भारतमाला परियोजना में बड़ा खुलासा: वन अधिकार कानून की अनदेखी, मंदिर की जमीन और पुजारी का अधिकार छीने जाने का आरोप
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रायगढ़, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संजय जेठवानी
भारतमाला परियोजना पर बड़ा विवाद: आर.ओ.डब्ल्यू. से बाहर निर्माण का आरोप, वन अधिकार अधिनियम की अनदेखी का दावा
मंदिर की संपत्ति ध्वस्त, पुजारी परिवार के अधिकार और आजीविका पर संकट; प्रशासन से निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग
रायगढ़ ACGN :- रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र अंतर्गत सिसरिंगा घाट में निर्माणाधीन भारतमाला सड़क परियोजना को लेकर गंभीर विवाद सामने आया है। स्थानीय ग्रामीणों, मंदिर प्रबंधन और प्रभावित परिवार ने आरोप लगाया है कि परियोजना के निर्माण के दौरान निर्धारित राइट ऑफ वे (आर.ओ.डब्ल्यू.) सीमा से बाहर जाकर कार्य किया गया तथा मंदिर की संपत्तियों, वन भूमि और वन अधिकार पट्टा प्राप्त भूमि को भी प्रभावित किया गया। आरोप है कि इस पूरी प्रक्रिया में आवश्यक कानूनी प्रावधानों और वन अधिकार अधिनियम के नियमों का पालन नहीं किया गया।

मामला धरमजयगढ़ क्षेत्र के बंजारी मंदिर से जुड़ा हुआ है, जहां वर्षों से मंदिर की सेवा करने वाला पुजारी परिवार आज अपने अधिकार और आजीविका दोनों को बचाने के लिए संघर्ष कर रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान मंदिर परिसर के आसपास स्थित सैकड़ों पेड़ों को हटाया गया तथा मंदिर की स्थायी संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचाया गया। उनका आरोप है कि यह कार्रवाई बिना वैधानिक प्रक्रिया पूरी किए की गई।

वन अधिकार पट्टा होने के बावजूद भूमि पर निर्माण का आरोप
बंजारी मंदिर के पुजारी नरसिंह पिता जीतन ने बताया कि उन्हें शासन द्वारा वन अधिकार अधिनियम के तहत वन कक्ष क्रमांक 389 में लगभग 0.209 हेक्टेयर वन भूमि का व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टा प्रदान किया गया है। उनका कहना है कि वे दशकों से इसी भूमि पर निवास कर मंदिर की सेवा करते आ रहे हैं और इसी से उनके परिवार का जीवन-यापन चलता है।
पुजारी का आरोप है कि निर्माण एजेंसी द्वारा उनकी वन अधिकार पट्टा भूमि पर बिना अधिग्रहण और बिना अनुमति निर्माण कार्य कराया गया। इसके बदले उन्हें किसी प्रकार का मुआवजा भी नहीं दिया गया। उनका कहना है कि स्थानीय प्रशासन ने मुआवजा दिलाने का आश्वासन तो दिया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।

परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
पुजारी की पत्नी ने आरोप लगाया कि निर्माण एजेंसी के प्रतिनिधियों ने पुलिस कर्मियों की मौजूदगी में उनकी भूमि पर जबरन कार्य कराया। उन्होंने अपने दावे के समर्थन में कुछ तस्वीरें भी उपलब्ध कराई हैं। उनका कहना है कि सड़क निर्माण के बाद उनका आशियाना और आजीविका दोनों प्रभावित हुए हैं तथा अब पूरा परिवार असुरक्षा और आर्थिक संकट के बीच जीवन यापन करने को मजबूर है।
आर.ओ.डब्ल्यू. सीमा से बाहर कार्य करने का दावा
स्थानीय लोगों का कहना है कि भारतमाला परियोजना के लिए जितनी भूमि अधिग्रहित की गई थी, उससे अधिक क्षेत्र में निर्माण कार्य किया गया। आरोप है कि निर्धारित राइट ऑफ वे के बाहर जाकर मंदिर की भूमि, वन संपदा और अन्य स्थायी संरचनाओं को हटाया गया। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह न केवल परियोजना के क्रियान्वयन पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है, बल्कि संबंधित नियमों के उल्लंघन का भी मामला बन सकता है।

दस्तावेजों से उठे कई सवाल
प्राप्त जानकारी के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) इकाई कोरबा से जुड़े दस्तावेजों तथा निर्माण एजेंसी द्वारा हाल में एसडीएम को भेजे गए पत्र में ऐसे तथ्य सामने आए हैं, जिनसे परियोजना के क्रियान्वयन को लेकर नए सवाल खड़े हुए हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि पहले उन्हें बताया गया था कि उनकी भूमि परियोजना क्षेत्र में शामिल नहीं है, लेकिन बाद में उसी भूमि पर निर्माण कार्य कर दिया गया।
मंदिर की संपत्तियों को भी पहुंचा नुकसान
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण के दौरान ब्लास्टिंग और भारी मशीनों के उपयोग से बंजारी मंदिर परिसर की संपत्तियों को भी नुकसान पहुंचा। उनका आरोप है कि धार्मिक स्थल की सुरक्षा और संरक्षण को लेकर आवश्यक सावधानी नहीं बरती गई, जिससे श्रद्धालुओं की भावनाएं भी आहत हुई हैं।
वन विभाग ने जांच का दिया भरोसा
धरमजयगढ़ वनमंडलाधिकारी जितेंद्र कुमार उपाध्याय ने कहा है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध तथ्यों की विधिवत जांच कराई जाएगी तथा जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
प्रभावित परिवार और ग्रामीणों की मांग
ग्रामीणों और प्रभावित परिवार ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष जांच कराने, आर.ओ.डब्ल्यू. सीमा का पुनः सत्यापन करने, वन अधिकार अधिनियम के उल्लंघन की जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों एवं एजेंसी के विरुद्ध कार्रवाई करने तथा पुजारी परिवार को उचित मुआवजा और पुनर्वास उपलब्ध कराने की मांग की है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विकास परियोजनाएं निश्चित रूप से आवश्यक हैं, लेकिन विकास की कीमत किसी गरीब परिवार के अधिकार, आजीविका और धार्मिक आस्था को कुचलकर नहीं चुकाई जानी चाहिए। उनका कहना है कि यदि नियमों का पालन नहीं हुआ है तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
( यह समाचार उपलब्ध जानकारी, स्थानीय ग्रामीणों, प्रभावित परिवार एवं संबंधित अधिकारियों के बयानों पर आधारित है। निर्माण एजेंसी एवं अन्य संबंधित पक्षों का विस्तृत पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।)
प्रदीप मिश्रा
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