संस्कारों से ही सशक्त होगा समाज, युवा बनें राष्ट्र निर्माण के वाहक
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धर्म श्रृंखला
राजनांदगांव छत्तीसगढ़
By ACGN 7647 98171193039 48009
आज का समय केवल तकनीकी प्रगति का नहीं, बल्कि संस्कारों की परीक्षा का भी समय है। आधुनिक जीवन की भागदौड़ में भौतिक सुख-सुविधाएँ तो बढ़ी हैं, लेकिन मानवीय संवेदनाएँ, नैतिक मूल्य और पारिवारिक संस्कार धीरे-धीरे कमजोर होते दिखाई दे रहे हैं। ऐसे दौर में संत-महात्माओं का मार्गदर्शन समाज को नई दिशा देने का कार्य करता है।
छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ के समीप स्थित मुरमुंडा आश्रम के महंत श्री त्यागी जी महाराज निरंतर समाज में सदाचार, सेवा, संस्कार और आध्यात्मिक जीवन का संदेश देते आ रहे हैं। उनका मानना है कि किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी शक्ति उसके संस्कारित नागरिक होते हैं। यदि युवाओं में चरित्र, अनुशासन और सेवा की भावना जागृत हो जाए तो समाज की अनेक समस्याएँ स्वतः समाप्त हो सकती हैं।
महंत श्री त्यागी जी महाराज युवाओं से आह्वान करते हैं कि वे अपने जीवन का लक्ष्य केवल धन अर्जित करना न रखें, बल्कि अपने माता-पिता, गुरु, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने कर्तव्यों को भी समझें। शिक्षा तभी सार्थक है जब वह व्यक्ति को विनम्र, जिम्मेदार और चरित्रवान बनाए।
उन्होंने समाज में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति, हिंसा, अश्लीलता, सोशल मीडिया के दुरुपयोग तथा नैतिक पतन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि युवा पीढ़ी को इन बुराइयों से दूर रहकर आत्मविश्वास, संयम और सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए। क्षणिक आकर्षण जीवन को भटका सकता है, जबकि अच्छे संस्कार जीवनभर सम्मान दिलाते हैं।
महंत श्री त्यागी जी महाराज का कहना है कि भारतीय संस्कृति “वसुधैव कुटुम्बकम्” और “सर्वे भवन्तु सुखिनः” का संदेश देती है। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र से ऊपर उठकर मानवता की सेवा को अपना धर्म मानना चाहिए। समाज तभी मजबूत होगा जब उसमें प्रेम, सहयोग, भाईचारा और परस्पर सम्मान की भावना विकसित होगी।
वे अभिभावकों से भी आग्रह करते हैं कि बच्चों को केवल आधुनिक शिक्षा ही न दें, बल्कि उन्हें धार्मिक, सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों से भी जोड़ें। घर का वातावरण, माता-पिता का व्यवहार और गुरुजनों का मार्गदर्शन ही बच्चों के भविष्य का वास्तविक निर्माण करता है।
महंत श्री त्यागी जी महाराज का यह भी संदेश है कि प्रकृति की रक्षा, गौ सेवा, वृक्षारोपण, जल संरक्षण और जरूरतमंदों की सहायता प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व है। धर्म केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है, बल्कि सेवा, करुणा, सत्य, ईमानदारी और सदाचार का आचरण ही सच्चा धर्म है।
आज आवश्यकता इस बात की है कि समाज के प्रत्येक वर्ग, विशेषकर युवा पीढ़ी, अपने जीवन में अनुशासन, सेवा, संस्कार और राष्ट्रभक्ति को अपनाए। जब युवा सही दिशा में आगे बढ़ेंगे, तभी परिवार मजबूत होंगे, समाज सशक्त बनेगा और राष्ट्र विकास के पथ पर और अधिक गति से अग्रसर होगा।
महंत श्री त्यागी जी महाराज का संदेश
“संस्कारों से ही चरित्र बनता है, चरित्र से समाज और समाज से राष्ट्र मजबूत होता है। आइए, हम सभी मिलकर सदाचार, सेवा, शिक्षा और संस्कार के मार्ग पर चलने का संकल्प लें।”
प्रदीप मिश्रा (प्रधान संपादक)
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