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जप्त बोर खनन वाहन बना रहस्य, प्रशासनिक कार्यवाही पर उठे गंभीर सवाल

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रायगढ़, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- संजय जेठवानी

पंचायत कह रही वाहन थाना को सौंपा, थाना कर रहा इंकार; आखिर जप्त वाहन गया कहां?

धरमजयगढ़ ACGN:- धरमजयगढ़ क्षेत्र के ग्राम कमोशीनडाड में अवैध बोर खनन के मामले में जप्त किया गया वाहन अब प्रशासनिक व्यवस्था के लिए ही एक बड़ी पहेली बन गया है। लगभग एक माह पूर्व प्रशासन द्वारा की गई कार्रवाई के बाद जप्त वाहन की वर्तमान स्थिति को लेकर विरोधाभासी दावे सामने आने से पूरे मामले पर सवाल उठने लगे हैं। पंचायत और पुलिस के अलग-अलग बयानों ने इस मामले को और अधिक उलझा दिया है, जिससे प्रशासनिक कार्यप्रणाली की पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न लग गए हैं।


जानकारी के अनुसार 7 मई 2026 को ग्राम कमोशीनडाड में बिना वैधानिक अनुमति के बोर खनन किए जाने की शिकायत प्रशासन को प्राप्त हुई थी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए कापू तहसीलदार ने मौके पर पहुंचकर जांच की और बोर खनन में प्रयुक्त वाहन को जप्त कर कार्रवाई की। प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत उक्त वाहन को ग्राम पंचायत कमोशीनडाड की सुपुर्दगी में रखा गया था।
मामला तब पेचीदा हो गया जब जप्त वाहन की वर्तमान स्थिति को लेकर अलग-अलग दावे सामने आने लगे। ग्राम पंचायत कमोशीनडाड के सरपंच नेहरूलाल कुजूर का कहना है कि जिस रात वाहन जप्त किया गया था, उसी रात वाहन संचालक वाहन को लेकर चले गए थे। सरपंच के अनुसार वाहन की चाबी उनके पास सुरक्षित थी, बावजूद इसके वाहन वहां से हटा लिया गया। उन्होंने बताया कि इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी तत्काल कापू तहसीलदार को दे दी गई थी।


सरपंच का यह भी दावा है कि तहसीलदार के निर्देशानुसार मई माह के अंतिम सप्ताह में उन्होंने वाहन से संबंधित चाबी एवं आवश्यक जानकारी कापू थाना को सौंप दी थी। उनका कहना है कि पंचायत ने अपनी जिम्मेदारी का निर्वहन करते हुए प्रशासन को पूरी जानकारी उपलब्ध करा दी थी।
वहीं दूसरी ओर कापू थाना प्रभारी इगेश्वर यादव ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। थाना प्रभारी का कहना है कि थाना में न तो कोई जप्त वाहन जमा कराया गया है और न ही वाहन की कोई औपचारिक सुपुर्दगी पुलिस को दी गई है। थाना प्रभारी के इस बयान के बाद पूरा मामला और अधिक उलझ गया है।
अब सबसे बड़ा सवाल यह खड़ा हो गया है कि प्रशासन द्वारा जप्त किया गया वाहन आखिर है कहां? यदि सरपंच के अनुसार वाहन पंचायत के कब्जे से निकल गया था और बाद में मामला पुलिस तक पहुंचा, तो उसकी आधिकारिक जानकारी और रिकॉर्ड कहां हैं? वहीं यदि पुलिस वाहन या उससे संबंधित किसी भी सुपुर्दगी से इनकार कर रही है, तो जप्त वाहन की निगरानी और सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी थी?


स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों के बीच भी इस मामले को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। लोगों का कहना है कि जब प्रशासन किसी वाहन को जप्त करता है तो उसकी सुरक्षा, निगरानी और दस्तावेजी रिकॉर्ड सुनिश्चित किया जाना चाहिए। यदि जप्त वाहन की स्थिति ही स्पष्ट नहीं है तो इससे पूरी कार्रवाई की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों का यह भी कहना है कि यदि जप्त वाहन वास्तव में पंचायत के कब्जे से हटाया गया था तो उस समय संबंधित अधिकारियों द्वारा क्या कार्रवाई की गई, यह भी जांच का विषय है। वहीं यदि वाहन को कहीं और स्थानांतरित किया गया था तो उसका रिकॉर्ड सार्वजनिक किया जाना चाहिए ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो सके।
मामले ने अब प्रशासनिक जवाबदेही और निगरानी व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। एक ओर पंचायत अपने स्तर पर जिम्मेदारी पूरी करने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर पुलिस ऐसे किसी हस्तांतरण से इंकार कर रही है। ऐसे में जप्त वाहन का रहस्य लगातार गहराता जा रहा है।
अब क्षेत्रवासियों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हुई हैं। लोगों की मांग है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर यह स्पष्ट किया जाए कि जप्त वाहन की वास्तविक स्थिति क्या है, वह किसके कब्जे में है और यदि वाहन गायब हुआ है तो इसके लिए जिम्मेदार कौन है। जब तक इन सवालों के जवाब सामने नहीं आते, तब तक यह मामला प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता रहेगा।

प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर। जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़।

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