खाकी पर सवाल: साथी आरक्षक की मौत के 126 दिन बाद भी खाली हाथ पुलिस, न्याय की आस में भटक रहा परिवार
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
संवाददाता :- सौरभ साहू
आरक्षक अभय पाण्डेय की मौत की गुत्थी अब तक अनसुलझी, परिजनों ने जांच अधिकारी पर आरोपी को बचाने का लगाया आरोप
सूरजपुर ACGN:- कर्तव्य निभाकर घर लौट रहे आरक्षक अभय कुमार पाण्डेय की सड़क दुर्घटना में हुई दर्दनाक मौत के 126 दिन बीत जाने के बाद भी मामले में ठोस कार्रवाई नहीं होने से परिजनों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। न्याय की उम्मीद लगाए बैठे परिवार ने अब पुलिस जांच की निष्पक्षता पर ही सवाल खड़े कर दिए हैं। परिजनों का आरोप है कि मामले की जांच में गंभीर लापरवाही बरती गई और आरोपी वाहन चालक को बचाने का प्रयास किया गया।
जानकारी के अनुसार 2 फरवरी 2026 की रात करीब 8 बजे ड्यूटी से लौट रहे आरक्षक अभय कुमार पाण्डेय को एक तेज रफ्तार पिकअप वाहन ने टक्कर मार दी थी, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना के बाद सूरजपुर पुलिस ने जांच शुरू तो की, लेकिन चार महीने से अधिक समय गुजर जाने के बाद भी घटना में शामिल वाहन और चालक के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई नहीं हो सकी है।
मृतक के परिजनों का दावा है कि घटना के तत्काल बाद एक प्रत्यक्षदर्शी ने पुलिस को फोन पर पूरी जानकारी दी थी। इसके बावजूद उसका बयान समय पर दर्ज नहीं किया गया। परिवार का आरोप है कि प्रत्यक्षदर्शियों ने उत्तर प्रदेश नंबर की पिकअप का जिक्र किया था, लेकिन जांच को उस दिशा में गंभीरता से आगे नहीं बढ़ाया गया।
परिजनों ने जांच अधिकारी पर आरोप लगाया है कि संदिग्ध वाहन और चालक तक पहुंचने के बावजूद कार्रवाई को कमजोर किया गया। उनका कहना है कि यदि मामले की शुरुआत से ही निष्पक्ष और गंभीर जांच होती तो अब तक दोषी कानून के शिकंजे में होता।
न्याय के इंतजार में एक परिवार – आरक्षक अभय पाण्डेय के निधन के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। एक मां ने अपना बेटा खोया, पिता ने अपना सहारा, पत्नी ने अपना जीवनसाथी और बच्चों ने अपने पिता को। परिवार का कहना है कि जिस पुलिस विभाग की सेवा अभय ने पूरी निष्ठा से की, आज उसी विभाग से उन्हें न्याय की उम्मीद है।
परिजनों ने सवाल उठाया है कि यदि एक पुलिसकर्मी की मौत के मामले में भी समयबद्ध और प्रभावी जांच नहीं हो पा रही है, तो आम नागरिकों को न्याय मिलने की उम्मीद कैसे की जा सकती है।
तकनीक और जांच व्यवस्था पर उठे सवाल – मामले में शहर और आसपास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों, तकनीकी साक्ष्यों तथा अन्य जांच संसाधनों के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि आधुनिक तकनीक के दौर में एक सड़क दुर्घटना के आरोपी तक नहीं पहुंच पाना जांच प्रणाली की कार्यशैली पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
उग्र आंदोलन की चेतावनी — मृतक आरक्षक के परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने चेतावनी दी है कि यदि मामले में जल्द निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं की गई, तो वे बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाने को मजबूर होंगे। उन्होंने उच्च अधिकारियों से मामले की पुनः समीक्षा कर किसी सक्षम अधिकारी से जांच कराने की मांग की है।
क्या आरक्षक अभय पाण्डेय के परिवार को न्याय मिलेगा? क्या 126 दिनों से लंबित जांच में अब कोई ठोस प्रगति होगी? और यदि एक पुलिसकर्मी के मामले में ही जवाबदेही तय नहीं हो पा रही है, तो आम जनता का विश्वास व्यवस्था पर कैसे कायम रहेगा?
प्रदीप मिश्रा
निष्पक्ष, निर्भीक और सच्ची खबर, हर खबर पर तिरछी नजर। जनहित के प्रति समर्पित पत्रकारिता के साथ देश में तेजी से बढ़ता विश्वसनीय वेब पोर्टल अंजोर छत्तीसगढ़ न्यूज़।
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