कोरबा में बेशकीमती लकड़ियों का खेल! सात पेड़ों से शुरू हुई जांच, पुलिस को मिली बड़ी सफलता, अब 9 लाख की लकड़ी बरामद… क्या यह सिर्फ चोरी या बड़ा नेटवर्क?
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कोरबा, छत्तीसगढ़
By ACGN | 7647981711, 9303948009
2 लाख की चोरी… 9 लाख की बरामदगी! आखिर सीएसईबी की बेशकीमती लकड़ी किसके संरक्षण में रायपुर पहुंची?
कोरबा की सीएसईबी कॉलोनी से शुरू हुई कहानी अब पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर रही है
कोरबा ACGN:- कोरबा जिले के थाना सिविल लाइन क्षेत्र अंतर्गत सीएसईबी कॉलोनी में इमारती लकड़ी चोरी का मामला अब केवल एक आपराधिक प्रकरण नहीं रह गया है। पुलिस की कार्रवाई, एफआईआर के तथ्य और बरामदगी के आंकड़े ऐसे कई सवाल खड़े कर रहे हैं, जिनका जवाब मिलना बेहद जरूरी है। मामला जितना सामने आया है, उससे कहीं अधिक गहरा दिखाई दे रहा है।
वन परिक्षेत्र अधिकारी विक्रांता सिंह कंवर ने 15 जुलाई 2026 को थाना सिविल लाइन में लिखित रिपोर्ट दर्ज कराई। शिकायत में बताया गया कि सीएसईबी कॉलोनी के जूनियर क्लब के पास राजस्व भूमि पर अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) की अनुमति से 207 वृक्षों की कटाई की जा रही थी। 29 जून को सात पेड़ काटे गए थे और शेष कटाई का कार्य जारी था।

14 जुलाई की शाम लगभग 4:35 बजे कार्यपालन अभियंता तारामणी तिग्गा ने सूचना दी कि कटे हुए सात पेड़ों के लट्ठों को एक वाहन में भरकर ले जाया जा रहा है। जब वन विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे तो वाहन जा चुका था। पूछताछ में ठेकेदार सुनील कुमार गुप्ता ने लकड़ी को अपने वाहन से अभनपुर (रायपुर) भेजने की बात स्वीकार की। इसके बाद वन विभाग के कुदमुरा परिक्षेत्र अधिकारी विक्रांता सिंह कंवर ने करीब 2 लाख रुपये मूल्य की लकड़ी चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज कराई।

एफआईआर के आधार पर थाना सिविल लाइन पुलिस ने अपराध क्रमांक 673/2026 के तहत भारतीय न्याय संहिता की धारा 303(2), 316(5) एवं 317(2) के तहत अपराध दर्ज किया। जिसकी जानकारी अपने वरिष्ठ अधिकारियों को दी

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक सिद्धार्थ तिवारी के निर्देशन, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक लखन पटले, नगर पुलिस अधीक्षक प्रतीक चतुर्वेदी के मार्गदर्शन तथा थाना प्रभारी प्रशिक्षु डीएसपी आस्था शर्मा के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। टीम में एएसआई चंद्रपाल खांडे, आरक्षक संजय चंद्रा, आरक्षक संतोष चौधरी सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने लगातार तकनीकी एवं भौतिक साक्ष्यों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई।

जांच के दौरान पुलिस को महत्वपूर्ण जानकारी मिली कि लकड़ी कोरबा से निकलकर रायपुर जिले के अभनपुर तक पहुंच चुकी है। कार्रवाई करते हुए पुलिस ने आरोपी सुनील कुमार गुप्ता को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया, जहां से उसे न्यायिक रिमांड पर जेल भेज दिया गया।
लेकिन यहीं से शुरू होती है असली कहानी…
एफआईआर कहती है कि चोरी करीब 2 लाख रुपये की हुई। लेकिन पुलिस कार्रवाई के दौरान 20.169 घन मीटर इमारती लकड़ी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 9 लाख रुपये बताई जा रही है, बरामद होती है। साथ ही एक क्रेन भी जब्त की जाती है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब चोरी की रिपोर्ट केवल 2 लाख रुपये की थी, तो लगभग 9 लाख रुपये की लकड़ी आखिर कहां से आई?
