धान खरीदी से पहले फिर गरजे सहकारी कर्मचारी, तूता में हुंकार, “वादे निभाओ, नहीं तो होगा आर-पार का आंदोलन”
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रायपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
हजारों कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर सड़क पर, सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण और लंबित मांगों को लेकर सरकार को चेतावनी
रायपुर ACGN :- धान खरीदी सत्र शुरू होने से पहले एक बार फिर प्रदेश की सहकारी व्यवस्था से जुड़े कर्मचारी और कंप्यूटर ऑपरेटर अपनी मांगों को लेकर सड़क पर उतर आए हैं। सोमवार को राजधानी रायपुर के तूता धरना स्थल पर छत्तीसगढ़ सहकारी समिति कर्मचारी संघ (पंजीयन क्रमांक-6685) एवं छत्तीसगढ़ समर्थन मूल्य धान खरीदी कंप्यूटर ऑपरेटर संघ के संयुक्त तत्वावधान में विशाल धरना-प्रदर्शन, रैली और ज्ञापन कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रदेश के लगभग सभी जिलों से पहुंचे हजारों कर्मचारियों ने सरकार को साफ संदेश दिया कि अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि मांगों पर ठोस निर्णय चाहिए।

धरना स्थल पर प्रदर्शनकारियों ने कहा कि समर्थन मूल्य पर धान खरीदी जैसी महत्वपूर्ण व्यवस्था उन्हीं के कंधों पर चलती है, लेकिन वर्षों से सेवा सुरक्षा, नियमितीकरण, वेतन संबंधी समस्याएं और अन्य लंबित मांगें फाइलों में दबकर रह गई हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि चुनाव के समय किए गए वादों को अब तक अमलीजामा नहीं पहनाया गया।

धरना समाप्त होने के बाद कर्मचारियों ने तूता में जोरदार रैली निकाली। “हल्ला बोल-हल्ला बोल”, “हमारी मांगे पूरी करो”, “छत्तीसगढ़ सरकार होश में आओ”, “वादे निभाओ” जैसे नारों से पूरा परिसर गूंज उठा। इसके बाद शासन के नाम ज्ञापन सौंपकर जल्द समाधान की मांग की गई।

संघ के पदाधिकारियों ने दो टूक कहा कि यदि सरकार ने समय रहते मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में और अधिक व्यापक बनाया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन की होगी।
पिछले साल एस्मा लगा, इस साल क्या होगा समाधान?
इस आंदोलन ने पिछले वर्ष की याद भी ताजा कर दी है। धान खरीदी शुरू होने से पहले सहकारी समिति कर्मचारी आंदोलन पर उतर आए थे। उस समय सरकार ने धान खरीदी प्रभावित होने की आशंका के चलते आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) लागू कर कर्मचारियों को वापस काम पर लौटने के निर्देश दिए थे। इसके बाद धान खरीदी तो शुरू हो गई, लेकिन कर्मचारियों का कहना है कि उनकी मूल समस्याएं आज भी जस की तस बनी हुई हैं।

अब जबकि एक बार फिर धान खरीदी का मौसम करीब है, बड़ा सवाल यह है कि क्या इस बार सरकार कर्मचारियों की मांगें पूरी करेगी, या फिर प्रदेश को एक और बड़े आंदोलन और धान खरीदी व्यवस्था पर संकट का सामना करना पड़ेगा? आने वाले दिनों में सरकार का रुख इस पूरे मामले की दिशा तय करेगा।
प्रदीप मिश्रा
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