्णय लिया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि खदान परियोजनाओं के नाम पर इस क्षेत्र के लोग पहले भी लंबे समय तक विस्थापन, अधूरे पुनर्वास, मुआवजे और रोजगार जैसे मुद्दों से जूझते रहे हैं। उनका आरोप है कि कई बार आश्वासन मिले, बैठकें हुईं और आंदोलन भी हुए, लेकिन अधिकांश मांगों का स्थायी समाधान नहीं निकल सका। ऐसे में अचानक ड्रोन सर्वे शुरू होने से लोगों की पुरानी आशंकाएं फिर से ताजा हो गई हैं।
प्रभावित किसानों का कहना है कि यदि सर्वे केवल तकनीकी प्रक्रिया है तो इसकी पूरी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। यदि यह भविष्य में भूमि अधिग्रहण या खदान विस्तार से जुड़ा कदम है, तो सबसे पहले प्रभावित परिवारों को विश्वास में लिया जाए। उनका कहना है कि विकास कार्यों का विरोध नहीं है, लेकिन विकास की कीमत किसानों की आजीविका और सम्मान नहीं हो सकती।
किसान नेताओं ने स्पष्ट कहा है कि प्रशासन और एसईसीएल प्रबंधन पहले लिखित रूप से यह बताए कि ड्रोन सर्वे का उद्देश्य क्या है, कितनी भूमि प्रभावित होगी, पुनर्वास की नीति क्या होगी, मुआवजा किस आधार पर मिलेगा और स्थानीय युवाओं को रोजगार की क्या व्यवस्था होगी। जब तक इन सवालों के स्पष्ट और लिखित जवाब नहीं मिलते, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
रविवार की महापंचायत में आंदोलन को जिला स्तर से राज्य स्तर तक ले जाने, संयुक्त किसान संघर्ष समिति के गठन तथा आगे के कार्यक्रमों की घोषणा पर भी विचार किया जा सकता है। हालांकि इस संबंध में अंतिम निर्णय पंचायत में सर्वसम्मति से लिया जाएगा।
फिलहाल एसईसीएल अथवा जिला प्रशासन की ओर से ड्रोन सर्वे के उद्देश्य और उससे संबंधित प्रक्रिया पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में अब सभी की निगाहें रविवार की महापंचायत और उसके बाद प्रशासन की प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संवाद से समाधान निकलता है या फिर यह विरोध आने वाले दिनों में एक बड़े जनआंदोलन का रूप लेता है।
प्रदीप मिश्रा
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