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महासमुंद के गांजर में दिखा अद्भुत खगोलीय नजारा, दोपहर 12 बजे गायब हुई छाया

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महासमुंद छत्तीसगढ़

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महासमुंद के गांजर में दिखा प्रकृति का अद्भुत चमत्कार
दोपहर 12 बजे गायब हो गई लोगों की छाया, “शून्य छाया दिवस” का बना ऐतिहासिक साक्षी

संवाददाता/ संतोष तिवारी
महासमुंद, । छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के ग्राम गांजर में 25 मई 2026 को एक बेहद दुर्लभ और रोमांचकारी भौगोलिक घटना देखने को मिली। दोपहर ठीक 12 बजे यहां कुछ क्षणों के लिए लोगों, पेड़ों, खंभों और अन्य वस्तुओं की छाया पूरी तरह गायब हो गई। इस अद्भुत प्राकृतिक घटना को “शून्य छाया दिवस” (Zero Shadow Day) कहा जाता है।
स्थानीय लोगों के लिए यह नजारा किसी आश्चर्य से कम नहीं था। जैसे ही घड़ी की सुई दोपहर 12 बजे पर पहुंची, लोगों ने देखा कि जमीन पर खड़ी वस्तुओं की छाया लगभग समाप्त हो चुकी है। इस अनोखी घटना को देखने गांव में उत्साह और जिज्ञासा का माहौल बना रहा।


क्या है शून्य छाया दिवस? :- भूगोल विशेषज्ञों के अनुसार जब सूर्य पृथ्वी के किसी स्थान के ठीक ऊपर लंबवत स्थिति में पहुंचता है, तब सूर्य की किरणें सीधे जमीन पर गिरती हैं और वस्तुओं की छाया दिखाई नहीं देती। इसी घटना को “शून्य छाया दिवस” कहा जाता है।
यह प्राकृतिक घटना केवल उन क्षेत्रों में देखी जाती है जो कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच स्थित होते हैं। महासमुंद जिले का गांजर क्षेत्र भारतीय मानक समय रेखा 82.5 अंश पूर्वीय देशांतर के बेहद निकट स्थित है, जिसके कारण यहां यह दुर्लभ घटना संभव हुई।
छत्तीसगढ़ में पहली बार बना ऐतिहासिक पल :- जानकारों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में इस तरह “शून्य छाया दिवस” को सार्वजनिक रूप से देखने और समझने का यह संभवतः पहला अवसर रहा। विज्ञान और भूगोल से जुड़ी इस दुर्लभ घटना ने लोगों को प्रकृति के अद्भुत वैज्ञानिक रहस्यों से रूबरू कराया।
इस दौरान बच्चों, युवाओं और ग्रामीणों ने डंडे, बोतल, पेड़ और अन्य वस्तुएं जमीन पर खड़ी कर उनकी छाया का निरीक्षण किया। कुछ क्षणों के लिए छाया गायब होते देख लोग रोमांचित हो उठे। कई लोगों ने मोबाइल कैमरों में इस ऐतिहासिक दृश्य को कैद किया।
दिन सबसे बड़ा, रात सबसे छोटी :- भूगोल प्रेमियों के अनुसार इस दिन गांजर क्षेत्र में दिन की अवधि वर्ष के अन्य दिनों की तुलना में अधिक रही, जबकि रात अपेक्षाकृत छोटी रही। सूर्य की स्थिति और पृथ्वी के झुकाव के कारण यह विशेष परिस्थिति निर्मित हुई।
इन लोगों ने दी महत्वपूर्ण जानकारी गांजर की भौगोलिक स्थिति और इस विशेष घटना की जानकारी साझा करने में डॉ. रमेश चंद्राकर, जगमोहन चंद्राकर एवं भरत सिंह की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
इन सभी ने लोगों को समझाया कि यह कोई चमत्कार नहीं बल्कि पृथ्वी और सूर्य की स्थिति से जुड़ी एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक एवं भौगोलिक प्रक्रिया है।
ग्रामीणों ने कहा जीवन में पहली बार देखा ऐसा नजारा :- गांव के कई लोगों ने बताया कि उन्होंने पहली बार ऐसा दृश्य देखा, जब दोपहर में छाया ही गायब हो गई। लोगों ने इसे प्रकृति और विज्ञान का अद्भुत संगम बताया।
यह “शून्य छाया दिवस” न केवल गांजर बल्कि पूरे महासमुंद जिले के लिए चर्चा का विषय बना हुआ है। विज्ञान और भूगोल के प्रति जागरूकता बढ़ाने वाली यह घटना आने वाले समय में विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन सकती है।

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