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मरणासन्न कथन पर रेंज स्तरीय कार्यशाला आयोजित, विवेचना को त्रुटिहीन बनाने पर जोर

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बिलासपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

बिलासपुर रेंज के 200 पुलिस अधिकारियों को मिला विशेष प्रशिक्षण, सजा प्रतिशत बढ़ाने के लिए दिए गए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश

बिलासपुर ACGN:- गंभीर अपराधों की विवेचना को अधिक प्रभावी, त्रुटिरहित और न्यायालयीन प्रक्रिया के अनुरूप बनाने के उद्देश्य से बिलासपुर रेंज में ‘मरणासन्न कथन’ (डाइंग डिक्लेरेशन) विषय पर एक दिवसीय ऑनलाइन कार्यशाला का आयोजन किया गया। पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर रेंज श्री राम गोपाल गर्ग के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यशाला में रेंज के विभिन्न जिलों से लगभग 200 पुलिस अधिकारियों एवं कर्मचारियों ने भाग लिया।


कार्यशाला का संचालन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली श्री भोजराम पटेल द्वारा किया गया। इस अवसर पर विषय विशेषज्ञ एवं शासकीय अधिवक्ता मुंगेली श्री रजनीकांत ठाकुर को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। कार्यशाला में मरणासन्न कथन की कानूनी प्रक्रिया, सावधानियों और विवेचकों के लिए आवश्यक दिशा-निर्देशों पर विस्तार से जानकारी दी गई।


कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पुलिस महानिरीक्षक श्री राम गोपाल गर्ग ने कहा कि किसी भी गंभीर अपराध की विवेचना में पीड़ित का मृत्यु पूर्व कथन और डीएनए सहित भौतिक साक्ष्यों का सही संकलन अपराधियों को सजा दिलाने में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने कहा कि कई मामलों में छोटी-छोटी प्रक्रियागत त्रुटियों का लाभ आरोपियों को मिल जाता है, इसलिए विवेचना को कानूनी रूप से मजबूत बनाना आवश्यक है।
शासकीय अधिवक्ता श्री रजनीकांत ठाकुर ने प्रशिक्षण के दौरान भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) 2023 की धारा 26 के तहत मरणासन्न कथन की कानूनी महत्ता पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कार्यपालिक दंडाधिकारी द्वारा प्रश्नोत्तर शैली में दर्ज किया गया मृत्युकालिक कथन न्यायालय में अत्यंत महत्वपूर्ण और विश्वसनीय साक्ष्य माना जाता है।
कार्यशाला में विवेचकों को यह भी बताया गया कि बयान दर्ज करने से पहले और बाद में चिकित्सक द्वारा पीड़ित के मानसिक रूप से स्वस्थ होने का प्रमाणपत्र लेना अनिवार्य है। उन्होंने हालिया न्यायिक मामलों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस प्रक्रिया में चूक होने पर न्यायालय द्वारा दोषसिद्धि प्रभावित हो सकती है।


प्रशिक्षण के दौरान विवेचना से जुड़े कई व्यावहारिक पहलुओं पर भी चर्चा हुई। अधिकारियों को चालान तैयार करते समय कॉपी-पेस्ट से बचने, एफएसएल रिपोर्ट में रक्त समूह के मिलान को सुनिश्चित करने, अनुसूचित जाति एवं जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के मामलों में आवश्यक तथ्यों का स्पष्ट उल्लेख करने तथा गवाहों को न्यायालयीन प्रक्रिया के लिए विधिक रूप से तैयार करने के संबंध में महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए।
कार्यक्रम के अंत में प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने विवेचना के दौरान आने वाली विभिन्न समस्याओं को रखा। श्री रजनीकांत ठाकुर ने जप्ती, सैंपलिंग, जैविक एवं भौतिक साक्ष्य संकलन तथा अन्य कानूनी प्रक्रियाओं से जुड़े सवालों का विस्तार से समाधान किया।
पुलिस महानिरीक्षक श्री राम गोपाल गर्ग ने कहा कि इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से विवेचना की गुणवत्ता में सुधार होगा और न्यायालयों में दोषसिद्धि का प्रतिशत बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्होंने सफल आयोजन एवं उपयोगी मार्गदर्शन के लिए श्री रजनीकांत ठाकुर का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का समापन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक मुंगेली श्री भोजराम पटेल द्वारा किया गया।

प्रदीप मिश्रा
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