आयुष योजनाओं से जिले में बढ़ रही स्वास्थ्य सुविधाएं
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सूरजपुर, छत्तीसगढ़
By ACGN 7647981711, 9303948009
बच्चों से लेकर गर्भवती माताओं और असाध्य रोगियों तक को आयुर्वेद पद्धति से मिल रहा उपचार और देखभाल का लाभ
सूरजपुर/ACGN:- जिला सूरजपुर में आयुष विभाग द्वारा संचालित चार राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रम अब लोगों के लिए लाभकारी साबित हो रहे हैं। कलेक्टर रेना जमील के निर्देश पर जिले में आयुर्वेद आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का लगातार विस्तार किया जा रहा है, जिससे स्कूली बच्चों, गर्भवती महिलाओं, नवजात शिशुओं, असाध्य रोगियों और जोड़ों व मांसपेशियों की समस्याओं से पीड़ित मरीजों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा मिल रही है। जिला प्रशासन द्वारा इन योजनाओं का व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है ताकि अधिक से अधिक लोग इसका लाभ उठा सकें।

राष्ट्रीय आयुष कार्यक्रम “आयुर्विद्या” के तहत बच्चों में आयुर्वेद और स्वस्थ जीवनशैली के प्रति जागरूकता बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है। विद्यार्थियों की स्वास्थ्य जांच, योग प्रशिक्षण और आयुर्वेद विषयक व्याख्यान आयोजित किए जा रहे हैं। साथ ही बच्चों को औषधीय उद्यान और आयुर्वेद चिकित्सालयों का भ्रमण भी कराया जा रहा है, जिससे उनमें पारंपरिक चिकित्सा पद्धति के प्रति रुचि विकसित हो सके। यह कार्यक्रम वर्तमान में जिला मुख्यालय सूरजपुर के 25 किलोमीटर के दायरे में संचालित किया जा रहा है।

“सुप्रजा” कार्यक्रम के माध्यम से गर्भवती माताओं और नवजात शिशुओं की देखभाल पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। गर्भिणीचर्या, गर्भ संस्कार, एएनसी और पीएनसी जैसी सेवाओं के जरिए महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी मार्गदर्शन और उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रामानुजनगर तथा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बतरा, भटगांव और धरमपुर को अधिकृत किया गया है। इस योजना का उद्देश्य आयुर्वेदिक पद्धति के माध्यम से स्वस्थ मां और स्वस्थ शिशु सुनिश्चित करना है।

कारूण्य-पैलिएटिव केयर कार्यक्रम के तहत गंभीर और असाध्य बीमारियों से जूझ रहे मरीजों को घर पहुंच स्वास्थ्य सेवा दी जा रही है। चिकित्सकों और कर्मचारियों की टीम मरीजों के घर जाकर उनका उपचार और देखभाल कर रही है। अब तक जिले में 389 रोगियों का पंजीयन कर उन्हें लगातार सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। यह योजना मरीजों और उनके परिवारों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है।
ऑस्टियोआर्थराइटिस एवं मस्कुलोस्केलेटल डिसऑर्डर कार्यक्रम के जरिए जोड़ों और मांसपेशियों से संबंधित बीमारियों का आयुर्वेद पद्धति से उपचार किया जा रहा है। वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 4,261 लोगों की जांच कर उन्हें उपचार उपलब्ध कराया गया है। यह कार्यक्रम सूरजपुर, प्रतापपुर, प्रेमनगर और ओड़गी विकासखंडों में संचालित किया जा रहा है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को भी सीधा लाभ मिल रहा है।
कलेक्टर रेना जमील ने कहा कि आयुर्वेद भारतीय चिकित्सा पद्धति की अमूल्य धरोहर है, जो केवल रोगों के उपचार तक सीमित नहीं बल्कि स्वस्थ जीवनशैली अपनाने पर भी जोर देती है। उन्होंने जिलेवासियों से इन योजनाओं का अधिक से अधिक लाभ लेने की अपील की है। जिला आयुष विभाग द्वारा लगातार शिविर, जनजागरूकता अभियान और घर-घर पहुंच सेवाओं के माध्यम से इन कार्यक्रमों का विस्तार किया जा रहा है।
प्रदीप मिश्रा
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