रामगढ़ महोत्सव: जहां इतिहास, आस्था और संस्कृति का हजारों वर्षों पुराना वैभव होता है सजीव
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सरगुजा, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू, अंबिकापुर
विश्व की प्राचीनतम नाट्यशाला सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाओं की अनमोल धरोहर से रूबरू कराता है रामगढ़, सरगुजा की गौरवशाली विरासत का जीवंत उत्सव
सरगुजा। छत्तीसगढ़ का सरगुजा अंचल प्राकृतिक सौंदर्य के साथ-साथ अपनी समृद्ध ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और पौराणिक विरासत के लिए देशभर में विशेष पहचान रखता है। इसी गौरवशाली विरासत का सबसे अनमोल अध्याय है उदयपुर विकासखंड स्थित रामगढ़, जहां आयोजित होने वाला रामगढ़ महोत्सव प्रदेश की हजारों वर्षों पुरानी संस्कृति, कला और इतिहास को जीवंत रूप प्रदान करता है।

छत्तीसगढ़ पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मस्व मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि रामगढ़ महोत्सव केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्राचीन सभ्यता, पुरातत्व, कला और आस्था से जुड़ने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। यह आयोजन नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली विरासत से परिचित कराने का माध्यम बन रहा है।

रामगढ़ पर्वत की पश्चिमी ढलान पर स्थित सीताबेंगरा और जोगीमारा गुफाएं भारतीय इतिहास की अमूल्य धरोहर मानी जाती हैं। इन गुफाओं में मौजूद शिल्पकला, स्थापत्य, शिलालेख और प्राचीन चित्र भारतीय सभ्यता के विकास की कहानी बताते हैं। यही कारण है कि देश-विदेश के इतिहासकार, पुरातत्वविद और शोधकर्ता यहां अध्ययन के लिए पहुंचते हैं।

स्थानीय मान्यताओं के अनुसार रामगढ़ क्षेत्र का संबंध रामायणकालीन परंपराओं से भी जुड़ा हुआ है। कहा जाता है कि वनवास के दौरान भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण ने इस क्षेत्र में समय बिताया था। जिस गुफा को माता सीता के निवास स्थान से जोड़ा जाता है, वह आज सीताबेंगरा के नाम से प्रसिद्ध है। धार्मिक आस्था के कारण यह स्थान श्रद्धालुओं के लिए भी विशेष महत्व रखता है।

सीताबेंगरा गुफा भारतीय रंगमंच के इतिहास में अपना अलग स्थान रखती है। इसकी संरचना, बैठने की व्यवस्था और प्राकृतिक मंच जैसी बनावट के कारण इसे भारत की प्राचीनतम नाट्यशालाओं में से एक माना जाता है। लगभग 45 फीट गहरी यह गुफा प्राचीन भारतीय कला और रंगमंच परंपरा का अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत करती है।
सीताबेंगरा के समीप स्थित जोगीमारा गुफा प्राचीन भारतीय चित्रकला की अनमोल विरासत है। यहां तीसरी-दूसरी शताब्दी ईसा पूर्व के भित्तिचित्रों के अवशेष मिले हैं। इन चित्रों में मानव आकृतियां, नृत्य, संगीत, पशु-पक्षी और सामाजिक जीवन के दृश्य दिखाई देते हैं, जो उस समय की कला और संस्कृति की समृद्धि को दर्शाते हैं।
रामगढ़ की पहचान हाथीपोल नामक प्राकृतिक सुरंग से भी है। लगभग 180 फीट लंबी यह सुरंग अपनी अनोखी बनावट के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती है। प्राकृतिक जल प्रवाह से बनी यह संरचना रामगढ़ क्षेत्र के प्राकृतिक सौंदर्य को और खास बनाती है।
इस क्षेत्र में मौजूद प्राचीन मंदिरों, मूर्तियों और स्थापत्य अवशेषों से यहां की ऐतिहासिक समृद्धि का अंदाजा लगाया जा सकता है। भगवान विष्णु, श्रीराम, लक्ष्मण, हनुमान और देवी की प्राचीन प्रतिमाएं, नक्काशीदार स्तंभ और मंदिरों की कला तत्कालीन शिल्पकारों की प्रतिभा को प्रदर्शित करती हैं।
रामगढ़ अब इतिहास, पुरातत्व, संस्कृति और पर्यटन का प्रमुख केंद्र बन चुका है। राज्य सरकार द्वारा आयोजित रामगढ़ महोत्सव इस धरोहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।
रामगढ़ केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि सरगुजा की हजारों वर्षों पुरानी सांस्कृतिक चेतना, कला, आस्था और गौरवशाली इतिहास का जीवंत प्रतीक है। सीताबेंगरा की परंपराएं, जोगीमारा की चित्रकला और हाथीपोल की प्राकृतिक संरचना मिलकर यह संदेश देती हैं कि सरगुजा की विरासत जितनी प्राचीन है, उतनी ही प्रेरणादायी भी।
प्रदीप मिश्रा
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