क्या बरामद पूरी लकड़ी उसी घटना की थी?
यदि नहीं, तो बाकी लकड़ी किस स्थान से लाई गई?
क्या उसके दस्तावेज उपलब्ध हैं?
लकड़ी सैकड़ों किलोमीटर दूर कैसे पहुंच गई?
क्या उसके परिवहन की अनुमति थी? या फिर जांच के दौरान किसी बड़े नेटवर्क की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं?
सीएसईबी कॉलोनी में वर्षों पुराने साल, सरई और अन्य बेशकीमती इमारती वृक्ष काटे जा रहे थे। ऐसे वृक्षों की कटाई, भंडारण, नापजोख, परिवहन और नीलामी की पूरी प्रक्रिया शासन द्वारा निर्धारित होती है।
फिर सवाल उठता है, यदि पूरी प्रक्रिया नियमानुसार चल रही थी, तो लकड़ी कोरबा से लगभग 250 किलोमीटर दूर अभनपुर तक कैसे पहुंच गई?
क्या रास्ते में किसी ने जांच नहीं की?
क्या परिवहन से जुड़े दस्तावेज किसी ने नहीं देखे?
या फिर पूरा तंत्र केवल कागजों तक सीमित रह गया?
क्या यह सिर्फ शुरुआत है? पुलिस की विवेचना अभी जारी है…क्या अब कोरबा पश्चिम दर्री स्थिति सीएसईबी कॉलोनी एच टी पी पी की भी जांच जरूरी?
यही वह बिंदु है जहां यह मामला और गंभीर हो जाता है। फिलहाल पुलिस की विवेचना जारी है और माना जा रहा है कि जांच आगे बढ़ने के साथ इस पूरे मामले की कई और परतें सामने आ सकती हैं। जिस तरह एफआईआर में लगभग 2 लाख रुपये की लकड़ी चोरी का उल्लेख है और कार्रवाई में करीब 9 लाख रुपये मूल्य की 20.169 घन मीटर इमारती लकड़ी तथा एक क्रेन बरामद हुई है, उसने स्वाभाविक रूप से इस पूरे घटनाक्रम को और गंभीर बना दिया है।
अब जांच का दायरा केवल सीएसईबी कॉलोनी कोरबा तक सीमित नहीं रहना चाहिए। कोरबा पश्चिम में भी 1320 मेगावाट ताप विद्युत परियोजना के विस्तार के दौरान बड़ी संख्या में पुराने सीएसईबी आवासों को ध्वस्त किया गया और अनेक बेशकीमती इमारती वृक्ष काटे गए थे।
क्षेत्र के स्थानीय लोगों के बीच लंबे समय से यह चर्चा रही कि जब आस पास के श्रमिक बस्तियों के लोग घरेलू उपयोग के लिए कटे हुए पेड़ों की टहनियां और अवशेष लकड़ी लेने पहुंचते थे, तब उन्हें कुछ स्थानों पर करीब 5 रुपये प्रति किलो की दर से लकड़ी दिए जाने की बातें सुनने को मिलती थीं। यहां के देश कीमती पेड़ यदि काटे गए तो वह अभी कहां है चर्चाओं की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है, लेकिन वर्तमान मामले के बाद ऐसे दावों की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक प्रतीत होती है।
इसी तरह एक और महत्वपूर्ण प्रश्न पुराने सीएसईबी क्वार्टरों के ध्वस्तीकरण से निकलने वाले लोहे के कबाड़ को लेकर भी है। हजारों क्वार्टरों से निकले लोहे के दरवाजे, खिड़कियां, ग्रिल, सरिए, पाइप, विद्युत सामग्री तथा अन्य कबाड़ का पूरा लेखा-जोखा किसके पास है? कितनी सामग्री नीलाम हुई? कितनी विभाग के अभिलेखों में दर्ज है? और कितनी वास्तव में अपने निर्धारित गंतव्य तक पहुंची? यह भी अब जांच का विषय बनता जा रहा है।
