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बारनवापारा के जंगल में दिखी दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी, वन विभाग में उत्साह

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रायपुर, छत्तीसगढ़

By ACGN 7647981711, 9303948009

देवपुर समर कैंप के दौरान बच्चों और प्रकृति प्रेमियों ने देखी जायंट मालाबार स्क्विरल, वन मंत्री ने दी टीम को बधाई

रायपुर ACGN:-छत्तीसगढ़ के बारनवापारा क्षेत्र से वन्यजीव संरक्षण को लेकर एक बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। बलौदाबाजार वनमंडल अंतर्गत देवपुर जंगल में आयोजित देवपुर समर कैंप 2026 के दौरान दुर्लभ विशाल भारतीय गिलहरी यानी जायंट मालाबार स्क्विरल दिखाई दी है। इस दुर्लभ वन्यजीव के नजर आने के बाद वन विभाग, प्रकृति प्रेमियों और वन्यजीव विशेषज्ञों में उत्साह का माहौल है। इसे प्रदेश के स्वस्थ वन पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है।


वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने इस उपलब्धि पर वन विभाग की टीम को बधाई देते हुए कहा कि राज्य सरकार लगातार जंगलों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए प्रभावी कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि दुर्लभ प्रजातियों का जंगलों में सुरक्षित रूप से दिखाई देना यह साबित करता है कि छत्तीसगढ़ में जैव विविधता संरक्षण की दिशा में बेहतर काम हो रहा है और वन क्षेत्रों को सुरक्षित रखने के प्रयास सफल हो रहे हैं।


जानकारी के अनुसार बलौदाबाजार वनमंडल द्वारा 16 मई से 22 मई 2026 तक देवपुर समर कैंप का आयोजन किया गया था। कैंप के पहले दिन आयोजित बर्डिंग ट्रेल के दौरान इस दुर्लभ गिलहरी को देखा गया। इसकी पहचान प्रकृति प्रेमी और साइबर रिस्क एक्सपर्ट श्री हेमंत वर्मा ने की। विशाल भारतीय गिलहरी का वैज्ञानिक नाम रेटूफा इंडिका है, जो भारत की सबसे बड़ी वृक्षवासी गिलहरियों में गिनी जाती है। इसकी लंबाई पूंछ सहित लगभग तीन फीट तक होती है और इसके शरीर पर लाल, भूरे, काले और क्रीम रंगों का अनोखा मिश्रण देखने को मिलता है।


वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि यह प्रजाति अपना अधिकांश जीवन पेड़ों पर बिताती है और एक पेड़ से दूसरे पेड़ तक लंबी छलांग लगाने में सक्षम होती है। यह वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-2 के तहत संरक्षित प्रजाति है, जिसका शिकार या व्यापार करना कानूनन अपराध है।
वनमंडलाधिकारी श्री धम्मशील गणवीर ने बताया कि बारनवापारा अभ्यारण्य और आसपास के जंगल जैव विविधता से भरपूर हैं। देवपुर जंगल में इस दुर्लभ गिलहरी की मौजूदगी यह दर्शाती है कि यहां का वन क्षेत्र सुरक्षित और पर्यावरणीय रूप से संतुलित है। उन्होंने कहा कि समर कैंप में शामिल बच्चों और युवाओं के लिए यह अनुभव बेहद खास और प्रेरणादायक रहा। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी में प्रकृति और वन्यजीव संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
वन विभाग का मानना है कि सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता के जरिए ही जंगलों और दुर्लभ वन्यजीवों को सुरक्षित रखा जा सकता है। राज्य सरकार पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीव संवर्धन को लेकर लगातार अभियान चला रही है, जिसका सकारात्मक परिणाम अब जमीन पर दिखाई देने लगा है।

प्रदीप मिश्रा
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