कोरबा पश्चिम क्षेत्र में 1320 मेगावाट ताप विद्युत संयंत्र विस्तार परियोजना के लिए बड़ी संख्या में पुराने सीएसईबी आवासों को तोड़ा गया। उसी दौरान बड़ी मात्रा में इमारती वृक्ष भी काटे गए।
स्थानीय स्तर पर लंबे समय से यह चर्चा रही कि कुछ लकड़ियां बेहद कम कीमत पर आम लोगों तक भी पहुंचीं। इन दावों की आधिकारिक पुष्टि होना अभी बाकी है,
लेकिन वर्तमान प्रकरण के बाद यह स्वाभाविक प्रश्न उठ रहा है कि क्या कोरबा पश्चिम के एचटीपीपी कॉलोनी में निकली लकड़ियों का भी पूरा रिकॉर्ड सार्वजनिक है?
कितनी लकड़ी विभाग के पास है?
कितनी नीलाम हुई?
और कितनी अपने वास्तविक गंतव्य तक पहुंची?
यदि वर्तमान मामले में जांच अभनपुर तक पहुंच सकती है, तो क्या अन्य स्थानों की भी जांच होनी चाहिए?
क्या यह पूरा काम कोई अकेला व्यक्ति कर सकता है?या फिर इसके पीछे कई स्तरों पर काम करने वाला एक संगठित तंत्र सक्रिय है?
इस प्रश्न का उत्तर अब पुलिस विवेचना ही दे सकती है।
जांच से खुल सकते हैं कई राज
पुलिस ने अब तक आरोपी की गिरफ्तारी, लकड़ी और क्रेन की बरामदगी जैसी महत्वपूर्ण कार्रवाई की है। लेकिन यह मामला यहीं समाप्त होता नहीं दिख रहा।
बरामदगी और एफआईआर के आंकड़ों में अंतर स्वयं कई नए सवाल पैदा कर रहा है। यदि विवेचना इसी गंभीरता से आगे बढ़ती रही तो संभव है कि केवल एक चोरी का नहीं, बल्कि इमारती लकड़ी के बड़े नेटवर्क का भी खुलासा हो।
अब निगाहें इस बात पर हैं कि जांच केवल आरोपी तक सीमित रहती है या फिर उन सभी कड़ियों तक पहुंचती है, जिनके बिना इतनी बड़ी मात्रा में लकड़ी का परिवहन संभव नहीं माना जा सकता।
यह प्रश्न केवल लकड़ी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि सरकारी संपत्ति की सुरक्षा, उसके संरक्षण और पारदर्शी प्रबंधन से भी जुड़े हैं।
अब सभी की निगाहें पुलिस विवेचना पर टिकी हैं। यदि जांच पूरी निष्पक्षता और गहराई से आगे बढ़ती है, तो संभव है कि यह मामला केवल एक लकड़ी चोरी का न रहकर सरकारी संपत्तियों के प्रबंधन से जुड़े कई अन्य पहलुओं पर भी प्रकाश डाले।
फिलहाल पुलिस की विवेचना जारी है। आगे जांच में कौन-कौन से तथ्य सामने आते हैं, इस पर पूरे जिले की नजर बनी हुई है।
(नोट : समाचार में उल्लिखित कुछ बिंदु स्थानीय स्तर पर प्रचलित चर्चाओं और उठ रहे सार्वजनिक प्रश्नों के रूप में प्रस्तुत हैं। इनकी आधिकारिक पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा की जानी शेष है। किसी भी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध कोई निष्कर्ष तब तक नहीं निकाला जाना चाहिए जब तक जांच पूरी न हो जाए।)
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